Iran attack: ईरान पर हमला इजरायल और अमेरिका ने शुरू कर दिया है। बदले में ईरान ने भी जवाबी हमला कर दिया है। बताया जा रहा है कि हमले में ईरान के आर्मी जनरल को मार दिया गया है। इसी हमले के बदले में दुबई से लेकर सऊदी अरब पर ईरान ने हमले किए हैं। ईरान का मकसद मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिक ठिकानों को ध्वस्त करना है। पहला हमला तो इजरायल ने किया है। अमेरिका अभी भी हमला रोक सकता है, यदि ईरान अपनी जमीन से परमाणु हथियारों को नष्ट कर दे। इसकी गारंटी अमेरिका समझौते की मेज पर बैठकर ईरान से लेना चाहता है। परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक लगाना अमेरिका का लक्ष्य है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का हमले के बाद बयान!
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर की गई कार्रवाई का मकसद मौजूदा सरकार को गिराना और आम ईरानियों की सत्ता पर काबिज होने की छूट देना बताया, तो वहीं दूसरी ओर इजरायली पीएम ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश में ईरान में “आतंकवादी शासन” को समाप्त करना बताया। बेंजामिन नेतन्याहू ने राष्ट्र के नाम संदेश में कहा, “इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान में आतंकवादी शासन द्वारा उत्पन्न अस्तित्व के खतरे को समाप्त करने के लिए एक अभियान शुरू किया है। यह अभियान ऐसी परिस्थितियां पैदा करेगा, जिससे ईरान के लोग अपनी नियति को अपने हाथों में ले सकें। ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियारों से लैस होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”
Iran attack: ईरान ने कड़ा जवाब देने की हुंकार भरी!
अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले के बाद, ईरानी अधिकारियों ने दोनों देशों को कड़ा जवाब देने की कसम खाई। उधर अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर किए गए इस हमले को ऑपरेशन “रोअरिंग लॉयन” नाम दिया है। इस कार्रवाई में सैनिक ठिकानों, मिसाइल निर्माण सुविधाओं और सर्वोच्च नेता खामेनेई के कार्यालय के आसपास के इलाकों को निशाना बनाया गया है। इजरायल ने देशभर में आपातकाल घोषित कर दिया है, अस्पतालों को भूमिगत स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया है और सायरन सक्रिय कर दिए गए हैं। ईरान, इजरायल और इराक ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और सभी उड़ानों को निलंबित कर दिया गया है। खास बात यह है कि हमला उस कूटनीतिक गतिरोध के बीच हुआ है, जब ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता बाधित हो गई।
डोनाल्ड ट्रंप की शर्तें ठुकराकर अड़ा ईरान!
Iran attack: ईरान और अमेरिका के बीच गुरुवार को ओमान की मध्यस्थता में जिनेवा में बातचीत हुई, जो बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। ऐसे में मिडिल ईस्ट में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं। क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका ने विमानों और युद्धपोतों का विशाल बेड़ा तैयार कर रखा है। हालांकि दोनों देशों के बीच बातचीत समाप्त होने से पहले ईरान के सरकारी टेलीविजन ने बताया कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है और इसे विदेशों में स्थानांतरित करने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है। साथ ही ईरान ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने की मांग भी की है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह अमेरिका की मांगों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं है। उधर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता की मध्यस्थता कर रहे ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल-बुसैदी ने कहा कि तकनीकी स्तर की वार्ता अगले सप्ताह वियना में जारी रहेगी, जहां अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का मुख्यालय है। संयुक्त राष्ट्र की यह परमाणु निगरानी संस्था किसी भी संभावित समझौते में अहम भूमिका निभा सकती है। अब युद्ध की लपटों में कितने क्षेत्र तबाह होंगे, कहा नहीं जा सकता। यह सारा खेल अपनी पैठ बनाकर व्यापार को बढ़ाने का ही उपक्रम है, अमेरिका अपने सैनिक बेड़ों से कितनी ही बार धमकियां देता आया है। 1971 में तो अमेरिका ने अपना सातवां बेड़ा भारत के खिलाफ भी उतार दिया था।
भगवती प्रसाद डोभाल
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