Mridul Kant Shastri: खुद को धर्म और मर्यादा का प्रवक्ता बताने वाले कथावाचक मृदुलकांत शास्त्री इन दिनों विवादों के घेरे में हैं। दिल्ली के श्रद्धालुओं के साथ मारपीट का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब उनके एक कथित वीडियो ने नया तूफान खड़ा कर दिया है, जिसमें वे ब्रजवासियों को ‘नपुंसक’ कहते नजर आ रहे हैं। इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक आक्रोश फैल गया है। धार्मिक नगरी में इस तरह की भाषा को लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यही ‘संस्कार’ और ‘संयम’ की शिक्षा देने वाले कथावाचकों की असली तस्वीर है?
क्या था मामला?
ये मामला 11 अप्रैल का है, जब वृंदावन के राधानिवास क्षेत्र में बस स्टैंड के पास कथावाचक की कार और दिल्ली से आए श्रद्धालुओं की कार की टक्कर हो गई। मामूली हादसा देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। इस मामले में कथावाचक की शिकायत पर पुलिस ने तीन महिलाओं सहित छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। लेकिन इसी बीच एक वीडियो वायरल हुआ, जिसने पूरे घटनाक्रम का रुख ही बदल दिया। वायरल वीडियो में कथावाचक द्वारा ब्रजवासियों के लिए इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा ने लोगों की भावनाओं को आहत कर दिया है। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए जन अधिकार फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने एसएसपी से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की।
Mridul Kant Shastri: बच्चों को अवैध रूप से हिरासत में रखा
संस्थापक चौधरी विश्वनाथ प्रताप सिंह, अमित चौधरी और सुधीर शर्मा ने आरोप लगाया कि कथावाचक ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दी हैं। उनका कहना था कि जो व्यक्ति खुद को शास्त्री और संत कहता है, यदि वही आम लोगों को अपशब्द कहे तो वह संत नहीं, बल्कि अपराधी है। वहीं संगठन ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कथावाचक के प्रभाव में आकर पुलिस ने महिलाओं और बच्चों को अवैध रूप से हिरासत में रखा और यहां तक कि मासूमों को लॉकअप में रात बिताने को मजबूर किया गया। फिलहाल, एसएसपी श्लोक कुमार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या धर्म की आड़ में बढ़ते अहंकार पर कोई लगाम लगेगी?








