Sambhal Bulldozer Action: संभल में शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 9 बजे से मस्जिद और आसपास बनी दुकानों पर बुलडोजर की कार्रवाई शुरू हो गई। मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को गिराने के लिए हाइड्रा मशीन मंगाई गई है। मौके पर 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। पुलिस ने पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर दी है, जिससे आम लोगों को वहां जाने से रोका जा रहा है। हालांकि, कुछ लोग अपने घरों की छतों से इस कार्रवाई को देखते नजर आए।
इसके साथ ही, गांव के रहने वाले गुलाम और आसमा के मकानों के कुछ हिस्से भी सरकारी जमीन पर बने पाए गए। प्रशासन ने दोनों को खुद ही कब्जा हटाने के निर्देश दिए। इसके बाद आसमा ने अपने घर के आगे बने हिस्से को और गुलाम ने अपने घर के गेट को छैनी-हथौड़ी से तोड़ना शुरू कर दिया।

अवैध कब्जे पर जारी कार्रवाई
करीब 12 दिन पहले यानी 5 अप्रैल को भी मस्जिद पर कार्रवाई की योजना थी, लेकिन उस समय बुलडोजर चालक ने मीनार गिराने से मना कर दिया था। उसका कहना था कि मीनार उसके ऊपर गिर सकती है, जिससे जान का खतरा है। हालांकि, उसी दिन मदरसा, पांच दुकानें और मस्जिद का गेट तोड़ दिया गया था। दुकानों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा बच गया था, जिसे अब हटाया जा रहा है। यह मामला मुबारकपुर बंद गांव का है।
गांव के रहने वाले गुलाम रसूल का कहना है कि उन्होंने यह जमीन प्रधान के चाचा से 30 हजार रुपये में खरीदी थी और उन्हें नहीं पता था कि यह ग्राम समाज की जमीन है। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है।वहीं, आशा कार्यकर्ता आसमा ने सवाल उठाया कि अगर यह सरकारी जमीन थी तो इसे बेचा क्यों गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह जमीन करीब 30 साल पहले खरीदी थी और अब अगर उन्हें इसे खाली करना पड़ रहा है, तो उन्हें उनकी दी गई रकम वापस मिलनी चाहिए।

पूरा मामला क्या है
मुबारकपुर बंद गांव में करीब 30 साल पहले सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया था। लगभग 5 साल पहले यहां खेल के मैदान की 150 वर्गमीटर जमीन पर मस्जिद बनाई गई। इसके अलावा पांच दुकानें और आठ मकान भी बनाए गए। इसी जमीन पर दो सरकारी प्राइमरी स्कूल भी मौजूद हैं।
जब इस अवैध कब्जे की शिकायत जिलाधिकारी तक पहुंची, तो तहसीलदार कोर्ट ने 28 मार्च को नोटिस जारी कर निर्माण हटाने के आदेश दिए। उसी दिन जमीन की माप कराई गई और 30 मार्च से स्थानीय मजदूरों के जरिए अवैध निर्माण हटाने का काम शुरू हुआ।
31 मार्च से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने खुद ही मदरसा गौसुल और पांच दुकानों को तोड़ना शुरू किया, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। इसके बाद मस्जिद कमेटी और ग्राम प्रधानपति हाजी मुनव्वर के अनुरोध पर 5 अप्रैल को प्रशासन ने 2100 रुपये शुल्क लेकर करीब दो घंटे में मदरसा और दुकानों को गिरा दिया।
ग्रामीणों ने मस्जिद को खुद नहीं तोड़ा और प्रशासन से इसे हटाने की मांग की। ग्राम प्रधानपति का कहना है कि स्कूलों को छोड़कर बाकी सभी अवैध निर्माण हटाए जाएं।

Sambhal Bulldozer Action: आज की कार्रवाई से जुड़े अहम अपडेट्स
थोड़ी देर में मस्जिद की 35 फीट ऊंची मीनार को हाइड्रा मशीन से गिराया जाएगा। इसके लिए एक मजदूर मीनार पर चढ़कर उसे एक दिशा में गिराने के लिए रस्सी बांध रहा है।गुलाम रसूल के घर का गेट और बैठक तथा आसमा के घर के आगे बना करीब 50 गज का टीन शेड भी सरकारी जमीन पर बना हुआ है। इसलिए प्रशासन ने इन्हें खुद ही हटाने के निर्देश दिए और दोनों ने इसे तोड़ना शुरू कर दिया।
ढांचे गिराने से पहले बिजली विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर बिजली सप्लाई बंद की। यह कार्रवाई नायब तहसीलदार अरविंद कुमार की नाराजगी के बाद की गई। कार्रवाई के दौरान गांव में पुलिस ने फ्लैग मार्च भी किया और भारी संख्या में फोर्स तैनात रही। तीन थानों असमोली, ऐंचौड़ा कम्बोह और हजरतनगर गढ़ी की पुलिस के साथ RAF के जवान भी मौके पर मौजूद हैं।
नायब तहसीलदार अरविंद कुमार और बबलू कुमार की निगरानी में दो बुलडोजर और एक हाइड्रा मशीन से कार्रवाई की जा रही है।इस दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते बचा। दुकानों के लेंटर तोड़ते समय लोहे का सरिया बिजली के तार से छू गया, जिससे करंट आ गया। चालक ने तुरंत बुलडोजर पीछे कर लिया, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ।
इसके बाद नायब तहसीलदार ने बिजली विभाग के अधिकारी से नाराजगी जताई और कहा कि समय पर बिजली लाइन बंद नहीं की गई, जिससे बड़ा हादसा हो सकता था।

लेखपाल की जानकारी
लेखपाल सुरेंद्र कुमार के अनुसार, खेल मैदान की 150 वर्गमीटर जमीन पर मस्जिद बनाई गई थी। उसी क्षेत्र में करीब ढाई बीघा जमीन पर प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल भी हैं। खाद गड्ढे की जमीन पर 540 वर्गमीटर में मदरसा और पांच दुकानें बनाई गई थीं।
जिन दुकानों को हटाया गया है, उनमें हामिद की समोसा दुकान, अफजल की सब्जी की दुकान, शाने आलम की नाश्ते की दुकान, फरमान का मेडिकल स्टोर और अजगर का जन सेवा केंद्र शामिल हैं।
Sambhal Bulldozer Action: पहले भी हुई थी कार्रवाई
इससे एक दिन पहले ईदगाह और इमामबाड़ा भी बुलडोजर से गिराया गया था। प्रशासन के अनुसार, ये निर्माण चारागाह और खाद गड्ढे की जमीन पर किए गए थे।
तहसीलदार धीरेन्द्र सिंह ने साफ कहा कि इलाके में किसी भी अवैध कब्जे को नहीं छोड़ा जाएगा और सभी को हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई बच्चों के हित में की जा रही है, ताकि उन्हें खेलने के लिए मैदान मिल सके।
ग्राम प्रधानपति हाजी मुनव्वर ने बताया कि यह मामला करीब 30-31 साल पुराना है और मस्जिद का निर्माण 4-5 साल पहले हुआ था। उन्होंने कहा कि आदेश मिलने के बाद लोगों ने दुकानें पहले ही हटा ली थीं, लेकिन मजदूर न मिलने के कारण बाकी निर्माण हटाने में दिक्कत आ रही थी, इसलिए मशीनों का सहारा लेना पड़ा।
उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्रवाई से करीब 1 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। आगे जो भी प्रशासन का आदेश होगा, उसी के अनुसार काम किया जाएगा।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
इस कार्रवाई से गांव के लोग नाराज हैं। यहां करीब 500-600 लोग नमाज पढ़ने आते थे। अब मस्जिद हटाए जाने के बाद लोग दुखी हैं और आज यहां नमाज नहीं होगी।
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