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अमेरिका–इजराइल हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का दावा: परिवार के कई सदस्य भी मारे गए, ईरान ने कहा-जवाब जल्द

ईरान संघर्ष के कारण मध्य पूर्व में हालात गंभीर हो गए हैं। खामेनेई की मौत के दावे, अमेरिका-इजराइल और ईरान के हमलों तथा भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं।
खामेनेई मौत का दावा और तनाव

Middle East War: मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का निधन हो गया है। ईरानी मीडिया की समाचार एजेंसियां तसनीम और फार्स ने इस खबर की पुष्टि करने की बात कही है। खबरों में यह भी कहा गया है कि खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू भी इजराइली हमलों में मारे गए हैं। हालांकि, ईरान सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

खामेनेई मौत का दावा और तनाव
खामेनेई मौत का दावा और तनाव

अयातुल्ला अली खामेनेई मौत के दावे से मिडिल ईस्ट तनाव

इससे पहले Donald Trump ने भी खामेनेई की मौत का दावा किया था। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि खामेनेई इतिहास के सबसे क्रूर लोगों में से एक थे और उनकी मौत ईरान की जनता के साथ-साथ अमेरिका और दुनिया के कई देशों के लिए न्याय जैसी है।

CNN को दिए गए बयान में इजराइल के अधिकारियों ने दावा किया कि उनके पास खामेनेई के शव की तस्वीर है। अधिकारियों के अनुसार, यह शव मलबे से बरामद किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका ने मिलकर खामेनेई के घर पर संयुक्त हमला किया और उसे पूरी तरह नष्ट कर दिया।

Middle East War: खामेनेई मौत का दावा और तनाव
खामेनेई मौत का दावा और तनाव

दरअसल, शनिवार को इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया। इस हमले में ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों को निशाना बनाया गया। इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल पर हमला किया।

Middle East War: खामेनेई का जीवन परिचय

अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे शुरू से ही शाह शासन की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन का समर्थन करते थे।

1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने के कारण उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और ईरान के क्रांतिकारी नेता रूहोल्लाह खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी बन गए।

1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार खत्म हो गई। इसके बाद खोमैनी देश वापस आए और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उन्हें उप रक्षा मंत्री भी बनाया गया।

Middle East War: खामेनेई मौत का दावा और तनाव
खामेनेई मौत का दावा और तनाव

1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण देते समय खामेनेई पर बम हमला हुआ था। उसी साल एक अन्य बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई थी। इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी जीत के साथ ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने।

1989 में खोमैनी के निधन के बाद खामेनेई को ईरान का सर्वोच्च नेता यानी “रहबर” बनाया गया। इसके लिए देश के संविधान में भी बदलाव किया गया। उनके समर्थक मानते हैं कि वे इस्लामी व्यवस्था के मजबूत रक्षक हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कठोर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।

हमलों में भारी नुकसान और मौतें

ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 740 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। यह जानकारी ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने दी है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हुईं। हमलों में ईरान के 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया गया।

खामेनेई मौत का दावा और तनाव
खामेनेई मौत का दावा और तनाव

ईरान का जवाबी हमला

अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई के बाद ईरान ने भी ड्रोन और मिसाइल हमले किए। ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागकर इजराइल समेत मध्य-पूर्व के 9 देशों को निशाना बनाया।

ईरान ने कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर भी हमला किया। इसके अलावा, ईरान ने दुबई पर भी ड्रोन हमला किया, जिसमें पाम होटल एंड रिसोर्ट और दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा के आसपास का इलाका भी प्रभावित हुआ। बहरीन में भी कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया गया।

खामेनेई मौत का दावा और तनाव
खामेनेई मौत का दावा और तनाव
ईरान-इजराइल विवाद क्यों बढ़ता है?
  1. अमेरिका को शक है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर सकता है, इसलिए उस पर कई बार प्रतिबंध लगाए गए हैं। ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल बिजली उत्पादन और वैज्ञानिक शोध के लिए है।

  2. परमाणु समझौते की बातचीत में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर विवाद होता रहा है। ईरान का कहना है कि उसकी मिसाइलें देश की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।

  3. अमेरिका इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता है, जबकि ईरान खुले तौर पर इजराइल का विरोध करता है और उस पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता है।

  4. अमेरिका का आरोप है कि ईरान इराक, सीरिया, लेबनान और यमन जैसे देशों में अपने समर्थक गुटों की मदद करके अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। ईरान का कहना है कि वह अपने सहयोगियों और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करता है।

  5. अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है। इसके जवाब में ईरान कभी अपने परमाणु कार्यक्रम को तेज करने और कभी सख्त बयान देने जैसे कदम उठाता रहा है।

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