Lok Sabha: लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के लिहाज से अफसोसजनक बताते हुए कहा कि करीब चार दशक बाद लोकसभा स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आया है, जो सामान्य घटना नहीं है। लोकसभा में चर्चा के दौरान शाह ने कहा कि स्पीकर किसी एक राजनीतिक दल के नहीं होते, बल्कि पूरे सदन के होते हैं। उनका दायित्व सभी सांसदों के अधिकारों की रक्षा करना और सदन की गरिमा बनाए रखना है।
10 घंटे से ज्यादा चली चर्चा
अमित शाह ने बताया कि इस मुद्दे पर सदन में 10 घंटे से ज्यादा चर्चा हुई, जिसमें 42 से अधिक सांसदों ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर की नियुक्ति हुई थी, तब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के नेताओं ने मिलकर उन्हें आसन तक पहुंचाया था। शाह ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि उस समय दोनों पक्षों का उन्हें समर्थन प्राप्त था। ऐसे में अब उनकी निष्ठा पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
गृह मंत्री ने कहा कि किसी भी निर्णय पर असहमति जताना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन स्पीकर की निष्ठा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा देश के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और दुनिया भर में इसकी प्रतिष्ठा है। जब इस संस्था के प्रमुख यानी स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की छवि प्रभावित होती है।
Lok Sabha: सदन नियमों से चलता है, मेला नहीं
अमित शाह ने कहा कि संसद की कार्यवाही निर्धारित नियमों के अनुसार चलती है। उन्होंने कहा कि सदन कोई मेला नहीं है जहां कोई भी व्यक्ति अपनी मर्जी से कुछ भी बोल सकता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सदस्य नियमों की अनदेखी करता है तो उसे रोकना–टोकना और जरूरत पड़ने पर बाहर करना स्पीकर का कर्तव्य है। उन्होंने यह भी कहा कि ये नियम आज के नहीं बल्कि जवाहरलाल नेहरू के समय से बने हुए हैं। गृह मंत्री ने बताया कि संसद की कार्यवाही के दौरान सदस्य स्पीकर के माध्यम से ही अपनी बात रखते हैं। यदि कोई सदस्य नियमों का उल्लंघन करता है तो स्पीकर को चेतावनी देने, नामित करने और निलंबित करने का अधिकार है। गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में स्पीकर सदन की कार्यवाही को स्थगित भी कर सकते हैं। इसके अलावा स्पीकर को असंसदीय शब्दों को कार्यवाही से हटाने का अधिकार भी प्राप्त है।
अमित शाह ने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वह कई वर्षों तक विपक्ष में बैठे हैं, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने कभी भी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया। संसद की व्यवस्था और शिष्टाचार बनाए रखना स्पीकर का पहला कर्तव्य होता है और सभी सांसदों को इसका सम्मान करना चाहिए।
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