Lpg shortage: भारत के कई हिस्सों में इन दिनों LPG सिलेंडरों की किल्लत देखने को मिल रही है, जबकि पाइपलाइन से मिलने वाली नेचुरल गैस (PNG) बिना किसी रुकावट के घरों और व्यवसायों तक पहुंच रही है। इसका मतलब साफ है, LPG और PNG की सप्लाई चेन, वितरण प्रणाली और आयात पर निर्भरता में बड़ा फर्क है।LPG vs PNG: LPG सिलेंडर सालों से खाना पकाने के लिए घरों की पहली पसंद रहे हैं। PNG पाइपलाइन के ज़रिए सीधे घरों और कारोबारों तक पहुंचती है, जिससे इसकी सप्लाई ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद है।
सरकार का मैसेज:
PNG नेटवर्क अब 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फैला है, लगभग 1.59 करोड़ घर इससे जुड़े हैं। सरकार का लक्ष्य 2034 तक इसे 12.63 करोड़ कनेक्शनों तक बढ़ाना है। मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने भी कहा, “LPG पर दबाव कम करने के लिए PNG अपनाएं।”
Lpg shortage: क्यों PNG ज्यादा सुरक्षित है:
1. पाइपलाइन सप्लाई लगातार बहती रहती है, सिलेंडर की लॉजिस्टिक्स पर निर्भरता कम होती है। 2. घरेलू उत्पादन, भारत अपनी प्राकृतिक गैस का लगभग आधा हिस्सा खुद पैदा करता है। 3. अलग-अलग देशों से आयात, किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता नहीं। 4. सरकार की प्राथमिकता, संकट के समय घरेलू PNG उपयोगकर्ताओं को पहले गैस मिलती है।
Lpg shortage: LPG की चुनौतियां:
भारत अपनी LPG जरूरत का करीब 62% आयात करता है, और इसका 90% स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है। हाल के वैश्विक तनावों और सरकारी प्राथमिकताओं के चलते कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई रोकी गई, जिससे छोटे व्यवसाय प्रभावित हुए।
विशेषज्ञों का सुझाव:
PNG नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार किया जाए। घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाया जाए। LPG पर अत्यधिक निर्भरता कम की जाए।
निष्कर्ष:
Lpg shortage: मौजूदा LPG संकट ने साफ कर दिया है कि PNG अपनाने से घरों और छोटे व्यवसायों की ऊर्जा सुरक्षा बढ़ सकती है, और देशभर में LPG पर दबाव भी कम होगा।
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