UP News: वाराणसी में गंगा नदी के बीच नाव पर कथित तौर पर इफ्तार और चिकन बिरयानी पार्टी करने के मामले में गिरफ्तार 14 आरोपितों को अदालत से बड़ा झटका लगा है। बीते दिन सोमवार को स्थानीय अदालत ने सभी की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि आरोपितों पर लगे आरोप गंभीर और गैर-जमानती प्रकृति के हैं, ऐसे में इस स्तर पर उन्हें राहत देना उचित नहीं होगा। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमित कुमार यादव की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को अत्यंत संवेदनशील बताया। अदालत ने भी माना कि प्रकरण के सामाजिक और धार्मिक प्रभाव को देखते हुए जमानत देने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
क्या था मामला?
यह पूरा विवाद उस समय सामने आया जब पिछले सप्ताह गंगा नदी के बीच एक नाव पर बिरयानी खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के सामने आने के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने इस पर आपत्ति जताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि गंगा, जो सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है, वहाँ इस प्रकार मांसाहार करना और उसका अवशेष नदी में फेंकना धार्मिक भावनाओं को आहत करता है। जांच के दौरान पुलिस ने मामले में कई नई धाराएं भी जोड़ी हैं। आरोप है कि आरोपितों ने नाविक को डरा-धमकाकर उसकी नाव का जबरन उपयोग किया। इसे लेकर अपहरण और आपराधिक दबाव डालने जैसी धाराएं भी शामिल की गई हैं।
UP News: किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस के अनुसार, आरोपितों के खिलाफ कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, जिनमें शामिल हैं धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप, पूजा स्थल को अपवित्र करने से संबंधित धाराएं, सार्वजनिक उपद्रव फैलाना, जल प्रदूषण फैलाने का आरोप और दो समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ाने का प्रयास। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इन आरोपों में कड़ी सजा का प्रावधान है। फिलहाल आरोपितों को जमानत देने से जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी आधार पर सभी 14 आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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