Shimla: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के राम मंदिर परिसर स्थित एक हॉल में प्रस्तावित ‘निकाह’ समारोह को लेकर तनाव बढ़ गया है। कई हिंदू संगठनों ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि वे किसी भी दशा में ऐसा नहीं होने देंगे।हिंदू संगठनों ने इसे अनुचित बताया है और चेतावनी दी है कि अगर कार्यक्रम योजना के अनुसार हुआ तो वे विरोध-प्रदर्शन करेंगे।
यह मामला औपचारिक रूप से मंदिर प्रबंधन के सामने भी उठाया गया है। हिंदू संगठनों ने प्रबंध समिति सूद सभा के सामने अपना विरोध दर्ज कराया है। मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों के सार्वजनिक बयानों के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
यह मामला औपचारिक रूप से मंदिर प्रबंधन के सामने भी उठाया गया है। हिंदू संगठनों ने प्रबंध समिति सूद सभा के सामने अपना विरोध दर्ज कराया है। मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों के सार्वजनिक बयानों के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
क्यों नाराज हैं हिंदू संगठन ?
दरअसल, शिमला के ईदगाह कॉलोनी निवासी मोहम्मद नासिर अपनी बेटी का निकाह राम मंदिर हॉल में आयोजित करना चाहते हैं। इस प्रस्ताव का हिंदू संघर्ष समिति ने कड़ा विरोध किया है और खुले तौर पर इसका विरोध जताया है। हिंदू संघर्ष समिति का कहना है कि मंदिर परिसर में किसी मुस्लिम परिवार को शादी करने की अनुमति देना स्वीकार्य नहीं है। अगर समारोह रद्द नहीं किया गया तो बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।
समिति के नेता मदन ठाकुर ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वे प्रतीकात्मक विरोध करेंगे, जिसमें ‘मुंडन’ (सिर मुंडवाना) और प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं। ठाकुर ने कहा, “यह हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने की सोची-समझी कोशिश है। कुछ लोग थोड़े पैसे के लिए इसमें शामिल हैं। अगर भाईचारे की बात है, तो हमें भी मस्जिदों में हनुमान चालीसा और जागरण करने की अनुमति मिलनी चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके अनुसार ‘हिंदू विरोधी’ गतिविधियां नहीं रोकी गईं, तो 11 अप्रैल को उसी स्थान पर विरोध मार्च निकाला जाएगा और प्रतिभागी मुंडन करेंगे।
समिति के नेता मदन ठाकुर ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वे प्रतीकात्मक विरोध करेंगे, जिसमें ‘मुंडन’ (सिर मुंडवाना) और प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं। ठाकुर ने कहा, “यह हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने की सोची-समझी कोशिश है। कुछ लोग थोड़े पैसे के लिए इसमें शामिल हैं। अगर भाईचारे की बात है, तो हमें भी मस्जिदों में हनुमान चालीसा और जागरण करने की अनुमति मिलनी चाहिए।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनके अनुसार ‘हिंदू विरोधी’ गतिविधियां नहीं रोकी गईं, तो 11 अप्रैल को उसी स्थान पर विरोध मार्च निकाला जाएगा और प्रतिभागी मुंडन करेंगे।
Shimla: क्या कहता है मंदिर प्रबंधन ?
इस विवाद के बीच सूद सभा ने अलग रुख अपनाया है। समिति के प्रमुख राजीव सूद ने कहा कि संगठन सभी धर्मों की भावनाओं का सम्मान करता है और इस स्थान पर पहले भी ऐसे कार्यक्रम हो चुके हैं। राजीव सूद ने कहा, “मंदिर परिसर में किसी भी हालत में मांस, मछली और शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित है। हिंदुओं की भावनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। संघर्ष समिति ने ज्ञापन दिया है, जिसके बाद आज एक बैठक बुलाई गई है ताकि आगे का फैसला लिया जा सके। दूल्हा-दुल्हन दोनों मुस्लिम हैं और शादी मंदिर के अंदर नहीं, बल्कि उसके बड़े परिसर के एक हॉल में हो रही है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का संविधान और सूद सभा के नियम धर्म के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते। उन्होंने बताया कि आपसी विचार-विमर्श के बाद इस मामले पर जल्द ही अंतिम फैसला घोषित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत का संविधान और सूद सभा के नियम धर्म के आधार पर भेदभाव की अनुमति नहीं देते। उन्होंने बताया कि आपसी विचार-विमर्श के बाद इस मामले पर जल्द ही अंतिम फैसला घोषित किया जाएगा।








