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विवाद, सवाल और तीखे वार… महिला आरक्षण विधेयक पर नेताओं के अलग-अलग सुर

महिला आरक्षण विधेयक
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Women Reservation Bill: शुक्रवार को लंबी बहस और मतभेदों के बाद संविधान का 31वां संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका। इस विधेयक को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है, लेकिन इसके समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जो आवश्यक संख्या से काफी कम थे। इस तरह महिला आरक्षण कानून लागू नहीं हो पाया। अब राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है कोई इसे सही मान रहा है तो कोई गलत ठहरा रहा है। आइए जानते हैं, किस नेता ने क्या कहा।

राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि संशोधन विधेयक गिर गया। उन्होंने आरोप लगाया कि महिलाओं के नाम पर संविधान को बदलने के लिए असंवैधानिक तरीका अपनाया गया। उन्होंने कहा कि देश ने सब देख लिया और विपक्षी गठबंधन ने इसे रोक दिया।

Women Reservation Bill: प्रियंका गांधी ने बताया महिलाओं का अधिकार

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण इस देश की महिलाओं का हक है, जिसे कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने भरोसा जताया कि एक दिन यह जरूर लागू होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि इसे 2011 की जनगणना और परिसीमन से जोड़कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का महिलाओं का हितैषी बनने का प्रयास आज असफल साबित हुआ।

अखिलेश यादव ने बताया साजिश

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि जनता के बढ़ते विरोध से ध्यान हटाने के लिए यह तथाकथित महिला आरक्षण विधेयक लाया गया था। उनके अनुसार, इसका पास न होना सत्ताधारी दल की नीयत और रणनीति की हार है।

बीजद ने कहा ‘सत्य की जीत’

ओडिशा की बीजू जनता दल ने कहा कि 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने और लोकसभा सीटों की संख्या 800 से ज्यादा करने के प्रस्ताव वाला यह संशोधन विधेयक पास नहीं हुआ, जो ‘सत्य की जीत’ है। पार्टी के नेता नवीन पटनायक ने कहा कि यह असल में महिला आरक्षण विधेयक नहीं बल्कि विवादित परिसीमन से जुड़ा संशोधन था। उन्होंने पहले ही मांग की थी कि महिला आरक्षण को इससे अलग किया जाए।

अशोक गहलोत ने बताया सोची-समझी साजिश

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गेहलोत ने कहा कि पहले से पारित महिला आरक्षण कानून को रोकने के लिए नया विधेयक लाया गया, जो एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को पता था कि विपक्ष के समर्थन के बिना यह विधेयक पास नहीं होगा, फिर भी विपक्ष को साथ लेने की गंभीर कोशिश नहीं की गई।

मायावती ने कांग्रेस पर उठाए सवाल

बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि कांग्रेस अब महिला आरक्षण में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की बात कर रही है, लेकिन जब उसकी सरकार थी तब उसने इन वर्गों को उनका पूरा आरक्षण दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

अभिषेक बनर्जी ने भाजपा की बेचैनी बताई

टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लोकसभा में परिसीमन से जुड़े विधेयक के पास न होने से भाजपा की बेचैनी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने सत्ताधारी दल की स्थिति को उजागर कर दिया है।

अमित शाह ने विपक्ष को ठहराया जिम्मेदार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते में कौन बाधा बना और चुनाव में इसका जवाब जरूर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण का विरोध करने वालों से नारी शक्ति हिसाब मांगेगी।

स्मृति ईरानी ने बताया विश्वासघात

भाजपा नेता स्मृति ईरानी ने कहा कि संसद में जो हुआ, वह महिलाओं के साथ सीधा विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं के समर्थन में खड़े होने का समय था, तब कुछ लोगों ने राजनीति को प्राथमिकता दी और महिलाओं को उनके अधिकार से दूर रखने की कोशिश की।

नितिन नवीन ने विपक्ष की आलोचना की

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि यह दिन इतिहास में दर्ज हो सकता था, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगियों के कारण ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने इन दलों पर महिला विरोधी रुख अपनाने और देश की महिलाओं के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया।

जी किशन रेड्डी ने कहा लोकतंत्र के लिए काला दिन

केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक का पास न होना भारत के लोकतंत्र के लिए काला दिन है। उन्होंने कहा कि यह समय एकजुट होकर महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने का था, लेकिन इसके बजाय प्रतिबद्धता की कमी सामने आई।

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