Up news: कानपुर में एक ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। पुलिस ने मिलिट्री इंटेलीजेंस की सूचना पर एक शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को भारतीय सेना का नायब सूबेदार बताकर युवाओं से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये ठग रहा था। आरोपी की पहचान शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव के रूप में हुई है, जो गोरखपुर के पिपरही गांव का रहने वाला है। उसके पास से सेना की वर्दी, फर्जी आईडी कार्ड और कई नकली दस्तावेज बरामद हुए हैं।
स्पोर्ट्स कोटे के नाम पर बनाता था शिकार
पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवाओं को स्पोर्ट्स कोटे से आर्मी में भर्ती कराने का झांसा देता था। वह पहले रेसलिंग सर्टिफिकेट बनवाने के नाम पर 10-20 हजार रुपये लेता, फिर नौकरी पक्की कराने के लिए 6 से 10 लाख रुपये तक ऐंठ लेता था। मिलिट्री इंटेलीजेंस ने जब जांच की तो पता चला कि वह सेना में किसी भी पद पर तैनात नहीं है, जिसके बाद पुलिस के साथ मिलकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
Up news: गांव में भी बना रखा था फर्जी रुतबा
हैरानी की बात यह है कि आरोपी के परिवार और गांव के लोग भी उसे असली फौजी ही मानते थे। वह लंबे समय से इस ठगी को अंजाम दे रहा था और अपने आसपास पूरी तरह भरोसे का माहौल बना चुका था। उसके पास से नायब सूबेदार की फर्जी आईडी, मोहरें और कैंटीन कार्ड तक बरामद किए गए हैं।
Up news: AI से बनाई हथियारों वाली फोटो
जांच में सामने आया कि आरोपी ने खुद की कई तस्वीरें AI टूल्स की मदद से तैयार की थीं, जिनमें वह सेना की वर्दी और हथियारों के साथ नजर आता था। इन्हीं तस्वीरों को दिखाकर वह लोगों का भरोसा जीतता था। असल में उसके पास न कोई ऑफिस था और न ही कोई असली हथियार।
फर्जी पहचान से मिलिट्री एरिया तक पहुंच
Up news: सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वह फर्जी आईडी के दम पर कानपुर छावनी जैसे प्रतिबंधित इलाकों में भी आसानी से घुस जाता था। इससे लोगों को उस पर और ज्यादा भरोसा हो जाता था। फिलहाल पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। कोशिश है कि इस ठगी गिरोह से जुड़े बाकी लोगों और पीड़ित युवाओं की पूरी जानकारी सामने लाई जा सके।
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