Tejashwi Yadav: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में हुए मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को नई मंत्रिपरिषद पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रिमंडल विस्तार में न तो विकास की स्पष्ट सोच दिखाई देती है और न ही सामाजिक तथा क्षेत्रीय संतुलन का ध्यान रखा गया है। पटना स्थित पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में तेजस्वी ने भाजपा और जनता दल यूनाइटेड दोनों को निशाने पर लिया।
सरकार गठन में ही निकल गया आधा समय
तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछले छह महीनों में बिहार की राजनीति केवल सत्ता संतुलन और कुर्सी बचाने में उलझी रही। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान सरकार गठन और नेतृत्व परिवर्तन में ही काफी समय बर्बाद हो गया। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में राज्य ने दो मुख्यमंत्री और चार उपमुख्यमंत्री देख लिए हैं। उनके अनुसार यह स्थिति दिखाती है कि सरकार के पास न तो स्थिर नेतृत्व है और न ही विकास के लिए कोई ठोस योजना। तेजस्वी ने कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार से जनता को उम्मीद थी कि युवाओं, किसानों और बेरोजगारों के लिए कोई स्पष्ट दिशा दिखाई देगी, लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया। उन्होंने दावा किया कि नई टीम में प्रशासनिक दृष्टि और भविष्य की सोच दोनों का अभाव है।
Tejashwi Yadav: वंशवाद को लेकर भाजपा और जदयू पर निशाना
राजद नेता ने भाजपा और जदयू पर वंशवादी राजनीति को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान विपक्ष पर परिवारवाद का आरोप लगाने वाले दल अब खुद उसी राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं। तेजस्वी ने विशेष रूप से नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार और उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जिन लोगों ने कभी चुनाव नहीं लड़ा, उन्हें मंत्री पद कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर चुनाव प्रचार में ‘शहजादों’ की बात करते हैं, लेकिन अब भाजपा और उसके सहयोगियों को बताना चाहिए कि असली शहजादे कौन हैं। तेजस्वी ने दावा किया कि नए मंत्रिमंडल में कई मंत्री राजनीतिक परिवारों से जुड़े हुए हैं।
रोजगार और सामाजिक संतुलन का मुद्दा उठाया
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार सरकार बेरोजगार युवाओं की मांगों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नौकरी और भर्ती प्रक्रिया को लेकर आवाज उठाने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं को सुनने के बजाय बल प्रयोग कर रही है। तेजस्वी ने कहा कि राज्य में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान राजनीतिक समीकरणों को साधने में लगा हुआ है।
राजद नेता ने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय, जातिगत और सामाजिक संतुलन बनाए रखने में सरकार विफल रही है। उनके अनुसार इससे कई वर्गों में असंतोष बढ़ सकता है। बिहार की राजनीति में इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।
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