Bengal Oath: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। भाजपा विधायक दल के नेता चुने जाने के बाद सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को कोलकाता स्थित राजभवन पहुंचकर राज्यपाल आरएन रवि से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस दौरान उनके साथ भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। भाजपा की जीत के बाद अब राज्य में पहली बार पार्टी की सरकार बनने जा रही है और सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
विधायक दल की बैठक में सुवेंदु के नाम पर लगी मुहर
भाजपा विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सुवेंदु अधिकारी के नाम पर सहमति बनी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया। भाजपा नेताओं ने सुवेंदु अधिकारी को राज्य की जनता की उम्मीदों का चेहरा बताते हुए उनके नेतृत्व में नई सरकार बनने पर विश्वास जताया। सुवेंदु अधिकारी ने भवानीपुर विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी को करीब 15 हजार वोटों से हराया था। इस बड़ी जीत के बाद से ही उन्हें मुख्यमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। भाजपा के अनुसार, सुवेंदु अधिकारी 9 मई को रवींद्र जयंती के अवसर पर ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
Bengal Oath: ममता बनर्जी आधिकारिक तौर पर बनीं पूर्व मुख्यमंत्री
राज्यपाल आरएन रवि द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा भंग करने की घोषणा के बाद ममता बनर्जी की सरकार का कार्यकाल भी समाप्त हो गया। इसके साथ ही ममता बनर्जी अब आधिकारिक तौर पर राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री बन गई हैं। विधानसभा भंग होने के बाद पिछली मंत्रिपरिषद भी स्वतः समाप्त मानी गई। हालांकि चुनाव परिणाम आने के बाद ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह राज्यपाल को इस्तीफा नहीं सौंपेंगी। उनका कहना था कि घोषित नतीजे वास्तविक जनमत को नहीं दर्शाते हैं। उन्होंने यह भी साफ किया था कि वह न तो अपनी पार्टी की हार स्वीकार कर रही हैं और न ही भवानीपुर सीट से अपनी व्यक्तिगत हार।
बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत को राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के शासन के बाद अब भाजपा पहली बार सत्ता में आने जा रही है। भाजपा नेताओं का दावा है कि नई सरकार राज्य में विकास, कानून व्यवस्था और रोजगार के मुद्दों पर तेजी से काम करेगी। वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद राज्य की राजनीति में नई रणनीतियों और समीकरणों की चर्चा भी तेज हो गई है।
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