Breaking News
Home » राजनीति » तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन की अटकलें तेज, रविवार को खत्म हो जाएगा सरकार का कार्यकाल

तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन की अटकलें तेज, रविवार को खत्म हो जाएगा सरकार का कार्यकाल

Chennai: तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन की अटकलें तेज, रविवार को खत्म हो जाएगा सरकार का कार्यकाल
Chennai: तमिलनाडु में नई सरकार के गठन को लेकर जारी सियासी घमासान अब और गहरा गया है। राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की अटकलें तेज हो गई हैं, क्योंकि सरकार गठन को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है।आरोप-प्रत्यारोप, विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त, फर्जी समर्थन पत्र और ‘लापता’ विधायकों के दावों ने राज्य की राजनीति को बेहद पेचीदा बना दिया है।

10 मई को समाप्त हो रहा सरकार का कार्यकाल

तमिलनाडु की मौजूदा सरकार का कार्यकाल 10 मई को समाप्त हो रहा है, लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि अगली सरकार कौन बनाएगा। इस बीच राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने साफ कर दिया है कि 234 सदस्यीय विधानसभा में कम से कम 118 विधायकों का समर्थन साबित किए बिना किसी भी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया जाएगा। 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि, बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े से वह अभी भी पीछे है।

Chennai: मामला यहां उलझ गया

राज्य में डीएमके गठबंधन को 73 सीटें मिलीं, जबकि एआईएडीएमके गठबंधन ने 53 सीटों पर जीत दर्ज की। बहुमत जुटाने के लिए टीवीके ने कांग्रेस, विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके), सीपीआई और सीपीआई (एम) से बातचीत शुरू की। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद टीवीके का आंकड़ा 113 तक पहुंच गया। बाद में सीपीआई और सीपीआई (एम) ने भी बिना शर्त बाहरी समर्थन देने का ऐलान किया, जिससे संख्या बढ़कर 117 हो गई, लेकिन मामला यहां भी उलझ गया। विजय ने दो सीटों से चुनाव जीता है और उन्हें एक सीट छोड़नी पड़ सकती है। ऐसे में प्रभावी संख्या फिर कम हो सकती है और टीवीके बहुमत से पीछे रह सकती है। वीसीके के समर्थन की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन अंतिम आंकड़ों को लेकर अब भी संशय बना हुआ है।

Chennai: राजनीतिक संकट गहराया

शुक्रवार देर रात यह राजनीतिक संकट और गहरा गया, जब एएमएमके महासचिव टीटीवी दिनाकरन अचानक राजभवन पहुंचे और राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने टीवीके नेताओं पर बड़े स्तर पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया। विवाद एएमएमके-समर्थित विधायक एस. कामराज को लेकर खड़ा हुआ, जिन्हें कथित तौर पर टीवीके समर्थक बताया गया था।
दिनाकरन ने आरोप लगाया कि राज्यपाल को व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी समर्थन पत्र भेजे गए और कामराज ‘लापता’ हैं। हालांकि, कुछ ही देर बाद कामराज खुद दिनाकरन के साथ मीडिया के सामने आए और कहा कि उन्होंने आधिकारिक रूप से टीवीके को समर्थन नहीं दिया है। उन्होंने अपने हस्ताक्षर के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया।
इसके बाद दिनाकरन ने कथित फर्जीवाड़े के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। दूसरी ओर, टीवीके ने इन आरोपों को खारिज करते हुए एक वीडियो जारी किया, जिसमें कामराज कथित तौर पर स्वेच्छा से समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करते दिखाई दे रहे हैं। टीवीके ने दिनाकरन पर विजय की सरकार बनने से रोकने के लिए गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है।
 
Chennai: क्या कहते हैं जानकार ?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जारी रहता है और हॉर्स ट्रेडिंग के आरोप बढ़ते हैं, तो राज्यपाल केंद्र सरकार को संवैधानिक संकट की रिपोर्ट भेज सकते हैं। ऐसी स्थिति में तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू करने का रास्ता खुल सकता है। मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने में अब 48 घंटे से भी कम समय बचा है और चेन्नई में सरकार गठन को लेकर लगातार तेज राजनीतिक बातचीत जारी है।

ये भी पढ़ें…कार्यकर्ता जश्न मना गए, शपथ ग्रहण की तैयारी हो गई, मगर सरकार बनाने में क्यों हार गए विजय ?

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments