Bengal News: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 2021 के बाद हुई हिंसा को लेकर राज्य की नई सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने चुनाव के बाद दर्ज हिंसा से जुड़े मामलों को दोबारा खोलने और उनकी नई जांच कराने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार का कहना है कि कई मामलों में जांच ठीक तरीके से नहीं हुई और पीड़ितों को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति गरमा गई है। सरकार ने पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत निगरानी में जांच पूरी करने और जरूरत पड़ने पर नए मामले दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
पुराने मामलों की होगी दोबारा समीक्षा
राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि विधानसभा चुनाव 2021 के बाद हुई राजनीतिक हिंसा की जांच को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। इसलिए उन मामलों की समीक्षा की जाएगी जिनमें अंतिम रिपोर्ट दाखिल कर जांच बंद कर दी गई थी। सरकार ने साफ कहा है कि जिन मामलों में जांच में लापरवाही मिली है, उन्हें फिर से खोलकर विस्तृत जांच कराई जाएगी। साथ ही जहां जरूरी होगा, वहां नई कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर किसी घटना में पहले मामला दर्ज नहीं किया गया था और शुरुआती जांच में संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो नए मुकदमे दर्ज किए जा सकते हैं।
Bengal News: पुलिस अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देश
सरकार ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों और पुलिस आयुक्तों को इन मामलों की निगरानी खुद करने के निर्देश दिए हैं। आदेश में कहा गया है कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद भी मामलों की लगातार निगरानी की जाए ताकि जांच और मुकदमे की प्रक्रिया प्रभावित न हो। इसके अलावा राज्य सरकार ने पशु तस्करी के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को सीमा क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कहा गया है।
2021 चुनाव के बाद भड़की थी हिंसा
विधानसभा चुनाव 2021 के नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल के कई जिलों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। उस समय तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता बरकरार रखी थी, जबकि भाजपा मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी। भाजपा ने आरोप लगाया था कि उसके कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया गया। कई जगह हत्या, हमले, तोड़फोड़ और महिलाओं के साथ हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय तक पहुंचा था, जिसके बाद कुछ गंभीर मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच कराने के आदेश दिए गए थे। अब सरकार परिवर्तन के बाद इन मामलों को दोबारा खोलने के फैसले को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
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