Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस दौरान राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री की यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब हाल ही में उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार किया गया है और पार्टी ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज कर दी हैं। मुलाकात की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की गईं।
अमित शाह से करीब एक घंटे चली बैठक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास पर उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि बैठक में उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति, हालिया मंत्रिमंडल विस्तार और आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर विस्तार से बातचीत हुई। गृह मंत्रालय द्वारा साझा की गई तस्वीरों में मुख्यमंत्री योगी, अमित शाह को फूलों का गुलदस्ता भेंट करते नजर आए। राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को भाजपा की आगामी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है।
Yogi: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से भी की शिष्टाचार भेंट
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने उन्हें पटुका और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट साझा करते हुए इस मुलाकात की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से शिष्टाचार भेंट का अवसर प्राप्त हुआ। साथ ही उन्होंने मुलाकात के लिए समय देने पर आभार भी व्यक्त किया। दोनों नेताओं के बीच संगठनात्मक गतिविधियों और भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर चर्चा होने की भी जानकारी सामने आई है।
मंत्रिमंडल विस्तार और मिशन 2027 पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री योगी की यह दिल्ली यात्रा आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में 10 मई को उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया था, जिसमें छह नए चेहरों को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी गई। बताया जा रहा है कि इस बार विभागों का बंटवारा केवल प्रशासनिक संतुलन को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि मिशन 2027 की रणनीति को केंद्र में रखकर किया गया है। ऐसे में दिल्ली में हुई इन बैठकों को भाजपा के चुनावी रोडमैप और संगठनात्मक मजबूती के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
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