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Bengal: बंगाल सरकार ने स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ गायन किया अनिवार्य

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Bengal: पश्चिम बंगाल की नई सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य कर दिया है। गुरुवार शाम जारी अधिसूचना के अनुसार अब स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। सरकार के इस फैसले को लेकर राज्य की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अपने आधिकारिक सामाजिक मंच पर इस अधिसूचना को साझा करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को मजबूत करेगा। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग की प्रशासनिक शाखा की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

शिक्षा विभाग ने जारी की अधिसूचना

राज्य शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सभी पुराने आदेशों और परंपराओं को समाप्त करते हुए अब स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी विद्यालयों में ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा। आदेश के अनुसार, प्रतिदिन कक्षाओं के आरंभ से पहले आयोजित होने वाली प्रार्थना सभा में राष्ट्रगीत का गायन किया जाएगा। सरकार ने इसे विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने वाला कदम बताया है।

Bengal: सत्ता और विपक्ष ने किया स्वागत

सरकार के इस फैसले का स्वागत सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ने किया है। भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि विद्यालयों में ‘वंदे मातरम’ गाने से विद्यार्थियों में देशभक्ति की भावना मजबूत होगी और राष्ट्रीय एकता को बल मिलेगा। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने भी इस फैसले पर आपत्ति नहीं जताई। पार्टी नेताओं का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ एक महान बंगाली साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित है, इसलिए इसे लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं होना चाहिए। हालांकि, पार्टी ने यह भी कहा कि राज्य में धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी है।

‘जन गण मन’ को लेकर विपक्ष की चिंता

कांग्रेस और वाम दलों ने भी स्कूलों में ‘वंदे मातरम’ गाने का समर्थन किया, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की गरिमा और महत्व से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। विपक्षी दलों का कहना है कि ‘जन गण मन’, जिसे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने रचा था, देश का राष्ट्रगान है और उसका सम्मान सर्वोच्च रहना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार दोनों राष्ट्रीय प्रतीकों के बीच संतुलन बनाए रखेगी और इस फैसले का उपयोग राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।

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