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यूपी में ‘किलर थंडरस्क्वाल’ का कहर: 89 मौतों के पीछे छिपा है मौसम का खतरनाक विज्ञान

Thunder Squall:

Thunder Squall: उत्तर प्रदेश में बुधवार को आए भीषण तूफान और बिजली गिरने की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई। भदोही, फतेहपुर समेत कई जिलों में अब तक 89 लोगों की मौत हो चुकी है। तेज आंधी, बिजली और मूसलाधार बारिश के इस खतरनाक मौसम को मौसम वैज्ञानिक ‘थंडरस्क्वाल’ बता रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, थंडरस्क्वाल एक बेहद तेज और खतरनाक आंधी होती है, जिसमें भारी बारिश, बिजली कड़कने और 50 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलती हैं। यह सामान्य आंधी से कहीं ज्यादा ताकतवर होती है और कुछ ही मिनटों में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती है।

कैसे बनता है ‘थंडरस्क्वाल’?

मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, मई-जून की भीषण गर्मी में जब तापमान 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तब जमीन तेजी से गर्म होती है। इससे गर्म हवा ऊपर उठती है और आसमान में मौजूद ठंडी व नमी वाली हवा से टकराती है।

इस टकराव से विशाल काले बादल बनते हैं। बाद में ठंडी हवा तेजी से नीचे गिरती है और तेज विस्फोट जैसी स्थिति पैदा करती है। यही प्रक्रिया तेज तूफान और आंधी में बदल जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ और भीषण गर्मी के मेल ने इस तूफान को और ज्यादा खतरनाक बना दिया।

Thunder Squall: जेट स्ट्रीम और वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने बढ़ाया खतरा

मौसम विज्ञान में ‘जेट स्ट्रीम’ को ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवाओं की नदी माना जाता है। यह मौसम की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है। जब पश्चिमी विक्षोभ यानी ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ सक्रिय होता है, तो यह हवाओं की दिशा बदल देता है और वातावरण में अस्थिरता बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यही अस्थिरता तेज आंधी, बिजली गिरने और भारी बारिश जैसी घटनाओं को जन्म देती है।

‘साइंस ऑफ द टोटल एनवायरनमेंट’ जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, मानसून से पहले आने वाले ऐसे तूफान ‘एटमॉस्फेरिक इंस्टेबिलिटी’ का परिणाम होते हैं।

Thunder Squall: IMD ने पहले ही जारी की थी चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने तूफान से करीब 24 घंटे पहले 50 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की चेतावनी जारी की थी। हालांकि, तूफान की रफ्तार इतनी तेज थी कि कई लोगों को सुरक्षित जगह तक पहुंचने का मौका तक नहीं मिला। भदोही और फतेहपुर जैसे इलाकों में पेड़ गिरने, बिजली गिरने और कच्चे मकानों की दीवारें ढहने से कई लोगों की मौत हुई।

ऐसे संकेत दिखें तो तुरंत सतर्क हो जाएं

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अचानक आसमान गहरा काला या पीला दिखने लगे, तेज ठंडी हवाएं चलने लगें और बिजली कड़कने लगे, तो यह खतरनाक तूफान का संकेत हो सकता है।  ऐसी स्थिति में लोगों को पेड़ों, बिजली के खंभों और कच्चे मकानों से दूर रहना चाहिए। सुरक्षित पक्की इमारत में शरण लेना ही जान बचाने का सबसे सुरक्षित तरीका माना जाता है।

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