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गर्मियों की तेज धूप से बचना है जरूरी, सनबर्न से बढ़ सकता है स्किन कैंसर का खतरा

सनबर्न से स्किन कैंसर का खतरा जानें बचाव

Sunburn Skin Care: र्मियों की तेज और चिलचिलाती धूप सिर्फ शरीर को ही नहीं, बल्कि त्वचा को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे समय तक धूप में रहने से स्किन में जलन, लालिमा, चुभन और दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इन्हें आमतौर पर सनबर्न के शुरुआती लक्षण माना जाता है। कई लोग इसे सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार सूरज की अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें त्वचा की ऊपरी परत को नुकसान पहुंचाती हैं। लगातार और ज्यादा एक्सपोजर से झुर्रियां, पिग्मेंटेशन और यहां तक कि स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक बिना किसी सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहना त्वचा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

क्या होता है सनबर्न?

जब कोई व्यक्ति ज्यादा समय तक तेज धूप में रहता है, तब सूरज की UV किरणें त्वचा की कोशिकाओं के अंदर मौजूद DNA को नुकसान पहुंचाने लगती हैं। इसके बाद शरीर का इम्यून सिस्टम एक्टिव हो जाता है और प्रभावित हिस्से में ब्लड फ्लो बढ़ जाता है ताकि डैमेज को ठीक किया जा सके। इसी वजह से स्किन लाल, गर्म और सूजी हुई दिखाई देती है। कई बार जलन और दर्द भी महसूस होता है। यही स्थिति सनबर्न कहलाती है।

Sunburn Skin Care: सनबर्न से स्किन कैंसर का खतरा जानें बचाव
सनबर्न से स्किन कैंसर का खतरा जानें बचाव

कितनी देर धूप में रहने से हो सकता है सनबर्न?

सनबर्न होने का समय हर व्यक्ति की त्वचा और धूप की तीव्रता पर निर्भर करता है। गोरी या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को तेज धूप में सिर्फ 10 से 20 मिनट में सनबर्न हो सकता है। वहीं गेहुंए या सांवले रंग की त्वचा में 20 से 40 मिनट की सीधी धूप नुकसान पहुंचा सकती है। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक की धूप सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती है। पहाड़ी इलाकों में कम समय की धूप भी त्वचा को जला सकती है। पानी या बर्फ के आसपास UV किरणों का असर और तेजी से होता है। बिना सनस्क्रीन लगाए रोजमर्रा के काम करते समय भी सनबर्न हो सकता है।

Sunburn Skin Care: क्या बादलों में भी हो सकता है सनबर्न?

अक्सर लोग मानते हैं कि बादल होने पर धूप नुकसान नहीं पहुंचाती, लेकिन ऐसा नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक बादल UV किरणों को पूरी तरह नहीं रोक पाते। लगभग 70 से 80 प्रतिशत UV किरणें बादलों के बावजूद त्वचा तक पहुंच सकती हैं और नुकसान कर सकती हैं। इसलिए बादलों वाले दिन भी सावधानी जरूरी है।

सनबर्न और टैनिंग में क्या फर्क है?

सनबर्न और टैनिंग दोनों ही UV किरणों के असर से होते हैं, लेकिन दोनों अलग स्थितियां हैं। सनबर्न में त्वचा लाल हो जाती है और दर्द या सूजन महसूस होती है। वहीं टैनिंग में स्किन का रंग गहरा होने लगता है। दरअसल शरीर ज्यादा मेलानिन बनाकर खुद को UV किरणों से बचाने की कोशिश करता है। मेलानिन शरीर का प्राकृतिक पिगमेंट है, जो त्वचा, बाल और आंखों का रंग तय करता है।

त्वचा को सनबर्न कैसे नुकसान पहुंचाता है?

त्वचा की ऊपरी कोशिकाएं सनबर्न होने पर डैमेज हो जाती हैं। इससे शरीर में सूजन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और त्वचा लाल, गर्म और दर्द वाली महसूस होने लगती है। ज्यादा नुकसान होने पर कुछ दिनों बाद स्किन छिलने लगती है क्योंकि शरीर डेड स्किन हटाने लगता है। अगर बार-बार सनबर्न हो, तो त्वचा समय से पहले बूढ़ी दिख सकती है और स्किन कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।

सनबर्न के शुरुआती संकेत क्या हैं?

सनबर्न के शुरुआती लक्षणों में त्वचा में लालिमा, गर्माहट, जलन, चुभन, खुजली और सूजन शामिल हैं। कई लोगों को त्वचा में खिंचाव महसूस होता है और छूने पर दर्द भी हो सकता है। गंभीर स्थिति में त्वचा पर फफोले भी पड़ सकते हैं। आमतौर पर धूप में ज्यादा समय बिताने के 2 से 6 घंटे के भीतर लक्षण दिखने लगते हैं, जबकि 12 से 24 घंटे के अंदर समस्या ज्यादा स्पष्ट हो जाती है।

क्या सनबर्न से बुखार और सिरदर्द भी हो सकता है?

अगर सनबर्न ज्यादा गंभीर हो जाए, तो इसका असर सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं रहता। कई बार शरीर में सूजन की प्रतिक्रिया बढ़ने पर बुखार, सिरदर्द, थकान और जी मिचलाने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी हो जाता है।

कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?

अगर त्वचा पर बड़े फफोले पड़ जाएं, तेज दर्द हो, 101°F या उससे ज्यादा बुखार आए, चक्कर महसूस हो या शरीर के बड़े हिस्से में सनबर्न हो जाए, तो तुरंत डर्मेटोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

क्या सनबर्न से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक बार-बार UV किरणों के संपर्क में आने से त्वचा की कोशिकाओं का DNA प्रभावित होता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर स्किन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। खासतौर पर लंबे समय तक धूप में काम करने वाले लोग, ज्यादा समय बाहर खेलने वाले बच्चे, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग और जल्दी सनबर्न होने वाले लोगों में यह जोखिम ज्यादा माना जाता है। जिन लोगों की त्वचा गोरी होती है, आंखों का रंग हल्का होता है, त्वचा पर ज्यादा तिल या झाइयां होती हैं या परिवार में स्किन कैंसर की हिस्ट्री रही हो, उनमें भी खतरा अधिक हो सकता है।

धूप में कितना समय बिताना सुरक्षित माना जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार सुबह की हल्की धूप में 15 से 30 मिनट तक रहना आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। सुबह 8 बजे से पहले और शाम 5 बजे के बाद की धूप बेहतर मानी जाती है। इस दौरान शरीर को विटामिन D भी मिलता है और त्वचा को नुकसान भी कम होता है। अगर त्वचा लाल होने लगे या जलन महसूस हो, तो समझ लेना चाहिए कि धूप ज्यादा हो गई है।

सनबर्न से स्किन कैंसर का खतरा जानें बचाव
सनबर्न से स्किन कैंसर का खतरा जानें बचाव

सनबर्न होने पर तुरंत क्या करना चाहिए?

अगर त्वचा जल गई हो, तो प्रभावित हिस्से को तुरंत ठंडा करना चाहिए। ठंडे पानी से नहाना और दिन में 2 से 3 बार ठंडी पट्टी रखना राहत दे सकता है। क्लोरीन वाले स्विमिंग पूल से बचना चाहिए क्योंकि इससे जलन बढ़ सकती है। इसके अलावा खुशबूदार साबुन या स्किन प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

क्या एलोवेरा और दही फायदेमंद हैं?

हल्के सनबर्न में एलोवेरा जेल काफी फायदेमंद माना जाता है। इसे “बर्न प्लांट” भी कहा जाता है क्योंकि यह त्वचा को ठंडक देता है, लालिमा और सूजन कम करता है और स्किन की हीलिंग प्रक्रिया को तेज करता है। ठंडा दही लगाने से भी कुछ राहत मिल सकती है क्योंकि इसमें मौजूद फैट और लैक्टिक एसिड त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि बेसन का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए क्योंकि यह सनबर्न वाली संवेदनशील त्वचा में जलन बढ़ा सकता है।

सनबर्न से बचने के लिए क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार तेज धूप से बचाव बेहद जरूरी है। बाहर निकलने से पहले SPF 30+ सनस्क्रीन लगानी चाहिए और हर 2 से 3 घंटे में दोबारा लगाना चाहिए। स्विमिंग के बाद फिर से सनस्क्रीन लगाना जरूरी है। हल्के रंग और कॉटन के कपड़े पहनने चाहिए। टोपी, सनग्लासेस, छाता या गमछे का इस्तेमाल करना भी फायदेमंद रहता है। शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है और बच्चों को खासतौर पर पूरी तरह कवर करके रखना चाहिए।

सिर्फ सनस्क्रीन लगाना काफी नहीं

ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन UVA और UVB दोनों तरह की किरणों से बचाव करती है। खासतौर पर UVB किरणें सनबर्न की बड़ी वजह होती हैं। हालांकि सिर्फ सनस्क्रीन लगाना ही काफी नहीं है। इसे सही मात्रा में लगाना, समय-समय पर दोबारा लगाना और तेज धूप से बचना भी उतना ही जरूरी है।

हेल्दी लाइफस्टाइल भी है जरूरी

स्किन को हेल्दी रखने और स्किन कैंसर के खतरे को कम करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना बेहद जरूरी है। खूब पानी पीना, संतुलित आहार लेना, हरी सब्जियां खाना और विटामिन C से भरपूर फूड जैसे संतरा, आंवला, अमरूद और कीवी को डाइट में शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। इसके अलावा एंटीऑक्सिडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड वाले फूड भी त्वचा के लिए अच्छे माने जाते हैं। स्मोकिंग, ज्यादा मीठा और अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाकर रखना चाहिए।

सनबर्न को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

अक्सर लोग सनबर्न को कुछ दिनों की सामान्य स्किन प्रॉब्लम समझ लेते हैं, लेकिन बार-बार होने वाला सनबर्न लंबे समय में त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अगर लक्षण ज्यादा गंभीर हों या बार-बार सनबर्न हो रहा हो, तो बिना देरी किए डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

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