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तेंदूपत्ता बना आदिवासियों की कमाई का सहारा, बलरामपुर में 1 लाख लोगों को मिल रहा रोजगार

Chattishgharh news: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में तेंदूपत्ता संग्रहण योजना हजारों आदिवासी और ग्रामीण परिवारों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन चुकी है। जंगलों पर निर्भर लोगों की जिंदगी में यह योजना आर्थिक सहारा बनकर उभरी है। राज्य सरकार की इस पहल से जिले के करीब 1 लाख संग्राहकों को सीधे फायदा मिल रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, तेंदूपत्ता की खरीद का काम इस बार भी बड़े स्तर पर किया जा रहा है। जिले में 44 समितियों के जरिए पूरी व्यवस्था संभाली जा रही है और 64 लॉट में संग्रहण का काम जारी है।

5500 रुपये प्रति मानक बोरी मिल रही कीमत

बलरामपुर के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर आलोक बाजपेयी ने बताया कि तेंदूपत्ता आदिवासी परिवारों की आजीविका का अहम साधन है। सरकार ने इस बार तेंदूपत्ता की खरीद दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरी तय की है, जिससे संग्राहकों को अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी संग्रहण केंद्रों पर खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है और गुणवत्ता जांच के बाद ही पत्तों की खरीद की जा रही है।

Chattishgharh news: सुबह जंगल, शाम को बिक्री

ग्रामीण सुबह करीब 5 बजे जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ने निकल जाते हैं। दोपहर तक घर लौटकर 50-50 पत्तों की गड्डियां तैयार की जाती हैं और फिर शाम को उन्हें संग्रहण केंद्रों पर बेच दिया जाता है। योजना से जुड़े एक लाभार्थी ने बताया कि पत्तों की जांच के बाद भुगतान सीधे बैंक खाते में भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि इससे खेती और घर के खर्च में काफी मदद मिलती है।

Chattishgharh news: 482 संग्रहण केंद्र बनाए गए

अधिकारियों के अनुसार, बलरामपुर जिले में 482 तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं, जो 44 सहकारी समितियों के तहत काम कर रहे हैं। यहां वन विभाग के कर्मचारी पत्तों की गुणवत्ता जांचते हैं ताकि केवल अच्छी क्वालिटी का तेंदूपत्ता ही खरीदा जाए।

बीमा और छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएं भी

सरकार की इस योजना में सिर्फ खरीद ही नहीं, बल्कि संग्राहकों को कई दूसरी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए जीवन बीमा की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन राशि और मेधावी छात्रों को छात्रवृत्ति भी दी जा रही है।

अवैध तस्करी रोकने के लिए चेकपोस्ट

Chattishgharh news: बलरामपुर की सीमाएं तीन राज्यों से जुड़ी होने के कारण वन विभाग ने सीमा इलाकों में चेकपोस्ट भी बनाए हैं। विभाग लगातार पेट्रोलिंग कर रहा है ताकि तेंदूपत्ता की अवैध आवाजाही रोकी जा सके और योजना का फायदा सही लोगों तक पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि इस योजना से ग्रामीणों की आमदनी बढ़ी है और वन आधारित समुदायों की आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत हुई है।

 

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