Vaibhav Sooryavanshi: आईपीएल 2026 के दूसरे क्वालिफायर में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से सभी का ध्यान खींचा। हालांकि वह शतक बनाने से महज चार रन दूर रह गए और 96 रन बनाकर आउट हो गए। गुजरात के खिलाफ खेली गई उनकी शानदार पारी ने टीम को मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकाला, लेकिन शतक का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया। लगातार दूसरी बार और पिछले चार मैचों में तीसरी बार वह शतक के बेहद करीब पहुंचकर आउट हुए।
लगातार तीसरी बार शतक के करीब टूटे सपने
वैभव सूर्यवंशी का यह सीजन शानदार रहा है, लेकिन शतक के मामले में किस्मत उनका साथ नहीं दे रही। लखनऊ के खिलाफ वह 93 रन बनाकर आउट हुए थे। इसके बाद सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उन्होंने 97 रन बनाए और अब गुजरात टाइटंस के विरुद्ध 96 रन पर उनकी पारी समाप्त हो गई। खास बात यह रही कि हैदराबाद और गुजरात दोनों मैचों में वह शॉर्ट गेंद पर थर्ड मैन क्षेत्र में कैच देकर आउट हुए। एक बार फिर शतक से चूकने के बाद उनके चेहरे पर निराशा साफ दिखाई दी।
Vaibhav Sooryavanshi: एक सीजन में रचा इतिहास
भले ही शतक नहीं आया, लेकिन वैभव सूर्यवंशी ने कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर लिए। उन्होंने इस सीजन 700 रन का आंकड़ा पार करते हुए आईपीएल इतिहास में सबसे तेज 700 रन बनाने का रिकॉर्ड बनाया। वह प्रतियोगिता के इतिहास में एक सीजन में 700 से अधिक रन बनाने वाले पहले अनकैप्ड खिलाड़ी भी बन गए हैं। इस सत्र में उन्होंने 16 पारियों में 776 रन बनाए हैं। उनकी औसत 48.50 और स्ट्राइक रेट 237.31 का रहा है। साथ ही उन्होंने 63 चौके और 72 छक्के भी लगाए हैं।
सबसे तेज एक हजार रन पूरे करने वाले बल्लेबाज
वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल में अपने एक हजार रन भी पूरे कर लिए। उन्होंने केवल 440 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल कर ली, जो प्रतियोगिता के इतिहास में सबसे तेज है। इस उपलब्धि ने उन्हें लीग के सबसे खतरनाक युवा बल्लेबाजों की सूची में शामिल कर दिया है।
Vaibhav Sooryavanshi: टीम को संकट से निकालने वाली पारी
गुजरात के खिलाफ राजस्थान की शुरुआत खराब रही थी और टीम ने शुरुआती विकेट जल्दी गंवा दिए थे। ऐसे समय में वैभव सूर्यवंशी ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाया। उन्होंने रविंद्र जडेजा के साथ महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को संभाला। 31 गेंदों में अर्धशतक पूरा करने वाले वैभव ने बाद में तेजी से रन बनाए और अपनी 96 रन की पारी में आठ चौके तथा सात छक्के लगाए। उनकी यह पारी भले ही शतक में नहीं बदल सकी, लेकिन टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
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