Rbi: देश में नकली नोटों का कारोबार एक बार फिर चिंता का विषय बनता जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पिछले एक साल के दौरान बैंकिंग सिस्टम में 2.29 लाख से ज्यादा नकली नोट पकड़े गए। इनमें सबसे ज्यादा संख्या 500 रुपये के फर्जी नोटों की रही। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025-26 के दौरान करीब 1.42 लाख नकली 500 रुपये के नोट बरामद किए गए। यह आंकड़ा बताता है कि बाजार में सबसे ज्यादा नकली नोट इसी मूल्य वर्ग के घूम रहे हैं।
20 रुपये के नकली नोट भी तेजी से बढ़े
RBI की रिपोर्ट के अनुसार, 20 रुपये के नकली नोटों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि 50, 100 और 200 रुपये के नकली नोटों की संख्या में कमी आई है। वहीं 2000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर किए जाने के बाद इस मूल्य वर्ग में नकली नोटों के मामले काफी घट गए हैं।
Rbi: 500 रुपये के नोटों का दबदबा बरकरार
देश में 500 रुपये के नोटों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक 500 रुपये के नोटों की संख्या बढ़कर 7,05,482 लाख हो गई, जबकि मार्च 2025 में यह 6,34,458 लाख थी। मूल्य के हिसाब से देखें तो मार्च 2026 के अंत तक चलन में मौजूद 500 रुपये के नोटों का कुल मूल्य 35.27 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले यह आंकड़ा 31.72 लाख करोड़ रुपये था। RBI के अनुसार, कुल चलन में मौजूद नोटों की संख्या में 500 रुपये के नोटों की हिस्सेदारी 41.2 प्रतिशत है, जबकि कुल मूल्य के आधार पर इनकी हिस्सेदारी 86 प्रतिशत से अधिक है।
Rbi: 2000 रुपये के नोटों की वापसी लगभग पूरी
केंद्रीय बैंक ने बताया कि मई 2023 में शुरू की गई 2000 रुपये के नोटों की वापसी प्रक्रिया जारी है। मार्च 2026 तक इस मूल्य वर्ग के 98.45 प्रतिशत नोट बैंकिंग सिस्टम में वापस आ चुके हैं।
सिक्कों का चलन भी बढ़ा
वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में सिक्कों की संख्या में 4.5 प्रतिशत और उनके कुल मूल्य में 11.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एक, दो और पांच रुपये के सिक्के कुल सिक्कों की संख्या का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बने हुए हैं।
नोट छापने का खर्च घटा
Rbi: RBI की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नोटों की मांग कम होने से उनकी छपाई पर होने वाला खर्च घटा है। वर्ष 2025-26 में नोट छापने पर 4,875 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि एक साल पहले यह खर्च 6,379 करोड़ रुपये था। रिपोर्ट के अनुसार, बड़े मूल्य वर्ग के नोटों की छपाई की मांग में कमी आई है, जबकि 10 रुपये के नोटों की छपाई बढ़ी है। इसके अलावा खराब और पुराने नोटों के निपटान में भी करीब 28.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
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