UNSC Meet: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक बैठक में कश्मीर का मुद्दा उठाने पर भारत ने पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया। ‘एरिया-फॉर्मूला’ के तहत आयोजित इस बैठक में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का जिक्र किया, तो संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वतनेनी हरीश ने इसका विरोध करते हुए पाकिस्तान पर मंच का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से की गई टिप्पणियां पूरी तरह अनावश्यक थीं।
राजनीतिकरण का आरोप
चर्चा के दौरान हरीश ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि और बैठक के सह-अध्यक्ष की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि एक सह-अध्यक्ष, जिससे निष्पक्ष और संतुलित रवैये की उम्मीद की जाती है, उसने इस मंच को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया।उन्होंने कहा कि समय सीमित होने के कारण वह केवल इतना स्पष्ट करना चाहते हैं कि जम्मू-कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। साथ ही उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं और हमेशा रहेंगे।

UNSC Meet: पाकिस्तान के बयान के बाद आया जवाब
भारत की यह प्रतिक्रिया संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत आसिम इफ्तिखार अहमद द्वारा बैठक के दौरान जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाने के बाद सामने आई।यह बैठक संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान और चीन के स्थायी मिशनों की ओर से आयोजित की गई थी। पाकिस्तान फिलहाल वर्ष 2025 और 2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का गैर-स्थायी सदस्य है और अपने दो वर्षीय कार्यकाल का निर्वहन कर रहा है।
‘एरिया-फॉर्मूला’ बैठकें संयुक्त राष्ट्र की अनौपचारिक और गोपनीय बैठकों में शामिल होती हैं। इन बैठकों में सुरक्षा परिषद के सदस्य और आमंत्रित प्रतिभागी अपेक्षाकृत लचीले वातावरण में अपने विचार और सुझाव साझा कर सकते हैं।
सुरक्षा परिषद की भूमिका पर भारत का पक्ष
बैठक के मुख्य विषय पर बोलते हुए पर्वतनेनी हरीश ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना है। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के चैप्टर VI और चैप्टर VII में विवादों और संघर्षों के समाधान के लिए अलग-अलग प्रावधान दिए गए हैं।हरीश के अनुसार, दोनों अध्यायों की प्रकृति और उद्देश्य अलग-अलग हैं तथा उनका उपयोग विभिन्न परिस्थितियों में किया जाता है।
चैप्टर VI और VII में क्या अंतर है?
भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि चैप्टर VII के तहत ऐसे कदम उठाए जाते हैं जिनका उद्देश्य शांति के लिए खतरे, शांति भंग होने या आक्रामकता जैसी परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाए रखना या बहाल करना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई नहीं की जाए तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
वहीं, उन्होंने चैप्टर VI को इससे अलग बताते हुए कहा कि इसमें कई प्रकार के विकल्प उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से उन परिस्थितियों का समाधान किया जा सकता है जो आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।
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