Mission 360: भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। 17 अप्रैल को महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक पर लोकसभा में झटका मिलने के बाद पार्टी ने अपनी रणनीति और तेज कर दी। इसका उद्देश्य केवल इस बिल को पास कराना नहीं, बल्कि भविष्य में बड़े संवैधानिक बदलावों के लिए जरूरी बहुमत जुटाना भी है।
बड़े संवैधानिक बदलावों पर फोकस
भाजपा का लक्ष्य सिर्फ महिला आरक्षण तक सीमित नहीं है। पार्टी ‘एक देश-एक चुनाव’ और न्यायिक सुधारों जैसे बड़े मुद्दों पर भी संवैधानिक संशोधन करना चाहती है। इन बदलावों के लिए संसद में दो-तिहाई यानी ‘सुपर मेजोरिटी’ की जरूरत होती है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भाजपा कई संभावनाओं पर काम कर रही है। इनमें विपक्षी दलों के सांसदों को अपने साथ लाना, नए सहयोगी जोड़ना और जरूरत पड़ने पर मतदान के दौरान विपक्षी सांसदों की गैरहाजिरी सुनिश्चित करना भी शामिल है। पार्टी का प्रयास है कि यह रणनीति संसद के मानसून सत्र तक सफल हो जाए।
उद्धव गुट के सांसद शिंदे की शिवसेना में शामिल
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 सांसदों के अलग होकर एनडीए को समर्थन देने और शिवसेना (उद्धव गुट) के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद राजनीतिक चर्चाएं और तेज हो गई हैं। हालांकि इन बदलावों के बावजूद एनडीए को दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए अभी भी 41 सांसदों की जरूरत है।
अब इन दलों पर नजर
भाजपा की नजर अब समाजवादी पार्टी (सपा), डीएमके और एनसीपी (शरद पवार गुट) जैसे दलों पर है। महाराष्ट्र भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि शरद पवार गुट के 8 सांसदों में से सुप्रिया सुले को छोड़कर बाकी 7 सांसद भाजपा के साथ हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि वह सभी राजनीतिक दलों से विभिन्न विधेयकों पर बातचीत कर रही है।

Mission 360: सरकार के सामने दो रास्ते
पहला विकल्प: 41 और सांसदों का समर्थन
यदि विपक्ष के 41 सांसद दल बदलकर, विलय करके या अलग गुट बनाकर एनडीए का समर्थन करें, तो सरकार को दो-तिहाई बहुमत मिल सकता है।
दूसरा विकल्प: विपक्षी सांसद मतदान से दूर रहें
अगर बड़ी संख्या में विपक्षी सांसद मतदान के समय सदन में मौजूद नहीं रहते, तो संसद की प्रभावी सदस्य संख्या कम हो जाएगी। ऐसी स्थिति में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा घटकर 319 रह जाएगा।इसके लिए सपा के 37, डीएमके के 22, एनसीपी (शरद) के 8 और टीएमसी के 8 यानी कुल 75 सांसदों में से 61 सांसदों का मतदान के दौरान गैरहाजिर रहना जरूरी होगा।
इसके अलावा सरकार की नजर 7 निर्दलीय और छोटी पार्टियों के 10 सांसदों पर भी है। जरूरत पड़ने पर कांग्रेस के 98 सांसदों में से कुछ को भी मतदान से दूर रखने की कोशिश की जा सकती है।
Mission 360: मिशन 360 के चार बड़े लक्ष्य
1. परिसीमन
देश के सभी राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत बढ़ाने की योजना है। इससे लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर करीब 850 तक पहुंच सकती हैं।
2. महिला आरक्षण
परिसीमन के बाद 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से एक-तिहाई सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की तैयारी है।
3. एक देश-एक चुनाव
लोकसभा और सभी विधानसभा चुनाव एक साथ कराने के लिए जरूरी संवैधानिक संशोधनों का रास्ता साफ करना भी सरकार की प्राथमिकता है।
4. न्यायिक और संवैधानिक सुधार
सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) सहित ऐसे अन्य सुधारों पर भी काम करना चाहती है, जिनके लिए भविष्य में संविधान संशोधन या व्यापक राजनीतिक सहमति की जरूरत पड़ सकती है।
परिसीमन और महिला आरक्षण का संबंध
दैनिक भास्कर ने इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट के वकील चिराग गुप्ता और राज्यसभा के पूर्व महासचिव विवेक अग्निहोत्री से बातचीत की। दोनों विशेषज्ञों के अनुसार, महिला आरक्षण, परिसीमन या किसी भी संवैधानिक संशोधन के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत जरूरी होता है।संविधान के अनुसार वर्ष 2026 में परिसीमन होना है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले ही ऐसा नया संसद भवन तैयार कर चुकी है, जिसमें 888 लोकसभा और 384 राज्यसभा सांसदों के बैठने की व्यवस्था है।
यदि 2026 में परिसीमन नहीं होता, तो इसकी समयसीमा बढ़ाने के लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा, जिससे सरकार की विफलता का संदेश जा सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि महिला आरक्षण के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इससे परिसीमन को भी कानूनी आधार मिल जाएगा और उसके खिलाफ विरोध कम हो सकता है। इसी तरह, ‘एक देश-एक चुनाव’ लागू करने के लिए भी संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता पड़ सकती है।








