Vaishno Devi Temple : भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में शामिल माता वैष्णो देवी का मंदिर जम्मू और कश्मीर की त्रिकूट पहाड़ियों पर 5200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यहां माता रानी की तीन प्राकृतिक पिंडियां विराजमान हैं, जिन्हें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के रूप में पूजा जाता है. इस मंदिर की महिमा तो लगभग हर भक्त जानता है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसकी पहली खोज किसने की थी.

श्री माता वैष्णो देवी जी की उत्पत्ति और मंदिर की खोज को लेकर एक प्रचलित पौराणिक कथा है. माना जाता है कि लगभग 700 साल पहले इस पवित्र धाम की खोज पंडित श्रीधर ने की थी. कथा के अनुसार, माता ने उनके घर पर आयोजित भंडारे में सहायता की थी. तभी से उनका जीवन इस दिव्य शक्ति से जुड़ गया.
Vaishno Devi Temple
कहा जाता है कि जब भैरव नाथ से बचने के लिए माता वैष्णो देवी भंडारे के बीच में ही चली गई थीं, तब पंडित श्रीधर को लगा कि उनके जीवन में सब कुछ समाप्त हो गया है. वे अत्यंत दुखी हो गए और भोजन-पानी त्यागकर अपने कमरे में एकांतवास करने लगे. उन्होंने माता के फिर से प्रकट होने की प्रार्थना शुरू कर दी. पंडित श्रीधर की व्यथा देखकर माता वैष्णो देवी उनके स्वप्न में प्रकट हुईं. उन्होंने श्रीधर को त्रिकुटा पर्वत की घाटियों में स्थित पवित्र गुफा में उन्हें खोजने का आदेश दिया. साथ ही गुफा का रास्ता भी दिखाया और व्रत तोड़ने का आग्रह किया.
लगा की भटक गए रास्ता
इसके बाद श्रीधर गुफा की तलाश में पहाड़ों की ओर निकल पड़े. कई बार ऐसा लगा कि वे रास्ता भटक गए हैं, लेकिन हर बार माता स्वप्न में आकर उन्हें सही दिशा बताती रहीं. आखिरकार वे पवित्र गुफा तक पहुंच ही गए.
जैसे ही श्रीधर गुफा में प्रवेश किए, उन्होंने एक चट्टान देखी, जिसके ऊपर तीन पिंडियां थीं. उसी समय माता वैष्णो देवी ने अपने पूर्ण दिव्य स्वरूप में प्रकट होकर श्रीधर को दर्शन दिए. उन्होंने गुफा में मौजूद तीनों पिंडों और अन्य चिह्नों के माध्यम से अपनी पहचान कराई. मान्यता है कि माता ने श्रीधर को चार पुत्रों का वरदान दिया और अपनी इस अवतार की पूजा करने का अधिकार भी प्रदान किया. साथ ही उन्हें आदेश दिया कि वे इस पवित्र तीर्थस्थल की महिमा का प्रचार हर जगह करें. कहा जाता है कि पंडित श्रीधर ने अपना शेष जीवन इसी गुफा में माता वैष्णो देवी की सेवा में समर्पित कर दिया.
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