Home » उत्तर प्रदेश » सिकंदराबाद में 400KV हाई-टेंशन लाइन पर बवाल; एडीएम पर अभद्रता का आरोप, किसानों ने खोला मोर्चा

सिकंदराबाद में 400KV हाई-टेंशन लाइन पर बवाल; एडीएम पर अभद्रता का आरोप, किसानों ने खोला मोर्चा

UP News: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद के सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र (SDM कॉलोनी) में टाटा पावर कंपनी द्वारा बनाई जा रही 400KV हाई-टेंशन बिजली लाइन परियोजना को लेकर विवाद गहरा गया है। प्रभावित क्षेत्रों से आए किसानों ने स्थानीय प्रशासन और संबंधित कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि उन्हें कैबिनेट द्वारा पास शासनादेश (GO) के अनुसार पूरा मुआवजा नहीं दिया जा रहा है और आवाज उठाने पर उनके साथ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अभद्रता की जा रही है।

प्रशासनिक बैठक में किसानों के साथ अभद्रता का आरोप

प्रदर्शन कर रहे पीड़ित किसानों ने बताया कि 28 तारीख को बुलंदशहर में जिलाधिकारी (DM) आवास पर स्थानीय विधायक की मौजूदगी में एक बैठक हुई थी। इसके बाद, किसानों को अपने-अपने ‘डिमांड ड्राफ्ट’ (DD) लेने के लिए एडीएम (ADM) अभिषेक शर्मा द्वारा सिकंदराबाद तहसील सभागार में बुलाया गया था। किसानों का आरोप है कि तहसील सभागार में बैठक शुरू होते ही एडीएम ने कहा कि वे सभी किसानों के डीडी अपने पास जमा रखेंगे और काम पूरा होने के बाद ही उन्हें सौंपेंगे। जब किसानों ने कैबिनेट द्वारा पास शासनादेश (GO) का हवाला देकर अपनी बात रखनी चाही, तो एडीएम भड़क गए। पीड़ित किसान के अनुसार: “एडीएम साहब ने हमें बोलने तक नहीं दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मैं यहाँ किसी को नेता नहीं बनने दूँगा। बैठना है तो बैठो, नहीं तो तुरंत यहाँ से निकल जाओ। उन्होंने हमारे साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया।”

UP News: “किसानों को धमकाया जा रहा है, फोन को ट्रेसिंग पर लगाया”

मर्नौटी गाँव के बुजुर्ग किसान रतन सिंह ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि अधिकारी और कंपनी मिलकर गरीब किसानों को लगातार परेशान कर रहे हैं। रतन सिंह ने आरोप लगाया: “एडीएम साहब ने महमनपुर वालों का हवाला देकर हमसे कहा कि वहाँ काम शुरू कराओ, डीडी बाद में मिल जाएँगे। जब हमने शासनादेश (GO) के नियमों की बात की, तो उन्होंने हमें धमकाते हुए कहा कि ‘तुम खुर्जा से किसानों को फोन कैसे करते हो? मैंने तुम्हारे फोन को एड्रेस/ट्रेसिंग पर लगा रखा है।’ हम सीधे-साधे काम करने वाले किसान हैं, लेकिन हमें रोज बुलाकर धमकाया जा रहा है।”

UP News: विधायक लक्ष्मीराज सिंह के प्रयासों की सराहना, लेकिन प्रशासन बना रोड़ा

किसानों ने स्पष्ट किया कि सूबे की योगी सरकार और स्थानीय विधायक श्री लक्ष्मीराज सिंह किसानों के हित में लगातार काम कर रहे हैं। विधायक लक्ष्मीराज सिंह ने किसानों की लड़ाई लड़कर उत्तर प्रदेश का कानून तक बदलवाया, जिससे किसानों को टावर बेस का 200% और कॉरिडोर का 30% मुआवजा सर्किल रेट के हिसाब से मिलना तय हुआ। विधायक जी ने तुरंत इसका जीओ (GO) भी निकलवा दिया। लेकिन किसानों का आरोप है कि इस शासनादेश के बावजूद एडीएम अभिषेक शर्मा और पूर्व एसडीएम दीपक पाल की कथित मिलीभगत और कंपनी के ढुलमुल रवैए के कारण गरीब किसानों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है।

मुआवजे की जमीनी हकीकत, सिर्फ चुनिंदा लोगों को मिला पैसा

जब मौके पर मौजूद अन्य किसानों से कॉरिडोर और टावर बेस के मुआवजे को लेकर सवाल किया गया, तो जमीनी हकीकत कुछ इस तरह सामने आई:: बहुसंख्यक किसान खाली हाथ: मौके पर मौजूद अधिकांश किसानों ने साफ कहा कि उन्हें फसल, टावर या कॉरिडोर किसी का भी मुआवजा अब तक नहीं मिला है। उन्हें सिर्फ बहला-फुसलाकर काम कराया जा रहा है। भेदभाव का आरोप: किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और कंपनी केवल उन्हीं लोगों को मुआवजा दे रहे हैं जो कानून की थोड़ी-बहुत जानकारी रखते हैं या रसूखदार हैं। एक किसान को मिला पूरा मुआवजा: वहीं, लाइन का विरोध करने वाले एक किसान ने बताया कि उनके कड़े विरोध के बाद प्रशासन ने उन्हें कॉरिडोर का 17,59,914 रुपये (सत्रह लाख उनसठ हजार नौ सौ चौदह रुपये) का भुगतान कर दिया है, लेकिन उनकी फसल का मुआवजा अभी भी बकाया है। वहीं एक अन्य किसान को सिर्फ फसल का मुआवजा मिला है, कॉरिडोर का नहीं।

आर-पार की लड़ाई के मूड में किसान

UP News: ग्रामीणों और प्रभावित किसानों ने साफ चेतावनी दी है कि वे विकास कार्य में बाधा नहीं बनना चाहते और सरकार की नीतियों का समर्थन करते हैं, लेकिन वे अपने हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। किसानों ने मांग की है कि जब तक कैबिनेट द्वारा पास शासनादेश के अनुसार प्रत्येक प्रभावित किसान को पारदर्शिता के साथ पूरा मुआवजा नहीं मिल जाता और अभद्र व्यवहार करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध और प्रदर्शन जारी रहेगा।

 

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