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Varanasi में देश का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोपवे तैयार, कैंट से गोदौलिया तक सिर्फ 16 मिनट में होगा सफर

Varanasi Ropeway : वाराणसी अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल होने जा रहा है, जहां रोपवे का इस्तेमाल आम शहरी यातायात की तरह किया जाएगा। शहर में 3.85 किलोमीटर लंबा यह रोपवे घनी आबादी और संकरी गलियों के ऊपर से गुजरेगा। इसके शुरू होने पर सड़क यातायात में करीब 40 प्रतिशत तक कमी आने का अनुमान जताया जा रहा है। यह रोपवे कैंट रेलवे स्टेशन से शुरू होकर काशी विद्यापीठ, रथयात्रा और गिरजाघर होते हुए गोदौलिया चौक तक पहुंचेगा।

फिलहाल, इस दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में 45 मिनट से अधिक लग जाते हैं, जबकि रोपवे से यही सफर करीब 16 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। वाराणसी विकास प्राधिकरण के मुताबिक, यात्रियों की सुविधा को देखते हुए यह सिस्टम शहर की भीड़भाड़ कम करने में बड़ी भूमिका निभाएगा।

Varanasi Ropeway

पूरे कॉरिडोर में पांच स्टेशन बनाए गए हैं। कैंट स्टेशन को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया गया है, जहां ट्रेन से उतरकर यात्री सीधे रोपवे पकड़ सकेंगे। काशी विद्यापीठ स्टेशन छात्रों और स्थानीय यात्रियों के लिए उपयोगी होगा। रथयात्रा स्टेशन व्यापारिक गतिविधियों और होटल क्षेत्रों को जोड़ेगा। गिरजाघर स्टेशन तकनीकी दृष्टि से टर्निंग पॉइंट की तरह काम करेगा, जबकि अंतिम स्टेशन गोदौलिया चौक होगा, जहां से काशी विश्वनाथ धाम और दशाश्वमेध घाट की दूरी काफी कम रह जाएगी। रोपवे का न्यूनतम किराया 10 रुपये तय किया गया है। दूरी के हिसाब से किराया बढ़ेगा और कैंट से गोदौलिया तक पूरे सफर के लिए यात्रियों को 50 रुपये देने होंगे। यह किराया ऑटो और ई-रिक्शा के मुकाबले प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है, खासकर तब जब शहर में जाम की समस्या आम है। इसके अलावा काशी स्मार्ट पास के जरिए 20 प्रतिशत की छूट भी मिलेगी। मासिक पास लेने वालों को इससे और अधिक राहत मिलेगी।

दोनों को लाभ

आधिकारिक व्यवस्था के तहत पर्यटक, छात्र और स्थानीय व्यापारी सभी के लिए यह रोपवे उपयोगी साबित होगा। चाहें तो पूरी केबिन को निजी तौर पर भी बुक किया जा सकेगा। साथ ही बिजली कटौती, आंधी और तेज हवा जैसी परिस्थितियों में भी सिस्टम को सुरक्षित रखने के लिए बैकअप और इमरजेंसी प्रावधान किए गए हैं। रोपवे टावरों पर हवा की रफ्तार मापने के लिए एनीमोमीटर लगाए गए हैं। तेज हवा या खराब मौसम की स्थिति में सिस्टम खुद धीमा हो जाएगा और जरूरत पड़ने पर संचालन रोक दिया जाएगा। बिजली बाधित होने पर भी ऑटोमैटिक बैकअप और डीजल सिस्टम के जरिए केबिनों को सुरक्षित स्टेशन तक लाने की व्यवस्था की गई है।

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