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यूएन मुख्यालय के बाहर तिब्बती युवक ने खुद को लगाई आग, ‘आजाद तिब्बत’ की मांग में 17 साल में 150 से ज्यादा आत्मदाह

'आजाद तिब्बत' की मांग में आत्मदाह

Tibet Protest: अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय के बाहर एक 42 वर्षीय तिब्बती व्यक्ति ने आत्मदाह कर लिया, जिससे उसकी मौत हो गई। वह तिब्बती झंडा लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा था। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान लोब्गा रंगजेन के रूप में हुई है। वह पिछले करीब 20 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था। यह घटना गुरुवार शाम करीब 7 बजे मैनहट्टन के ईस्ट 43वीं स्ट्रीट और फर्स्ट एवेन्यू के पास हुई।

आग बुझाने की कोशिश, लेकिन नहीं बच सकी जान

जैसे ही रंगजेन ने खुद को आग लगाई, वहां से गुजर रहे लोगों और वाहनों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और कई वाहनों के हॉर्न बजने लगे। कुछ ही पलों में वह जमीन पर गिर गया। मौके पर मौजूद दो इमरजेंसी वर्कर्स ने करीब एक मिनट के भीतर फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग बुझा दी। इसके बाद उसे तुरंत बेलेव्यू अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी। घटना के लगभग एक घंटे बाद भी वहां तिब्बती झंडा पड़ा हुआ था।

Tibet Protest: 'आजाद तिब्बत' की मांग में आत्मदाह
‘आजाद तिब्बत’ की मांग में आत्मदाह

Tibet Protest: ‘चीन तिब्बत से बाहर’ का संदेश मिला

घटना के बाद पुलिस अधिकारियों को घटनास्थल से एक कागज मिला, जिस पर लिखा था, ‘CHINA OUT OF TIBET’, यानी ‘चीन तिब्बत से बाहर’। यह नारा तिब्बती स्वतंत्रता आंदोलन और ‘फ्री तिब्बत कैंपेन’ से जुड़ा माना जाता है।

‘फ्री तिब्बत कैंपेन’ के अनुसार, मार्च 2009 से अब तक तिब्बत के भीतर 150 से अधिक लोगों ने चीनी कब्जे के विरोध में आत्मदाह किया है। संगठन का कहना है कि कई प्रदर्शनकारियों ने आत्मदाह के दौरान दलाई लामा की लंबी उम्र, उनकी तिब्बत वापसी, पंचेन लामा की रिहाई, तिब्बत में मानवाधिकारों की रक्षा और स्वतंत्रता की मांग करते हुए नारे लगाए।

आंदोलन का उद्देश्य

संगठन की वेबसाइट के मुताबिक, जो लोग प्रदर्शनकारियों की मदद करते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करते हैं या तिब्बत से जुड़ी जानकारी विदेशों तक पहुंचाते हैं, उन्हें कड़ी सजा दी जाती है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य तिब्बत को चीन से स्वतंत्र कराना और दलाई लामा को दोबारा सत्ता सौंपने की मांग उठाना है।

बताया जाता है कि वर्ष 1951 में 17 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी तिब्बत में दाखिल हुई। उस समय इस समझौते को शांतिपूर्ण परिवर्तन का माध्यम बताया गया था। हालांकि, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण से पहले तिब्बत को वास्तविक स्वायत्तता प्राप्त थी और वहां अपनी अलग प्रशासनिक व्यवस्था संचालित होती थी।

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