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E20 पर सरकार का बड़ा खुलासा: 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 नहीं, सिर्फ 3-5 लीटर पानी लगता है

E20 Ethanol:

E20 Ethanol: पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों और भ्रामक दावों पर केंद्र सरकार ने विस्तृत रिपोर्ट जारी कर स्थिति स्पष्ट की है। सरकार ने तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर 10 बड़े दावों को खारिज करते हुए कहा कि E20 कार्यक्रम पूरी तरह सुरक्षित है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप लागू किया जा रहा है।

E20 Ethanol: 1 लीटर एथेनॉल बनाने में कितना पानी लगता है-

सरकार ने उस दावे को गलत बताया, जिसमें कहा जा रहा था कि 1 लीटर एथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होता है। सरकार के अनुसार, एक लीटर एथेनॉल के उत्पादन में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की जरूरत होती है। आधुनिक डिस्टिलरी में इस पानी को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक से रीसायकल भी किया जाता है।

E20 Ethanol: इंजन, माइलेज और वारंटी पर क्या असर पड़ता है-

सरकार ने इंजन खराब होने, माइलेज घटने और वाहन की वारंटी खत्म होने के दावों को भी निराधार बताया। ARAI, SIAM और PIB फैक्ट चेक के अनुसार, मानक E20 ईंधन के इस्तेमाल से इंजन या वारंटी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता। अधिक ऑक्टेन रेटिंग के कारण वाहन की परफॉर्मेंस और पिकअप बेहतर हो सकती है।

प्रदूषण में भी आती है कमी-

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, ARAI के परीक्षण में E20 ईंधन के उपयोग से दोपहिया वाहनों में कार्बन मोनोऑक्साइड उत्सर्जन करीब 50% और चारपहिया वाहनों में लगभग 30% तक कम पाया गया।

किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा-

सरकार के अनुसार, 2014-15 से मई 2026 तक एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से 1.90 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। वहीं किसानों को 1.60 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है।

भारत ने हासिल किया E20 का लक्ष्य-

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2013-14 में एथेनॉल मिश्रण का स्तर सिर्फ 1.5% था, जो दिसंबर 2025 तक बढ़कर 20% (E20) हो गया। सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम हुई है और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।

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