TMC Rebel MPs: संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। केंद्र सरकार ने इन सांसदों को नेशनल सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में बुलाया, जिसका विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) समेत INDIA गठबंधन के कई दलों ने बैठक से वॉकआउट कर दिया। हालांकि सरकार ने अपने फैसले का बचाव करते हुए इसे संसदीय प्रक्रिया के अनुरूप बताया।
सरकार ने बुलाने के फैसले का किया बचाव
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि TMC छोड़कर NCPI से जुड़े 20 सांसदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग दल के रूप में मान्यता और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। सरकार का कहना है कि संसद का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित पक्षों को सर्वदलीय बैठक में शामिल करना आवश्यक था।
TMC Rebel MPs: TMC से अलग होकर NCPI में पहुंचे 20 सांसद
बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व से असंतुष्ट होकर TMC के 20 सांसदों ने पार्टी छोड़ दी। इन नेताओं में सुदीप बंद्योपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए इन सांसदों ने छोटी राजनीतिक पार्टी NCPI में विलय का रास्ता चुना। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अलग बैठने की मांग भी की है, जिसे अस्थायी रूप से स्वीकार कर लिया गया है, जबकि औपचारिक मान्यता पर फैसला अभी लंबित है।
विपक्ष ने मान्यता पर उठाए सवाल
विपक्षी दलों का कहना है कि NCPI को अभी तक लोकसभा में अलग दल के रूप में औपचारिक मान्यता नहीं मिली है। ऐसे में उसे सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि बिना मान्यता के NCPI को अलग पार्टी मानना गलत है। वहीं कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने राजनीतिक उद्देश्य से इस दल को बैठक में शामिल किया।
TMC Rebel MPs: मानसून सत्र से पहले बढ़ा सियासी टकराव
सर्वदलीय बैठक का उद्देश्य मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी दलों के बीच सहमति बनाना था, लेकिन TMC के बागी सांसदों को लेकर शुरू हुआ विवाद राजनीतिक टकराव में बदल गया। अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के उस फैसले पर है, जिसमें NCPI की मान्यता और बागी सांसदों की स्थिति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह मुद्दा मानसून सत्र के दौरान भी राजनीतिक बहस का प्रमुख विषय बन सकता है।
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