Home » मध्य प्रदेश » MP के 1900 सरकारी स्कूल बिना टीचर के, CAG रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

MP के 1900 सरकारी स्कूल बिना टीचर के, CAG रिपोर्ट पर हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

MP News:

MP News: मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मामला अब हाई कोर्ट पहुंच गया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि प्रदेश के करीब 1,900 सरकारी स्कूल बिना किसी शिक्षक के संचालित हो रहे हैं। कोर्ट ने सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

MP News: CAG रिपोर्ट के आधार पर दायर हुई याचिका-

यह जनहित याचिका अधिवक्ता सौरभ त्रिपाठी ने दायर की है। याचिका में कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2018 से मार्च 2023 के बीच प्रदेश के 66,814 सरकारी स्कूलों का ऑडिट किया गया था। जांच में सामने आया कि 1,895 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं था, जबकि इनमें से 1,379 स्कूलों में छात्र नामांकित थे।

MP News: शिक्षकों की तैनाती में गड़बड़ी का आरोप-

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदेश में शिक्षकों की तैनाती संतुलित तरीके से नहीं की गई। इसमें कहा गया है कि 435 ऐसे स्कूल हैं जहां कोई छात्र नहीं है, लेकिन वहां शिक्षक तैनात हैं। वहीं 128 शिक्षकों को 320 ऐसे स्कूलों में भेज दिया गया, जहां शिक्षकों के पद ही स्वीकृत नहीं थे।

10वीं का रिजल्ट भी गिरा-

याचिका में दावा किया गया है कि शिक्षकों की कमी का असर छात्रों के प्रदर्शन पर भी पड़ा। इसमें कहा गया है कि 10वीं कक्षा का पास प्रतिशत 2018-19 में 67% था, जो 2021-22 में घटकर 38% रह गया।

निरीक्षण में लापरवाही का भी आरोप-

याचिका में अप्रैल 2026 की एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि इंदौर, मंडला और श्योपुर समेत कई जिलों में शिक्षा अधिकारियों ने नियमों के अनुसार स्कूलों का निरीक्षण नहीं किया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि 14 शिक्षा अधिकारियों को अन्य विभागों में प्रतिनियुक्त किया गया, जबकि उनका वेतन करीब 3.27 करोड़ रुपये स्कूल शिक्षा विभाग से ही दिया जाता रहा।

कोर्ट से क्या मांग की गई-

याचिकाकर्ता ने इसे बच्चों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए हाई कोर्ट से मांग की है कि जिन 1,895 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहां तय समय-सीमा के भीतर नियुक्तियां कराई जाएं। साथ ही शिक्षकों की तैनाती की प्रक्रिया की जांच के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित करने की भी मांग की गई है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा-

एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने मामले में राज्य सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि नोटिस का जवाब चार सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए

यह भी पढ़े- सोनम वांगचुक को मेदांता शिफ्ट करने पर कोर्ट में क्या-क्या हुआ? जानें सुनवाई की पूरी दलीलें