Thumb Sucking Habit: जन्म के बाद कई बच्चे खुद को शांत रखने, नींद आने या सुरक्षा का एहसास पाने के लिए अंगूठा चूसते हैं। यह शुरुआती वर्षों में सामान्य माना जाता है और अधिकांश बच्चे दो से चार साल की उम्र तक यह आदत छोड़ देते हैं। हालांकि, यदि बच्चा चार से पांच साल की उम्र के बाद भी लगातार अंगूठा चूसता है, तो इसका असर दांतों और जबड़ों की ग्रोथ पर पड़ सकता है।
Thumb Sucking Habit: लगातार अंगूठा चूसने से क्या नुकसान होते हैं-
मैक्स मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के डॉ. केशव नैथानी के अनुसार, छह साल की उम्र तक भी अंगूठा चूसने की आदत रहने पर स्थायी दांतों की स्थिति प्रभावित हो सकती है। लगातार दबाव पड़ने से दांत अपनी प्राकृतिक जगह से खिसक सकते हैं और जबड़ों की बनावट भी बदल सकती है।
Thumb Sucking Habit: दांतों और जबड़ों पर पड़ने वाले प्रमुख असर-
आगे के दांत बाहर की ओर निकल सकते हैं।
ऊपर और नीचे के दांतों के बीच गैप (ओपन बाइट) बन सकता है।
ऊपरी जबड़ा संकरा होकर क्रॉसबाइट जैसी समस्या हो सकती है।
दांतों की सही लाइनिंग बिगड़ सकती है।
चोट लगने पर बाहर निकले दांतों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।
बोलने में भी हो सकती है परेशानी-
विशेषज्ञों के अनुसार, दांतों और तालू की बनावट बदलने से कुछ बच्चों को शब्दों का सही उच्चारण करने में कठिनाई हो सकती है। कुछ मामलों में तुतलाहट या स्पष्ट आवाज न निकलने जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
अंगूठा चूसने की आदत कैसे छुड़ाएं-
डॉ. केशव नैथानी का कहना है कि बच्चों को डांटने या जबरदस्ती करने से बचें। इसके बजाय
प्यार से समझाएं कि यह आदत दांतों को नुकसान पहुंचा सकती है।
बच्चे की छोटी-छोटी उपलब्धियों की तारीफ करें।
उसे खेल, ड्राइंग और अन्य गतिविधियों में व्यस्त रखें।
सोते समय सॉफ्ट टॉय या कंबल देकर सुरक्षा का एहसास दिलाएं।
आदत के पीछे की वजह, जैसे तनाव, डर या बोरियत को समझने की कोशिश करें।
कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह-
यदि बच्चा स्कूल जाने की उम्र तक भी अंगूठा चूसना नहीं छोड़ता या उसके दांतों और जबड़ों की बनावट में बदलाव दिखाई देने लगे, तो तुरंत दंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज से भविष्य में ब्रेसेस और अन्य महंगे ऑर्थोडॉन्टिक उपचार की जरूरत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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