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नोएडा की रुचिका के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज, जानिए सामान्य एफआईआर से कितनी अलग होती है यह कानूनी प्रक्रिया

नोएडा की रुचिका के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज, जानिए सामान्य एफआईआर से कितनी अलग होती है यह कानूनी प्रक्रिया

Zero FIR: नोएडा की रहने वाली रुचिका सिंह के खिलाफ जीरो एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की शिकायत पर गौतमबुद्ध नगर के एक्सप्रेसवे थाने में की गई। मामला दिल्ली के जंतर-मंतर से जुड़ा है, जहां नीट पेपर लीक को लेकर हुए प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान रुचिका सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। शिकायत दर्ज होने के बाद, क्योंकि घटना दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र की थी, इसलिए मामले को आगे की जांच और कार्रवाई के लिए दिल्ली के संसद मार्ग थाने भेज दिया गया।इस मामले के सामने आने के बाद जीरो एफआईआर एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कई लोगों के मन में यह सवाल है कि आखिर जीरो एफआईआर क्या होती है और यह सामान्य एफआईआर से किस तरह अलग होती है।

क्या होती है जीरो एफआईआर?

आम तौर पर किसी अपराध की एफआईआर उसी पुलिस थाने में दर्ज की जाती है, जिसके क्षेत्र में घटना हुई हो। लेकिन कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं, जब पीड़ित के लिए तुरंत संबंधित थाने तक पहुंचना संभव नहीं होता या मामला इतना गंभीर होता है कि कार्रवाई में देरी नहीं की जा सकती।ऐसी स्थिति में देश का कोई भी पुलिस थाना शिकायत दर्ज कर सकता है। इसी प्रक्रिया को जीरो एफआईआर कहा जाता है। इसमें शुरुआत में एफआईआर नंबर की जगह शून्य यानी ‘0’ दर्ज किया जाता है। इसके बाद शिकायत और मामले से जुड़े दस्तावेज उस पुलिस थाने को भेज दिए जाते हैं, जिसके अधिकार क्षेत्र में वास्तविक घटना हुई होती है।

Zero FIR: सामान्य एफआईआर और जीरो एफआईआर में अंतर

सामान्य एफआईआर केवल उसी थाने में दर्ज होती है, जहां अपराध हुआ हो या जो थाना उस क्षेत्र का अधिकार रखता हो। अगर कोई व्यक्ति गलत थाने में शिकायत लेकर पहुंचता है, तो उसे संबंधित थाने जाने के लिए कहा जा सकता है।वहीं, जीरो एफआईआर में ऐसा नहीं होता। इसमें पीड़ित देश के किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करा सकता है। पुलिस सिर्फ यह कहकर शिकायत लेने से इनकार नहीं कर सकती कि घटना उसके क्षेत्र में नहीं हुई है।जीरो एफआईआर पर शुरुआत में शून्य नंबर दर्ज किया जाता है। जब मामला संबंधित थाने में पहुंचता है, तो उसे नियमित एफआईआर नंबर दे दिया जाता है और आगे की जांच उसी थाने द्वारा की जाती है।

Zero FIR: गंभीर मामलों में क्यों महत्वपूर्ण है जीरो एफआईआर?

जीरो एफआईआर की व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि गंभीर अपराधों में पुलिस कार्रवाई तुरंत शुरू हो सके। हत्या, अपहरण, दुष्कर्म, मारपीट जैसे मामलों में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में अगर पीड़ित को पहले सही थाने की तलाश करनी पड़े तो कार्रवाई में देरी हो सकती है।जीरो एफआईआर के जरिए शिकायत दर्ज होते ही पुलिस शुरुआती कदम उठा सकती है और बाद में मामले को संबंधित थाने को सौंप दिया जाता है। इससे पीड़ित को अलग-अलग थानों के चक्कर लगाने से राहत मिलती है।

निर्भया कांड के बाद मिली कानूनी मजबूती

दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के बाद देश में आपराधिक कानूनों में कई बदलाव किए गए। जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर 2013 में आपराधिक कानूनों में संशोधन किया गया, जिसके बाद जीरो एफआईआर की व्यवस्था को और मजबूती मिली।इसके बाद कानून और न्यायालयों ने भी स्पष्ट किया कि गंभीर अपराधों में पुलिस केवल क्षेत्राधिकार का हवाला देकर शिकायत दर्ज करने से इनकार नहीं कर सकती।फिलहाल रुचिका सिंह के खिलाफ दर्ज जीरो एफआईआर को आगे की जांच के लिए संबंधित थाने भेज दिया गया है। अब मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया दिल्ली पुलिस के स्तर पर आगे बढ़ेगी।

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