Home » राष्ट्रीय » यूसीसी और फरक्का पर BJP-JDU क्यों आमने-सामने? अमित शाह के ऐलान के बाद समझिए NDA में क्या चल रहा है

यूसीसी और फरक्का पर BJP-JDU क्यों आमने-सामने? अमित शाह के ऐलान के बाद समझिए NDA में क्या चल रहा है

NDA: यूसीसी और फरक्का पर BJP-JDU आमने-सामने, NDA में सब ठीक?

NDA: केंद्र में BJP के नेतृत्व वाले NDA की सहयोगी JDU इन दिनों दो अहम मुद्दों पर अपनी अलग राय रख रही है। पहला मुद्दा समान नागरिक संहिता (UCC) का है, जिस पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 से पहले सभी 21 BJP-NDA शासित राज्यों में इसे लागू करने का भरोसा जताया है। दूसरा मुद्दा भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा समझौते का है, जिसे आमतौर पर फरक्का समझौते के संदर्भ में चर्चा में लाया जा रहा है। इन दोनों मामलों में JDU बिहार के हित और व्यापक सहमति की बात कर रही है।

UCC पर अमित शाह ने क्या कहा और JDU का रुख क्या है?

13 सितंबर को मुंबई में अमित शाह ने कहा कि NDA के शासन वाले 21 राज्यों में 2029 से पहले UCC लागू किया जाएगा। UCC का उद्देश्य विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों के लिए धर्म से अलग एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है। इसके बाद JDU ने साफ किया कि वह बिना व्यापक चर्चा के बिहार में UCC लागू करने के पक्ष में नहीं है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि JDU के नेता अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। पार्टी का कहना है कि धार्मिक समुदायों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से बातचीत जरूरी है। JDU नेता नीरज कुमार ने यह भी कहा कि पार्टी का रुख उस पत्र से निर्देशित है, जो नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए विधि आयोग को लिखा था।

NDA: फरक्का समझौते पर क्यों अलग है BJP-JDU का रुख?

दूसरा विवाद गंगा जल बंटवारे से जुड़ा है। 1996 का भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा समझौता 31 दिसंबर 2026 को समाप्त होना है। JDU नेता संजय झा ने इसके नवीनीकरण को लेकर बिहार की चिंताएं उठाई हैं। पार्टी का तर्क है कि बिहार के जल हितों को ध्यान में रखे बिना समझौते को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। यहां भी मामला सीधे BJP बनाम JDU के टकराव का आधिकारिक फैसला नहीं है। केंद्र की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आश्वासन दिया है कि समझौते के नवीनीकरण पर बिहार के हितों को ध्यान में रखा जाएगा। यानी बातचीत और केंद्र-राज्य समन्वय की प्रक्रिया अभी जारी है।

क्या ये NDA में बढ़ती दूरी का संकेत है?

UCC और फरक्का दोनों मामलों में JDU ने अपनी क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को सामने रखा है। UCC पर पार्टी व्यापक सहमति और परामर्श चाहती है, जबकि फरक्का मामले में उसका जोर बिहार के जल हितों पर है। यही वजह है कि अमित शाह के UCC ऐलान के बाद NDA की सहयोगी राजनीति पर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, उपलब्ध बयानों से यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे NDA गठबंधन में कोई बड़ा संकट पैदा हो गया है। BJP की ओर से भी सहयोगियों की आपत्तियों पर बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात सामने आई है।

 

 

ये भी पढ़ें…काशी से वडनगर तक बाइक यात्रा क्यों? मोदी की जन्मभूमि से कर्मभूमि के बीच BJP की नजर UP चुनाव पर?