CCA misuse: पटना हाई कोर्ट ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (CCA) के कथित दुरुपयोग को लेकर नालंदा जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने बिना उचित जांच-पड़ताल के नागरिकों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने को गंभीरता से लिया। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने नालंदा जिलाधिकारी की ओर से पारित CCA के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को दोनों याचिकाकर्ताओं को 1-1 लाख रुपये मुआवजा और 10 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने का निर्देश दिया।
CCA misuse: दोषी अधिकारियों से वसूली जाएगी मुआवजे की राशि-
पटना हाई कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि दोषी अधिकारियों से वसूली जाएगी। कोर्ट ने CCA जैसे कानून के इस्तेमाल में उचित प्रक्रिया और जांच का पालन करने पर जोर दिया।
CCA misuse: क्या था पूरा मामला-
नालंदा जिले के कतरिसराय थाना क्षेत्र के कटौना गांव निवासी शशि कुमार उर्फ फुकन और अजय सिंह ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों ने जिलाधिकारी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें ‘असामाजिक तत्व’ घोषित किया गया था।
40 किलोमीटर दूर थाने में हाजिरी का था आदेश-
जिलाधिकारी के आदेश के तहत दोनों याचिकाकर्ताओं को अपने नजदीकी थाने के बजाय करीब 40 किलोमीटर दूर सिलाव थाने में हर सप्ताह तीन दिन हाजिरी लगाने का निर्देश दिया गया था। उन्हें सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को थाने में उपस्थित होना था।
कोर्ट ने CCA आदेश किया रद्द-
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने नालंदा जिलाधिकारी द्वारा पारित CCA आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं को मुआवजा और मुकदमा खर्च देने का भी आदेश दिया।
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