Cancer Drug Racket: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाओं के अवैध कारोबार से जुड़े पैन-इंडिया रैकेट का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में 12 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। जांच में सामने आया है कि गिरोह सरकारी और निजी अस्पतालों से कैंसर की असली दवाएं चोरी करने के साथ-साथ नकली दवाओं की री-पैकिंग कर उन्हें असली बताकर बेचता था।
Cancer Drug Racket: सरकारी और निजी अस्पतालों से चोरी होती थीं दवाएं-
पुलिस के मुताबिक, गिरोह सरकारी और निजी अस्पतालों से महंगी कैंसर दवाएं चुराता था। इसके बाद इन दवाओं को अवैध बाजार में बेचने के लिए अलग-अलग नेटवर्क के जरिए भेजा जाता था। जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह नकली दवाओं को असली जैसी पैकिंग में तैयार करके मरीजों और उनके परिजनों को ऊंची कीमतों पर बेचता था।
Cancer Drug Racket: लाखों रुपये कीमत वाली दवाएं निशाने पर-
गिरोह मुख्य रूप से ऐसी कैंसर दवाओं को निशाना बनाता था, जिनकी बाजार में भारी मांग है और जिनकी कीमत प्रति डोज लाखों रुपये तक होती है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिजन इन जालसाजों के निशाने पर रहते थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि नकली दवाओं का स्रोत कहां है और इन्हें देशभर में किन चैनलों से सप्लाई किया जाता था।
राजस्थान से दिल्ली तक पहुंची सरकारी दवाएं-
जांच में राजस्थान कनेक्शन भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में कैंसर मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए भेजी गई लाखों रुपये की महंगी दवाएं दिल्ली पहुंची थीं। इसके बाद क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने जांच शुरू की। पुलिस अब दवाओं की खरीद से लेकर सरकारी गोदाम, अस्पताल और फिर दिल्ली के ड्रग सिंडिकेट तक पहुंचने वाली पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रही है।
जयपुर से तीन आरोपी हिरासत में-
क्राइम ब्रांच ने जयपुर से तीन आरोपितों को हिरासत में लिया है। मंगलवार को हुई कार्रवाई में डार्जालेक्स, इम्फिन्जी, एरबिटक्स, बावेंसियो, एडसेट्रिस और कीट्रूडा जैसी महंगी कैंसर दवाओं की 22 और शीशियां बरामद की गईं। इनमें कुछ दवाओं की एक शीशी की कीमत करीब एक लाख रुपये तक बताई जा रही है।
27.19 लाख रुपये नकद बरामद-
पुलिस ने आरोपितों के पास से 27.19 लाख रुपये नकद भी बरामद किए हैं। अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए पहुंची दवाएं सरकारी सिस्टम से बाहर निकलकर दिल्ली के ड्रग सिंडिकेट तक कैसे पहुंचीं।
पूरे नेटवर्क की तलाश जारी-
पुलिस अब गिरोह के सप्लाई नेटवर्क और री-पैकिंग से जुड़े लोगों की पहचान कर रही है। यह भी जांच की जा रही है कि इस अवैध कारोबार में खरीद-बिक्री से लेकर दवाओं की पैकिंग और देशभर में सप्लाई तक कौन-कौन लोग शामिल हैं।
यह भी पढ़ें- अमित शाह ने ACB पर दबाव डालकर सत्येंद्र जैन को गिरफ्तार कराया: केजरीवाल








