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सुनामी आने से पहले सुनाई देगी ज्वालामुखी की आवाज? वैज्ञानिकों ने खोजा समुद्र के अंदर खतरा पहचानने का नया तरीका

ज्वालामुखी की ध्वनि खोलेगी सुनामी का राज

Volcanic Tsunami Warning: इंडोनेशिया में पिछले शनिवार अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ। इस विस्फोट के बाद राख का गुबार करीब 50 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच गया। इसी बीच वैज्ञानिकों की एक रिसर्च चर्चा में है, जिसमें बताया गया है कि समुद्र के अंदर होने वाली ‘गड़गड़ाहट’ या आवाजों को पहचानकर ज्वालामुखी से पैदा होने वाली सुनामी का खतरा पहले ही समझा जा सकता है। आइए जानते हैं इस रिसर्च में क्या सामने आया।

हुंगा ज्वालामुखी की राख 50 किलोमीटर तक पहुंची

जनवरी 2022 में टोंगा साम्राज्य में हुंगा ज्वालामुखी का विस्फोट हुआ था। यह घटना इतनी बड़ी और अचानक थी कि पूरी दुनिया हैरान रह गई थी। विस्फोट के बाद राख और गैस का विशाल गुबार 50 किलोमीटर से भी ज्यादा ऊंचाई तक पहुंच गया था।इस विस्फोट से पैदा हुई दबाव तरंगें पूरी दुनिया में फैल गई थीं। इसके साथ ही समुद्र में कई सुनामी लहरें भी उठी थीं।

हुंगा ज्वालामुखी के विस्फोट ने टोंगा के कई हिस्सों में भारी नुकसान पहुंचाया था। इस घटना में कम से कम तीन लोगों की जान चली गई थी।हालांकि, इस घटना से वैज्ञानिकों को एक महत्वपूर्ण बात पता चली। विस्फोट के बाद आई सभी सुनामी लहरें एक ही कारण से पैदा नहीं हुई थीं।

Volcanic Tsunami Warning: कुछ ही मिनटों में पहुंचीं पहली लहरें

विस्फोट के शुरुआती हिस्से में हुए जबरदस्त धमाकों के कारण पहली सुनामी पैदा हुई थी। हुंगा के पास स्थित टोंगाटापू द्वीप तक कुछ ही मिनटों में 1 से 4 मीटर ऊंची लहरें पहुंच गई थीं।इसके बाद एक घंटे से ज्यादा समय बीतने पर और भी खतरनाक घटनाएं हुईं। हुंगा से करीब 100 किलोमीटर के दायरे में मौजूद द्वीपों तक 18 से 40 मीटर ऊंची सुनामी लहरें पहुंचीं।इन विशाल लहरों ने दक्षिण और मध्य टोंगा के कई गांवों और रिसॉर्ट को तबाह कर दिया था। वहीं, साल 2025 में हवाई के किलाउआ ज्वालामुखी में हुए विस्फोट के दौरान राख करीब 400 मीटर की ऊंचाई तक पहुंची थी।

Volcanic Tsunami Warning: ज्वालामुखी की ध्वनि खोलेगी सुनामी का राज
ज्वालामुखी की ध्वनि खोलेगी सुनामी का राज
ज्वालामुखी का मुख्य हिस्सा अचानक धंसा

हाल ही में ‘द कन्वरसेशन’ में प्रकाशित एक रिसर्च में इस बड़ी सुनामी से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक, इतनी बड़ी सुनामी किसी दूसरे विस्फोट की वजह से नहीं आई थी।वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्वालामुखी का कैल्डेरा यानी उसका मुख्य गड्ढा अचानक नीचे धंस गया था। इस धंसने की वजह से समुद्र में ऐसी ध्वनि तरंगें बनीं, जिन्हें हजारों किलोमीटर दूर तक महसूस किया जा सकता था।यह खोज भविष्य में अचानक आने वाली और बेहद खतरनाक सुनामी की पहले से चेतावनी देने का एक नया तरीका विकसित करने में मदद कर सकती है।

समुद्र के अंदर ज्वालामुखी पर नजर रखना मुश्किल

समुद्र के नीचे मौजूद ज्वालामुखियों की गतिविधियों पर नजर रखना काफी चुनौतीपूर्ण है। प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में ऐसे सैकड़ों ज्वालामुखी मौजूद हैं।इसके बावजूद वैज्ञानिकों के पास इन ज्वालामुखियों की गतिविधियों और विस्फोट के समय उनके असर को समझने के लिए अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है।

Volcanic Tsunami Warning: सैटेलाइट सुनामी का खतरा नहीं बता पाते

सैटेलाइट ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान निकलने वाली गर्मी और गैसों में बदलाव को पहचान सकते हैं। अगर बादलों की वजह से दृश्यता में ज्यादा परेशानी न हो, तो वे राख के ऊपर उठते गुबार का भी पता लगा सकते हैं।यह जानकारी ज्वालामुखी विस्फोट का समय रहते अलर्ट जारी करने और विमानों को सुरक्षित रखने में काफी उपयोगी होती है। लेकिन सैटेलाइट यह नहीं बता सकते कि किसी ज्वालामुखी विस्फोट के बाद वहां जानलेवा सुनामी आने वाली है या नहीं।

भूकंप मापक यंत्र भी हर बार कारगर नहीं

समुद्र के अंदर होने वाली गतिविधियों का पता लगाने के लिए सामान्य भूकंप मापक यंत्र भी हमेशा पर्याप्त साबित नहीं होते।2022 में हुंगा ज्वालामुखी के विस्फोट के समय उसके सबसे नजदीक मौजूद भूकंप मापक यंत्र फिजी में था। यह ज्वालामुखी से करीब 750 किलोमीटर दूर स्थित था।इतनी ज्यादा दूरी होने के कारण ज्वालामुखी से पैदा होने वाली कई भूकंपीय तरंगें धरती के अंदर से सही तरीके से आगे नहीं बढ़ पातीं। इसी वजह से शोधकर्ताओं ने एक अलग तरीका अपनाया। उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि समुद्र के अंदर मौजूद हुंगा ज्वालामुखी की गतिविधियां किस तरह के संकेत दे रही थीं।

समुद्र में ज्वालामुखी घंटी की तरह काम करता है

समुद्र के अंदर आवाज और पानी के जरिए फैलने वाले ध्वनि संकेतों को तृतीयक तरंगें या टी-वेव कहा जाता है। ये तरंगें समुद्र में बहुत लंबी दूरी तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकती हैं।समुद्र की सतह से ऊपर उठा हुआ कोई अलग-थलग ज्वालामुखी एक तरह से घंटी की तरह काम कर सकता है। जब उसके आसपास कोई बहुत तेज या हिंसक गतिविधि होती है, तो उससे पैदा होने वाली आवाज समुद्र के बड़े हिस्से में फैल सकती है।

Volcanic Tsunami Warning: वैज्ञानिकों ने भूस्खलन की आवाज सुनी

इस रिसर्च के दौरान दक्षिण-पश्चिम प्रशांत क्षेत्र के आसपास मौजूद 14 भूकंपीय केंद्रों से मिले रिकॉर्ड का दोबारा अध्ययन किया गया। इनमें कुछ केंद्र हुंगा ज्वालामुखी से करीब 2,600 किलोमीटर की दूरी पर भी थे।वैज्ञानिकों ने विस्फोट के पहले घंटे के रिकॉर्ड में समुद्र के अंदर ज्वालामुखी की ढलानों से तेजी से नीचे की ओर खिसकते भूस्खलन के प्रवाह की आवाजों का पता लगाया।

ये भूस्खलन इतने शक्तिशाली थे कि उन्होंने समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को भी नुकसान पहुंचाया था। इन गतिविधियों से पैदा हुई ध्वनि के संकेतों को ज्वालामुखी से सैकड़ों किलोमीटर दूर तक भी पहचाना जा सका।इस रिसर्च से संकेत मिलता है कि समुद्र के अंदर पैदा होने वाली इन आवाजों की निगरानी भविष्य में ज्वालामुखी से जुड़ी खतरनाक सुनामी की समय रहते पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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