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नीम करोली बाबा की सादगी, हनुमान जी के प्रति भक्ति और चमत्कारों की कहानी क्या ‘हनुमान अंश’ को बनाती है खास?

क्या ‘हनुमान अंश’ है साल की खास फिल्म?

Hanuman Ansh Review: नीम करोली बाबा को मानने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन उनके जीवन और व्यक्तित्व के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। वह किस तरह के संत थे और उनकी साधना कितनी गहरी थी, इसे पूरी तरह समझ पाना आसान नहीं है। इसी वजह से उनकी जिंदगी के कुछ हिस्सों और उनसे जुड़ी घटनाओं को फिल्म के जरिए दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है।

लेखक, निर्देशक और निर्माता विशाल चतुर्वेदी ने नीम करोली बाबा की जिंदगी से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ बनाई है। फिल्म अब सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। खास बात यह है कि फिल्म का बहुत ज्यादा प्रमोशन नहीं किया गया, इसके बावजूद दर्शकों में इसे लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। नोएडा के कई थिएटरों में शो हाउसफुल चल रहे हैं और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से भी अच्छी प्रतिक्रिया सामने आ रही है।

वीकेंड पर फिल्म देखने पहुंचे दर्शकों के अनुभव भी काफी दिलचस्प रहे। कई जगह टिकट मिलना मुश्किल था। एक थिएटर में रविवार शाम का शो लगभग पूरी तरह भरा हुआ था। यहां बच्चों से लेकर माता-पिता और बुजुर्गों तक पूरी फैमिली फिल्म देखने पहुंची थी।

Hanuman Ansh Review: क्या ‘हनुमान अंश’ है साल की खास फिल्म?
क्या ‘हनुमान अंश’ है साल की खास फिल्म?
Hanuman Ansh Review: क्यों खास है नीम करोली बाबा की कहानी?

एक ऐसे संत की जिंदगी को बड़े पर्दे पर देखना अपने आप में खास अनुभव है, जिन्होंने दुनिया के कई बड़े लोगों को प्रभावित और प्रेरित किया। फिल्म में उनके जीवन के उस दौर को दिखाया गया है, जब भारत आजादी से पहले का समय देख रहा था।कहानी के अनुसार, करीब 1900 के आसपास उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में लक्ष्मण नारायण शर्मा का जन्म हुआ। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया। इसके बाद उनके पिता ने दूसरी शादी कर ली। इन परिस्थितियों के बाद वह घर से निकल गए और साधना के रास्ते पर चल पड़े।

उन्होंने तपस्या की और लंबे समय तक देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की। कई साल तक वह अपने घर और परिवार से दूर रहे। बाद में उनका परिवार उन्हें ढूंढने में सफल हुआ और उन्हें दोबारा गृहस्थ जीवन में लौटना पड़ा। हालांकि, गृहस्थ जीवन में आने के बाद भी उनकी साधना लगातार गहरी होती गई। इसी के साथ उनके भक्तों के साथ उनका जुड़ाव भी मजबूत होता गया।फिल्म इसी जुड़ाव और बाबा से जुड़े अलग-अलग प्रसंगों को पर्दे पर दिखाती है।

भक्ति, भावना और चमत्कार का मेल

‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा से जुड़ी कई घटनाओं को रचनात्मक तरीके से पेश किया गया है। फिल्म में भावनाएं हैं, हास्य है, भक्ति है और आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव भी होता है।पार्वती दीदी से जुड़ी सांप वाली कहानी हो या चलती ट्रेन को रोकने वाला प्रसंग, हनुमान जी की मूर्ति बनवाते समय असली लंगूर के दर्शन होना हो या गुफा में बाबा के सेवक गोपाल को उनका सांप से लिपटा हुआ रूप दिखाई देना इन घटनाओं को फिल्म में खास अंदाज में दिखाया गया है।

फिल्म में एक अंग्रेज अधिकारी के सामने बाबा की शक्ति का प्रसंग भी दिखाया गया है, जहां ट्रेन को एक जगह रोक दिया जाता है। इसके अलावा बाबा के एक ही समय पर दो अलग-अलग जगह मौजूद होने और अपने भक्त की जान बचाने के लिए जंगल में प्रकट होकर खतरनाक शक्तियों से मुकाबला करने जैसे प्रसंग भी कहानी का हिस्सा हैं।फिल्म इन घटनाओं को केवल चमत्कार की तरह नहीं दिखाती, बल्कि उन्हें भावनाओं और कहानी के साथ जोड़ने की कोशिश करती है।

बिना बड़े सितारों के कैसे छाई ‘हनुमान अंश’?
बिना बड़े सितारों के कैसे छाई ‘हनुमान अंश’?
Hanuman Ansh Review: कहानी एक बच्चे की इच्छा से शुरू होती है

फिल्म की कहानी को आसान शब्दों में समझें तो यह एक छोटे बच्चे की कहानी है, जो अपनी दिवंगत मां से दोबारा मिलना चाहता है। जब उसे बताया जाता है कि उसकी मां भगवान राम के पास चली गई है और भगवान राम तक पहुंचने के लिए भगवान हनुमान का सहारा लेना होगा, तो बच्चा इस बात पर अड़ जाता है।इसके बाद कहानी एक ऐसे सवाल की तरफ बढ़ती है कि क्या किसी इंसान की सच्ची इच्छा पूरी करने के लिए भगवान खुद धरती पर आ सकते हैं?लगभग ढाई घंटे की फिल्म इसी सवाल का जवाब तलाशती है। इसी सफर में नीम करोली बाबा की कहानी सामने आती है। फिल्म यह भी दिखाती है कि जब कोई साधारण इंसान भगवान को खोजने निकलता है, तो किस तरह वह खुद दूसरों के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र बन जाता है।

कहानी साधारण, लेकिन प्रस्तुति प्रभावशाली

फिल्म की कहानी बहुत जटिल नहीं है। इसमें कोई बड़ा रहस्य या लगातार आने वाले ट्विस्ट नहीं हैं। लेकिन कहानी को जिस तरीके से पर्दे पर प्रस्तुत किया गया है, वह इसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।यह फिल्म तर्क से ज्यादा आस्था, भावना और अनुभव पर काम करती है। कई ऐसे दृश्य हैं जिन्हें देखकर दर्शक ज्यादा सवाल करने के बजाय उस पल को महसूस करने लगते हैं।फिल्म की खास बात यह भी है कि किसी भी दृश्य को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की कोशिश नहीं की गई। भगवान या संत की छवि बनाने के लिए किसी दूसरे किरदार को छोटा दिखाने का सहारा भी नहीं लिया गया। इसी वजह से फिल्म के भावनात्मक दृश्य काफी स्वाभाविक लगते हैं।

बाबा के किरदार में अभिनेता ने छोड़ी छाप

फिल्म में नीम करोली बाबा की भूमिका निभाने वाले अभिनेता का अभिनय इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है। उनके चेहरे की मुस्कान और पूरे किरदार में दिखाई देने वाली शांति को लगातार बनाए रखना आसान काम नहीं था।लगभग ढाई घंटे तक उनके चेहरे पर एक सहज मुस्कान दिखाई देती है। वह बड़े-बड़े विचारों और गहरी बातों को भी बेहद सामान्य अंदाज में बोलते हैं। उनके अभिनय में ऐसा कुछ महसूस होता है कि पर्दे पर सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक अलग तरह की ऊर्जा मौजूद है।बाबा के किरदार में उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली लगता है और इस भूमिका के लिए उन्हें पूरे अंक दिए जा सकते हैं।

नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म क्यों देखें?
नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म क्यों देखें?
Hanuman Ansh Review: बाल कलाकार विहान शिर्गी ने भी किया अच्छा काम

विहान शिर्गी ने बाबा के किशोरावस्था वाले किरदार को निभाया है। एक बाल कलाकार के तौर पर उनका काम काफी अच्छा नजर आता है।वहीं, गोपाल के किरदार में भगवान दास पटेल भी प्रभावित करते हैं। खासकर बाबा को गले लगकर रोने और उनके सेवक के रूप में उनके साथ बने रहने वाले दृश्यों में उनकी भावनाएं काफी स्वाभाविक दिखाई देती हैं।फिल्म की बाकी स्टार कास्ट भी अलग-अलग मौकों पर थोड़े-थोड़े समय के लिए पर्दे पर नजर आती है और अपने हिस्से का काम ठीक तरीके से करती है।

फिल्म का संगीत सबसे मजबूत पक्षों में से एक

अगर अभिनय के बाद फिल्म के किसी हिस्से की सबसे ज्यादा तारीफ करनी हो तो वह इसका संगीत और बैकग्राउंड स्कोर है।फिल्म में बैकग्राउंड म्यूजिक जिस समय आता है, उसकी टाइमिंग काफी सटीक है। कई दृश्यों में संगीत भावनाओं को और मजबूत कर देता है। गाने भी कहानी से इस तरह जुड़े हुए हैं कि वे अलग से लगाए गए हिस्से नहीं लगते।बैकग्राउंड म्यूजिक ने पूरी कहानी को एक धागे में बांधने का काम किया है।फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक धीरेंद्र मुलकलवर ने दिया है। वहीं साधु तिवारी, ऋषि पाठक, श्रेयाज धर्माधिकारी और विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म के संगीत में योगदान दिया है। पूरी म्यूजिक टीम का काम फिल्म को एक अलग अनुभव देता है।

Hanuman Ansh Review: ‘आवा गमन मिटाओ भोले शंकर’ बना पसंदीदा गाना

फिल्म के गानों में ‘आवा गमन मिटाओ, भोले शंकर’ खास तौर पर पसंद आता है। इसकी धुन ऐसी है कि फिल्म देखने के बाद भी इसे दोबारा सुनने का मन करता है।वहीं क्लाइमेक्स के दौरान आने वाला गाना ‘हृदय में जिनके सीताराम’ भी काफी प्रभावशाली है। इस गाने को फिल्म के लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने खुद गाया है।इस गाने की धुन दर्शकों के मन में थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी काफी देर तक बनी रह सकती है।

पूरी फैमिली के साथ देख सकते हैं फिल्म

‘हनुमान अंश’ को एक फैमिली फिल्म कहा जा सकता है। इसे परिवार के साथ आराम से देखा जा सकता है। थिएटर में भी बच्चों, माता-पिता और बुजुर्गों सहित पूरी फैमिली को फिल्म देखने पहुंचते देखा गया।एक दर्शक के अनुभव के अनुसार, उनके शो में लगभग 20 प्रतिशत दर्शक बच्चे थे। यानी फिल्म केवल बड़े दर्शकों तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार के अलग-अलग उम्र के लोग इसे देख रहे हैं।फिल्म जिस बिंदु पर खत्म होती है, उसके बारे में पहले से बताना सही नहीं होगा, क्योंकि इससे क्लाइमेक्स का मजा खराब हो सकता है।

‘हनुमान अंश’ ने दर्शकों को क्यों किया भावुक?
‘हनुमान अंश’ ने दर्शकों को क्यों किया भावुक?
Hanuman Ansh Review: बिना बड़े नामों के बनी फिल्म ने चौंकाया

आज के समय में जब फिल्मों की सफलता को अक्सर बड़े कलाकारों, बड़े बजट और बड़े प्रचार से जोड़कर देखा जाता है, ‘हनुमान अंश’ इस सोच को चुनौती देती नजर आती है।फिल्म में कोई बहुत बड़ा स्टार नहीं है, न ही कोई बेहद चर्चित निर्देशक या लोकप्रिय निर्माता इसका सबसे बड़ा आकर्षण है। फिर भी फिल्म दर्शकों तक अपनी कहानी, भावनाओं और विषय के जरिए पहुंच रही है।एक तरफ हजारों करोड़ के बजट वाली फिल्मों में छोटी-छोटी गलतियां खोजने के लिए लोग तैयार रहते हैं, वहीं कम बजट में बनी ऐसी फिल्म को ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचाना भी जरूरी है।फिल्म की सफलता यह सवाल भी खड़ा करती है कि क्या सिनेमा की असली ताकत केवल बजट और बड़े नाम हैं?

‘महावतार नरसिम्हा’ की तरह अलग रास्ते पर फिल्म

फिल्म की तुलना उस तरह के सिनेमा से भी की जा सकती है, जिसने बिना बड़े स्टार या चर्चित चेहरों के केवल कंटेंट, भावना और विषय के दम पर दर्शकों का ध्यान खींचा।‘महावतार नरसिम्हा’ की तरह ‘हनुमान अंश’ भी यह दिखाने की कोशिश करती है कि अगर कहानी और भावनाएं दर्शकों से जुड़ जाएं तो बड़े नामों के बिना भी फिल्म अपनी जगह बना सकती है।आज जब कई बड़ी फिल्में रिलीज के कुछ ही दिनों बाद सिनेमाघरों से हट जाती हैं, वहीं इस फिल्म का लंबे समय तक दर्शकों के बीच बने रहना इसे अलग बनाता है। फिल्म की स्क्रीनिंग में दर्शकों की भीड़ और थिएटर में जगह कम पड़ने की स्थिति इसकी लोकप्रियता का संकेत देती है।

फिल्म में महसूस होगी भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा

‘हनुमान अंश’ में नीम करोली बाबा की सादगी, उनकी साधना, हनुमान जी के प्रति उनकी भक्ति और उनके आसपास मौजूद भक्तों के विश्वास को प्रमुखता से दिखाया गया है।फिल्म देखते समय कई दर्शकों को ऐसा महसूस हो सकता है कि वे इस अनुभव में अकेले नहीं हैं। कहानी और संगीत मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं, जो दर्शक को फिल्म के साथ जोड़कर रखता है।यह फिल्म केवल घटनाओं को दिखाने की कोशिश नहीं करती, बल्कि दर्शक को उन भावनाओं को महसूस कराने का प्रयास करती है, जिनके केंद्र में आस्था और विश्वास है।

2 करोड़ की फिल्म ने कैसे मचाई धूम?
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Hanuman Ansh Review: सिनेमा सिर्फ बजट और स्टार पावर नहीं

‘हनुमान अंश’ का सबसे बड़ा संदेश यही लगता है कि सिनेमा केवल बड़े बजट, बड़े अभिनेता, चर्चित सरनेम, महंगी कास्टिंग या वीएफएक्स का नाम नहीं है।सिनेमा में सबसे जरूरी चीज कहानी से पैदा होने वाला भावनात्मक जुड़ाव है। जब दर्शक किसी कहानी को केवल देखते नहीं, बल्कि उसे महसूस करने लगते हैं, तभी वह कहानी लंबे समय तक उनके साथ रहती है।इस फिल्म को इसी नजरिए से देखा जाए तो यह एक अलग तरह का अनुभव देती है। कम बजट में बनी यह फिल्म बड़े बजट वाले सिनेमा के सामने अपनी पहचान बनाने की कोशिश करती है और यही इसकी सबसे खास बात है।

फिल्म देखने के बाद बताएं अपना अनुभव

अगर आप नीम करोली बाबा को मानते हैं या उनके जीवन के बारे में जानने में रुचि रखते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए खास अनुभव हो सकती है। फिल्म देखने के बाद यह भी बताना दिलचस्प होगा कि आपको इसमें भक्ति, कहानी, अभिनय और संगीत में से सबसे ज्यादा क्या पसंद आया।साथ ही, अगर आप कैंची धाम जा चुके हैं तो अपना अनुभव भी साझा कर सकते हैं। आप वहां कब गए, कहां से यात्रा की और दर्शन का आपका अनुभव कैसा रहा, यह भी बताया जा सकता है।

फिल्म के लेखक, निर्देशक और निर्माता विशाल चतुर्वेदी के साथ फिल्म की रिलीज से करीब एक महीने पहले एक पॉडकास्ट भी किया गया था। यह पॉडकास्ट टीआरपी चैनल पर उपलब्ध है और उसका लिंक डिस्क्रिप्शन में दिया गया है। फिल्म में रुचि रखने वाले दर्शक उस बातचीत को भी देख सकते हैं।कुल मिलाकर, ‘हनुमान अंश’ उन फिल्मों में शामिल हो सकती है जिन्हें देखने के बाद दर्शक केवल कहानी याद नहीं रखते, बल्कि उससे जुड़ी भावनाओं को भी अपने साथ लेकर बाहर निकलते हैं। फिल्म का संगीत, बाबा के किरदार का अभिनय, भक्तों से जुड़े प्रसंग और आस्था से जुड़ी कहानी इसे एक अलग तरह का सिनेमाई अनुभव देते हैं।

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