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स्वतंत्र भारद्वाज को मिली अंतरिम जमानत, जंतर-मंतर पर निशू आजाद के पिता से विवाद, SC/ST Act में हुई थी गिरफ्तारी, जानिए कोर्ट ने क्या कहा

Swatantra Bail

Swatantra Bail: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विवाद के बाद गिरफ्तार किए गए स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट से तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत मिल गई है। मामला 23 जून 2026 को हुए प्रदर्शन के दौरान निशू आजाद के पिता संजय आजाद से कथित मारपीट से जुड़ा है। इस मामले में बाद में SC/ST Act की धाराएं जोड़ी गई थीं। स्वतंत्र की ओर से गिरफ्तारी और SC/ST Act के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष ने जमानत का विरोध किया। ऐसे में जानिए क्या है पूरा मामला और कोर्ट में किन मुद्दों पर सबसे ज्यादा बहस हुई।

जंतर-मंतर पर हुआ था विवाद

मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज और निशू आजाद के पिता संजय आजाद के बीच कहासुनी के बाद हाथापाई हुई। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि स्वतंत्र ने हाथ में पहने कड़े से संजय आजाद के सिर पर वार किया। वहीं स्वतंत्र का पक्ष रहा कि घटनाक्रम में पहले उनके साथ मारपीट हुई और उन्होंने आत्मरक्षा में प्रतिक्रिया दी। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट में चोट को साधारण प्रकृति का बताया गया था। बाद में स्वतंत्र के एक पॉडकास्ट/वीडियो के सामने आने के बाद विवाद ने फिर जोर पकड़ा।

Swatantra Bail: SC/ST Act में गिरफ्तारी क्यों हुई?

विवाद की शुरुआत में दर्ज शिकायत में SC/ST Act का उल्लेख नहीं था। बाद में शिकायतकर्ता का एक और बयान दर्ज किया गया, जिसमें कथित जातिसूचक टिप्पणी का आरोप सामने आया। इसके बाद मामले में SC/ST Act की धाराएं जोड़ी गईं। यही टाइमलाइन स्वतंत्र के बचाव पक्ष की प्रमुख दलीलों में शामिल रही। पुलिस ने भी कोर्ट में बताया कि शुरुआती शिकायत में जातिसूचक गाली का उल्लेख नहीं था, जबकि बाद के बयान में यह आरोप सामने आया था।

बचाव पक्ष ने इसी आधार पर सवाल उठाया कि घटना के तत्काल बाद दर्ज शिकायत और बाद में लगाए गए आरोपों के बीच अंतर क्यों है। हालांकि, SC/ST Act की धाराएं जोड़ना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मामला झूठा है या कानून का दुरुपयोग हुआ है। इसका अंतिम फैसला जांच और न्यायिक प्रक्रिया में होना है।

कोर्ट में किन बातों पर हुई बहस?

14 सितंबर की सुनवाई में कोर्ट ने विशेष रूप से जातिसूचक टिप्पणी के आरोप को लेकर सवाल किए। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने यह जानना चाहा कि क्या घटना के दौरान स्वतंत्र ने कोई जातिसूचक शब्द इस्तेमाल किया था। पुलिस की ओर से बताया गया कि शुरुआती शिकायत में ऐसी बात दर्ज नहीं थी और बाद में दर्ज बयान में यह आरोप सामने आया।

यही बिंदु बचाव पक्ष के लिए महत्वपूर्ण बन गया। स्वतंत्र के वकील ने तर्क दिया कि घटना अचानक हुई झड़प थी और बाद में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की परिस्थितियों पर सवाल उठते हैं। दूसरी ओर शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि स्वतंत्र ने कथित घटना को लेकर वीडियो में खुद स्वीकार किया है और उन्हें जमानत मिलने पर जांच प्रभावित होने की आशंका हो सकती है।

Swatantra Bail: SC/ST Act के कथित दुरुपयोग का मुद्दा

इस मामले में SC/ST Act के कथित दुरुपयोग को लेकर भी बहस हुई। बचाव पक्ष ने धाराएं बाद में जोड़े जाने की टाइमलाइन को आधार बनाकर सवाल उठाए। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अदालत ने अभी यह अंतिम रूप से नहीं कहा है कि इस मामले में SC/ST Act का दुरुपयोग हुआ है।

कानून का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को जाति आधारित अत्याचार से सुरक्षा देना है। इसलिए किसी मामले में आरोप लगने पर जांच जरूरी है। साथ ही अदालत आरोपों की प्रकृति, शिकायत की टाइमलाइन, उपलब्ध साक्ष्यों और घटना की परिस्थितियों को भी देखती है। इसी कारण इस मामले में भी SC/ST Act से जुड़े आरोपों की न्यायिक जांच आगे जारी रहेगी।

स्वतंत्र को हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत

स्वतंत्र भारद्वाज ने अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का भी रुख किया था। उन्होंने Habeas Corpus याचिका के जरिए अपनी हिरासत को चुनौती दी थी। 7 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। अदालत ने माना कि वह न्यायिक आदेश के तहत हिरासत में हैं और जमानत जैसे राहत के लिए उचित मंच ट्रायल कोर्ट है।

इसके बाद स्वतंत्र ने पटियाला हाउस कोर्ट में जमानत याचिका दायर की। 14 सितंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था। इस सुनवाई में SC/ST Act की धाराओं और कथित जातिसूचक टिप्पणी की टाइमलाइन महत्वपूर्ण मुद्दा रही।

Swatantra Bail: तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत क्यों?

15 सितंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी। यानी कोर्ट ने फिलहाल उन्हें सीमित अवधि के लिए राहत दी है। इसे मामले में पूर्ण बरी होना या आरोप खत्म होना नहीं माना जा सकता।

इस मामले में स्वतंत्र के पक्ष को मजबूत करने वाले प्रमुख बिंदुओं में घटना के बाद की शिकायत की टाइमलाइन, SC/ST Act की धाराओं का बाद में जुड़ना, जातिसूचक टिप्पणी के आरोप को लेकर उठे सवाल और बचाव पक्ष द्वारा आत्मरक्षा का दावा शामिल रहे। दूसरी तरफ शिकायतकर्ता पक्ष ने कथित मारपीट, जातिसूचक टिप्पणी और जांच प्रभावित होने की आशंका को आधार बनाया था।

स्वतंत्र की गिरफ्तारी के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने भी उनके समर्थन में प्रदर्शन किया था और SC/ST Act के कथित गलत इस्तेमाल का आरोप लगाया था। अब तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत के बाद मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। विस्तृत जमानत आदेश सामने आने पर यह और स्पष्ट होगा कि अदालत ने अंतरिम राहत देते समय किन विशेष परिस्थितियों को निर्णायक माना।

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