Spurious liquor tragedy: सागर जहरीली शराब कांड के बाद 2014 बैच के IPS अधिकारी अनुराग सुजानिया फिर चर्चा में हैं। मुरैना में 2021 के जहरीली शराब मामले के दौरान वे एसपी थे, अब सागर में उनकी तैनाती के करीब चार महीने बाद बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतों का मामला सामने आया है। इसी के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने एसपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इन पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हो गई है। कुछ लोग अभी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है। जहरीली शराब कांड के बीच सागर एसपी अनुराग सुजानिया की चर्चा हो रही है। मुरैना में भी इनके कार्यकाल के दौरान जहरीली शराब से 24 लोगों की मौत हुई थी।
सवाल-1: अनुराग सुजानिया कौन हैं और अभी चर्चा में क्यों हैं?
अनुराग सुजानिया 2014 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं। मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले सुजानिया इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से आते हैं। मध्य प्रदेश में पुलिस सेवा के दौरान वे टीकमगढ़, मंदसौर और मुरैना में एसपी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। सागर एसपी बनने से पहले वे पुलिस मुख्यालय में एआईजी प्रशासन के पद पर तैनात थे। सागर में उनकी तैनाती को अभी करीब चार महीने ही हुए थे कि बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से जुड़ा मामला सामने आ गया। घटना के बाद अवैध शराब के नेटवर्क और पुलिस की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे।
Spurious liquor tragedy: सवाल-2: मुरैना में उनके कार्यकाल के दौरान क्या हुआ था?
सुजानिया के पुलिस करियर में मुरैना की पोस्टिंग इसलिए महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि वर्ष 2021 में उनके एसपी रहते जिले में जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद अवैध शराब के कारोबार और पुलिस-प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। मामले में जांच और न्यायिक कार्रवाई आगे बढ़ी। नवंबर 2025 में जौरा की अदालत ने मामले में 14 दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई थी। मुरैना कांड के बाद सुजानिया को एसपी पद से हटाया गया था। इसके बाद वे पुलिस मुख्यालय में तैनात रहे।
सवाल-3: फिर सागर में क्या हुआ?
मुरैना की घटना के करीब पांच साल बाद सुजानिया को सागर का एसपी बनाया गया। उनकी नई पोस्टिंग के कुछ ही महीनों के भीतर बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से जुड़ी घटना ने फिर पुलिसिंग और अवैध शराब के नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में अवैध शराब की गतिविधियों की पुलिस को कितनी जानकारी थी और ऐसे नेटवर्क के खिलाफ पहले से किस स्तर पर कार्रवाई की जा रही थी।
हालांकि, किसी अधिकारी की तैनाती और किसी घटना के बीच सीधे तौर पर जिम्मेदारी तय करना जांच के निष्कर्षों के बिना उचित नहीं होगा। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि सागर मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर जांच क्या निष्कर्ष देती है।
Spurious liquor tragedy: सवाल-4: दिग्विजय सिंह ने क्या आरोप लगाए?
सागर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद एसपी अनुराग सुजानिया पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि एसपी के स्तर से हर महीने करीब 50 से 60 लाख रुपये की अवैध वसूली की जाती है। दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि यदि उनके आरोप गलत हैं तो एसपी उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा कर सकते हैं और वह अदालत में अपने आरोपों को प्रमाणित करेंगे। इन आरोपों को फिलहाल दिग्विजय सिंह के राजनीतिक बयान और आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सवाल-5: क्या पुलिस ने आरोपों का जवाब दिया?
दिग्विजय सिंह के आरोपों के बाद सबसे अहम पहलू पुलिस का आधिकारिक पक्ष है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इन आरोपों पर सागर पुलिस या एसपी अनुराग सुजानिया की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। ऐसे में वसूली के आरोपों को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। यदि इस मामले में कोई विभागीय जांच, आर्थिक अपराध शाखा की जांच या अन्य आधिकारिक कार्रवाई होती है, तो उससे आरोपों की वास्तविकता को लेकर स्थिति ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।
Spurious liquor tragedy: सवाल-6: मुरैना और सागर को जोड़कर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इसी कड़ी को लेकर है। एक ही अधिकारी के करियर में दो अलग-अलग जिलों में जहरीली शराब की घटनाएं सामने आने के कारण राजनीतिक बहस तेज हुई है। मुरैना में 2021 की घटना के समय सुजानिया जिले के एसपी थे। अब सागर में उनकी तैनाती के दौरान जहरीली शराब का मामला सामने आया है। इसी समानता को आधार बनाकर दिग्विजय सिंह ने सरकार और पुलिस प्रशासन से सवाल किए हैं। लेकिन दोनों घटनाओं की परिस्थितियां, पुलिस की कार्रवाई और अधिकारियों की जवाबदेही अलग-अलग हो सकती है। इसलिए दोनों मामलों को जोड़कर अंतिम निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड को देखना जरूरी होगा।

सवाल-7: अब असली जांच किन बिंदुओं पर होगी?
सागर मामले में जांच के दौरान यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अवैध शराब कहां तैयार या सप्लाई की जा रही थी, नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे, पुलिस को इसकी पहले से जानकारी थी या नहीं और शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय हो सकता है कि स्थानीय स्तर पर शराब के अवैध कारोबार को रोकने के लिए पुलिस और आबकारी विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी। यही तथ्य यह तय करने में मदद करेंगे कि घटना केवल अवैध शराब बनाने और बेचने वाले नेटवर्क की आपराधिक गतिविधि थी या कहीं निगरानी और प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर चूक हुई।
Spurious liquor tragedy: फिलहाल तस्वीर क्या है?
सागर जहरीली शराब कांड ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में अवैध शराब के नेटवर्क और पुलिस निगरानी को लेकर बहस छेड़ दी है। अनुराग सुजानिया इसलिए ज्यादा चर्चा में हैं क्योंकि मुरैना में 2021 की जहरीली शराब त्रासदी के समय भी वे जिले के एसपी थे और अब सागर में उनकी तैनाती के दौरान ऐसी ही एक घटना सामने आई है।
दिग्विजय सिंह के गंभीर आरोपों ने इस बहस को राजनीतिक रूप से और तेज कर दिया है। हालांकि, वसूली से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चीज जांच के निष्कर्ष और पुलिस-प्रशासन की आधिकारिक कार्रवाई होगी। उसी से यह स्पष्ट होगा कि सागर की घटना में जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होती है और पुलिस की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब क्या सामने आता है।








