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‘बीमार प्रदेश’ से ‘ग्रोथ इंजन’ तक कैसे पहुंचा यूपी? योगी के दावे में कितना दम, समझिए आंकड़ों की पूरी कहानी

UP POLITICS: उत्तर प्रदेश को कभी देश के उन राज्यों में गिना जाता था, जहां आर्थिक विकास, उद्योग और रोजगार के मोर्चे पर बड़ी चुनौतियां थीं। अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा है कि वही उत्तर प्रदेश ‘बीमार प्रदेश’ की पुरानी छवि से बाहर निकलकर देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बन चुका है। मुख्यमंत्री इसके पीछे निवेश, रोजगार, एमएसएमई, ओडीओपी, औद्योगिक विकास और युवाओं के लिए बढ़ते अवसरों को आधार बताते हैं।

लेकिन सवाल यह है कि योगी के इस दावे को आंकड़े कितना मजबूत करते हैं? यूपी की अर्थव्यवस्था वास्तव में कितनी बढ़ी है, निवेश कितना जमीन पर आया, रोजगार के दावे का आधार क्या है और आगे सबसे बड़ी चुनौती क्या है? आंकड़ों और सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर समझिए पूरी कहानी।

पहले समझिए ‘बीमार प्रदेश’ से क्या मतलब है?

‘बीमारू’ शब्द का इस्तेमाल लंबे समय तक ऐसे राज्यों के लिए किया जाता रहा, जहां आर्थिक विकास की गति अपेक्षाकृत कमजोर, औद्योगिक आधार सीमित और रोजगार व बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियां अधिक मानी जाती थीं। हालांकि आज ‘बीमार प्रदेश’ कोई आधिकारिक आर्थिक श्रेणी नहीं है। इसलिए योगी आदित्यनाथ का यह उल्लेख राज्य की पुरानी आर्थिक छवि और वर्तमान विकास की तुलना के संदर्भ में समझना चाहिए।

UP POLITICS: यूपी की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी हुई?

यहीं से योगी सरकार के दावे को आंकड़ों के साथ समझने की शुरुआत होती है। उत्तर प्रदेश सरकार के बजट दस्तावेज के मुताबिक, राज्य का सकल राज्य घरेलू उत्पाद यानी GSDP 2017-18 में करीब 14.76 लाख करोड़ रुपये था। 2024-25 में यह बढ़कर करीब 29.78 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी मौजूदा कीमतों पर इस अवधि में राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग दोगुना हुआ। सरकार के आंकड़ों में 2024-25 के लिए आर्थिक वृद्धि दर 12.7 प्रतिशत बताई गई है। इससे यह जरूर पता चलता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार में तेज विस्तार हुआ है, हालांकि अलग-अलग स्रोतों में GSDP के अनुमान और आधार वर्ष के कारण आंकड़ों में अंतर हो सकता है।

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में यूपी की हिस्सेदारी कितनी है?

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रदेश की हिस्सेदारी 2020-21 के करीब 8.4 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 8.9 प्रतिशत हुई है। सरकार इसे देश की अर्थव्यवस्था में यूपी की बढ़ती भूमिका के संकेत के तौर पर पेश करती है। यही वह आंकड़ा है, जिसके आधार पर सरकार उत्तर प्रदेश को देश की आर्थिक वृद्धि में बड़ा योगदान देने वाला राज्य बताती है।

UP POLITICS:  क्या निवेश सच में जमीन पर उतरा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया है कि प्रदेश में करीब 15 लाख करोड़ रुपये का निवेश धरातल पर उतर चुका है। यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। किसी कंपनी द्वारा निवेश की घोषणा, एमओयू पर हस्ताक्षर और वास्तविक परियोजना का जमीन पर शुरू होना- तीनों अलग-अलग चरण हैं। यूपी सरकार का Invest UP पोर्टल भी निवेश को तेजी से जमीन पर उतारने और प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन पर लगातार जोर देता रहा है। सितंबर 2026 में सरकार ने जिलावार निवेश लक्ष्य तय करने और निवेश परियोजनाओं के तेज क्रियान्वयन के लिए निवेशक सहायता मजबूत करने की बात भी कही।यानी निवेश की मात्रा के साथ उसकी ग्राउंडिंग और उससे पैदा होने वाले रोजगार को देखना भी उतना ही जरूरी है।

रोजगार के चार करोड़ से ज्यादा अवसर का दावा

मुख्यमंत्री ने एमएसएमई और ओडीओपी जैसी पहलों के जरिए चार करोड़ से अधिक रोजगार सृजित होने का दावा किया है। यह बड़ा आंकड़ा है, लेकिन रोजगार के आंकड़ों को समझते समय यह देखना जरूरी है कि इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार किस तरह शामिल किए गए हैं और आंकड़ा किस अवधि का है। यही वजह है कि रोजगार के सरकारी दावे को समझने के लिए केवल कुल संख्या नहीं, बल्कि नियमित रोजगार, स्वरोजगार, एमएसएमई आधारित रोजगार और श्रम बाजार के स्वतंत्र आंकड़ों को भी साथ देखना जरूरी है।

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UP POLITICS: ODOP ने कैसे बदली स्थानीय अर्थव्यवस्था?

एक जिला, एक उत्पाद यानी ODOP उत्तर प्रदेश की प्रमुख आर्थिक पहलों में शामिल है। इसका उद्देश्य प्रत्येक जिले के खास उत्पाद, शिल्प या स्थानीय उद्योग को पहचान देकर उसे बाजार, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता से जोड़ना है। इस मॉडल का महत्व इसलिए भी है क्योंकि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था सिर्फ बड़े उद्योगों पर निर्भर नहीं है। बड़ी संख्या में छोटे कारोबारी, कारीगर, बुनकर और स्थानीय उत्पादक भी आर्थिक गतिविधि का हिस्सा हैं। सरकार की कोशिश है कि इन स्थानीय उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाए।

‘एक जनपद-एक व्यंजन’ का नया प्रयोग

अब सरकार स्थानीय अर्थव्यवस्था को सिर्फ उत्पादों तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसी क्रम में ‘एक जनपद-एक व्यंजन’ यानी ODoC की पहल सामने आई है। इसका फोकस स्थानीय खान-पान और पारंपरिक व्यंजनों को पहचान दिलाने और उन्हें पर्यटन व स्थानीय कारोबार से जोड़ने पर है। अगर ऐसी पहलें बाजार और पर्यटन से प्रभावी ढंग से जुड़ती हैं, तो इसका असर छोटे कारोबारियों, खाद्य प्रसंस्करण और स्थानीय रोजगार पर पड़ सकता है।

UP POLITICS: उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग पर कितना जोर?

योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की हिस्सेदारी दो लाख करोड़ रुपये से अधिक होने और निवेश के जरिए औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की बात कही है। सरकार का लक्ष्य इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, टेक्सटाइल, डिफेंस, खाद्य प्रसंस्करण और दूसरे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है। हाल के महीनों में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार की ओर से कई पहल की गई हैं। Invest UP के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में तीन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित करने और करीब चार लाख रोजगार अवसर पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है।

युवाओं के लिए क्या बदला?

उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत और चुनौती दोनों उसकी विशाल आबादी है। बड़ी युवा आबादी के लिए रोजगार और आय के पर्याप्त अवसर पैदा करना राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। योगी सरकार का जोर युवाओं को सिर्फ नौकरी तलाशने वाला बनाने के बजाय उद्यमी और रोजगार देने वाला बनाने पर है। इसी दिशा में उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप पॉलिसी-2026 में प्रोटोटाइप ग्रांट, सीड कैपिटल और हाई-ग्रोथ स्टार्टअप के लिए मैचिंग ग्रांट जैसी सहायता का प्रावधान किया गया है। सरकार के स्टार्टअप मिशन के मौजूदा डैशबोर्ड पर हजारों DPIIT-recognised startups और StartupUP से जुड़े स्टार्टअप दर्ज हैं।

UP POLITICS: यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो क्यों अहम है?

ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित होने वाला यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो भी इसी आर्थिक रणनीति का हिस्सा है। 2023 से शुरू हुए इस आयोजन का उद्देश्य यूपी के उत्पादों, कारीगरों, उद्यमियों और निर्माताओं को बड़े खरीदारों, निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है। यानी सरकार का मॉडल केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कोशिश यह है कि उत्पाद बने, बाजार मिले और उससे कमाई तथा रोजगार पैदा हो।

तो क्या यूपी ‘ग्रोथ इंजन’ बन गया?

इस सवाल का जवाब सिर्फ एक आंकड़े से नहीं दिया जा सकता। एक तरफ राज्य सरकार के आंकड़े बताते हैं कि यूपी की अर्थव्यवस्था का आकार तेजी से बढ़ा है। 2017-18 से 2024-25 के बीच GSDP में बड़ा विस्तार हुआ और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में राज्य की हिस्सेदारी भी बढ़ने का सरकारी दावा है। दूसरी तरफ किसी राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत मानने के लिए प्रति व्यक्ति आय, गुणवत्तापूर्ण रोजगार, वास्तविक निवेश, औद्योगिक उत्पादन, निर्यात, उत्पादकता और क्षेत्रीय विकास जैसे संकेतकों को भी देखना जरूरी है। इसलिए ‘ग्रोथ इंजन’ एक राजनीतिक और आर्थिक वर्णन है, जबकि इसकी वास्तविक तस्वीर कई आर्थिक संकेतकों को साथ रखकर ही समझी जा सकती है।

UP POLITICS: सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

यूपी के सामने अगली चुनौती सिर्फ अर्थव्यवस्था का आकार बढ़ाने की नहीं है। असली चुनौती है कि आर्थिक विकास का लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे। इसके लिए स्थायी और गुणवत्तापूर्ण रोजगार, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि, छोटे कारोबारों की उत्पादकता, कौशल विकास, महिला रोजगार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पूर्वांचल-बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में निवेश महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेश का जमीन पर उतरना भी उतना ही जरूरी है जितना निवेश प्रस्ताव हासिल करना।

एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश सरकार लंबे समय से प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखती रही है। इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए केवल बड़े उद्योग या सरकारी निवेश पर्याप्त नहीं होंगे। कृषि, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र, एमएसएमई, निर्यात, स्टार्टअप और मानव संसाधन सभी क्षेत्रों में लगातार वृद्धि जरूरी होगी।

UP POLITICS:  दावा मजबूत करने के लिए अब जमीन के आंकड़े अहम

योगी आदित्यनाथ का ‘बीमार प्रदेश’ से ‘ग्रोथ इंजन’ तक पहुंचने का दावा यूपी की आर्थिक तस्वीर में आए बदलाव को रेखांकित करता है। सरकारी आंकड़ों में GSDP, आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी बढ़ने की तस्वीर दिखाई देती है। लेकिन इस दावे की पूरी तस्वीर तभी सामने आएगी जब निवेश के साथ वास्तविक रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, औद्योगिक उत्पादन और लोगों की आय में बदलाव को भी देखा जाए।

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