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जहां कैमरा तोड़ा था, वहीं फिर पहुंचे अभिषेक शांडिल्य मुर्शिदाबाद से फिर उठेंगे वे सवाल, जिन्हें भीड़ ने दबाने की कोशिश की थी जहां था ममता सरकार का आतंक

Abhishek Shandilya:

Abhishek Shandilya: कुछ जगहें सिर्फ नक्शे पर दर्ज नहीं होतीं, वे अपने भीतर सवालों का पूरा इतिहास समेटे होती हैं। मुर्शिदाबाद भी ऐसी ही एक जगह है। करीब दस महीने पहले यहां रिपोर्टिंग करने पहुंचे पत्रकार अभिषेक शांडिल्य और उनके सहयोगी आदित्य मिश्रा के साथ जो हुआ, उसने पत्रकारिता और कानून-व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

Abhishek Shandilya: 27 दिसंबर 2025… जब हुई बदसलूकी-

27 दिसंबर 2025 को अभिषेक शांडिल्य अपनी टीम के साथ मुर्शिदाबाद में ग्राउंड रिपोर्ट करने पहुंचे थे। मकसद था जमीन पर जाकर हालात को समझना, लोगों से बात करना और उन सवालों के जवाब तलाशना, जो लगातार चर्चा में थे। रिपोर्टिंग के दौरान टीम के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, भीड़ ने अभिषेक शांडिल्य और उनके सहयोगी आदित्य मिश्रा को घेर लिया। अभिषेक को प्लास्टिक की पाइप से बांधने की कोशिश किए जाने और दोनों का कैमरा-माइक समेत करीब चार लाख रुपये का सामान छीने जाने के आरोप भी सामने आए। पुलिस ने बाद में दोनों को वहां से निकालकर थाने पहुंचाया। करीब 40-45 मिनट की रिपोर्टिंग में जुटाया गया वह फुटेज भी टीम के हाथ से चला गया, जिसमें मौके के हालात रिकॉर्ड किए गए थे। कैमरा छिन गया, माइक छिन गया, रिपोर्ट अधूरी रह गई… लेकिन अभिषेक शांडिल्य का हौसला नहीं टूटा। किसी पत्रकार की आवाज को रोकने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन सवालों को हमेशा के लिए खत्म नहीं किया जा सकता।

Abhishek Shandilya: मुर्शिदाबाद में तब क्या हो रहा था-

Abhishek Shandilya
[Abhishek Shandilya]
यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया, जब मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में तत्कालीन निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद की तर्ज पर मस्जिद बनाने की घोषणा और बाद में आधारशिला रखे जाने को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा था। 6 दिसंबर 2025 को आधारशिला रखे जाने की रिपोर्ट सामने आई थी।  इसी दौरान पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे। मुर्शिदाबाद में इससे पहले और बाद में विरोध-प्रदर्शन कवर कर रहे अन्य पत्रकारों पर हमलों की खबरें भी सामने आईं।

दस महीने बाद… कैमरा फिर हाथ में है-
Abhishek Shandilya
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समय बीत गया। हालात बदले। सत्ता बदली। लेकिन अभिषेक शांडिल्य ने उस घटना को वहीं छोड़ देने का फैसला नहीं किया। करीब दस महीने बाद वही पत्रकार फिर उसी जमीन पर पहुंच गया है। मुर्शिदाबाद वही बसा हुआ है सड़के वही है इलाका भी वही है लेकिन इस बार हाथ में फिर कैमरा है और सामने फिर वही सवाल। जिस जगह से पिछली बार रिपोर्ट अधूरी छोड़कर निकलना पड़ा था, उसी जगह से अब कहानी को आगे बढ़ाया जाएगा। जिन लोगों ने अभिषेक का कैमरा छीन लिया था, वे उनका हौसला नहीं छीन पाए।

मुर्शिदाबाद से ग्राउंड रिपोर्ट जल्द-

अभिषेक शांडिल्य एक बार फिर मुर्शिदाबाद पहुंच चुके हैं। इस बार कहानी सिर्फ उस हमले की नहीं होगी, बल्कि उसके बाद बदली जमीन की होगी। इस बार अभिषेक अकेले नहीं है उनके साथ है खबर इंडिया, हेडलाइंस इंडिया औ एनएफएम न्यूज जैसे मीडिया प्लेटफॉर्म भी साथ है जो मुर्शिदाबाद की जमीन पर पहुंचकर वहां के मौजूदा हालात को सामने लाने की कोशिश करेंगे

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