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उज्जैन शाही मस्जिद विवाद: सड़क चौड़ीकरण के लिए हिस्सा क्यों हटाया जा रहा? हाईकोर्ट से खड़े हनुमान मंदिर तक समझिए पूरा मामला

Ujjain Shahi Masjid Dispute: उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर शाही मस्जिद का मामला विवाद में है। मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध, पथराव और पुलिस की कार्रवाई तक स्थिति पहुंच गई। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा, जहां मस्जिद पक्ष की अपील पर सुनवाई हुई। अब करीब 3 फीट हिस्सा हटाने और मीनार को शिफ्ट करने समेत कुछ शर्तों पर सहमति की बात सामने आई है। लेकिन पूरा विवाद क्या है, मस्जिद का हिस्सा क्यों हटाया जा रहा है और इसी सड़क पर खड़े हनुमान मंदिर समेत दूसरे धार्मिक स्थलों के साथ क्या हुआ? पढ़िए पूरा एक्सप्लेनर।

समझिए पूरा मामला

उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के तहत प्रमुख सड़कों को चौड़ा करने की योजना पर काम चल रहा है। इसी क्रम में कोयला फाटक से कंठाल चौराहा, सती गेट होते हुए गोपाल मंदिर की ओर जाने वाले मार्ग के कुछ हिस्से को चौड़ा किया जा रहा है। प्रस्तावित सड़क की सीमा में कई मकान, दुकानें और धार्मिक स्थल प्रभावित हो रहे हैं। शाही मस्जिद का भी एक हिस्सा इसी दायरे में बताया गया है।

मामला तब ज्यादा चर्चा में आया, जब 28 सितंबर को मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। मस्जिद से जुड़े कुछ लोगों ने खुद निर्माण हटाना शुरू किया। इसी दौरान कार्रवाई का विरोध करने वाला दूसरा गुट सामने आया। पुलिस के मुताबिक स्थिति बिगड़ने पर पथराव हुआ, जिसके बाद आंसू गैस के गोले छोड़े गए और पुलिस ने बल प्रयोग किया। अब इस पूरे विवाद को समझने के लिए इसे चार हिस्सों में देखना जरूरी है- सड़क चौड़ीकरण, मस्जिद पक्ष की आपत्ति, हाईकोर्ट की कार्रवाई और इसी सड़क पर दूसरे धार्मिक स्थलों पर हुई कार्रवाई।

Ujjain Shahi Masjid Dispute: सवाल 1: शाही मस्जिद का हिस्सा क्यों हटाया जा रहा है?

जवाब: सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण सबसे पहले यह साफ कर दें कि कार्रवाई पूरी शाही मस्जिद को हटाने की नहीं है। विवाद मस्जिद के उस हिस्से को लेकर है, जो प्रस्तावित सड़क की सीमा में आ रहा है। प्रशासन और नगर निगम के मुताबिक सिंहस्थ-2028 तथा उज्जैन में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की भारी आवाजाही को देखते हुए प्रमुख मार्गों को चौड़ा किया जा रहा है। जिस मार्ग पर शाही मस्जिद स्थित है, उसे करीब 15 मीटर चौड़ा करने की योजना बताई गई है। इस सड़क का संबंध शहर के प्रमुख धार्मिक और बाजार क्षेत्रों से है। नगर निगम का तर्क है कि सड़क की निर्धारित चौड़ाई हासिल करने के लिए रास्ते की सीमा में आने वाले निर्माणों को हटाना जरूरी है। इसी कार्रवाई के दायरे में शाही मस्जिद का एक हिस्सा भी आया है।

मस्जिद का कितना हिस्सा हटेगा?

इसको लेकर अलग-अलग चरणों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। शुरुआती कार्रवाई के दौरान करीब 9 फीट या उससे अधिक हिस्से को हटाने की चर्चा हुई थी। बाद में हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान सामने आई सहमति में करीब 3 फीट हिस्सा हटाने की बात कही गई। मस्जिद पक्ष की याचिका में जमातखाना, मीनार और मस्जिद से जुड़े अन्य हिस्सों के प्रभावित होने की आपत्ति भी उठाई गई थी। इसलिए पूरे मामले में यह अंतर समझना जरूरी है कि प्रारंभिक प्रस्ताव और बाद में सामने आई सहमति में हटाए जाने वाले हिस्से की स्थिति अलग रही।

Ujjain Shahi Masjid Dispute: सवाल 2: मामला सड़क से हाईकोर्ट तक कैसे पहुंचा?

जवाब: नगर निगम के नोटिस के बाद मस्जिद पक्ष अदालत पहुंचा सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई को लेकर नगर निगम की ओर से मस्जिद प्रबंधन को नोटिस दिए गए। मस्जिद पक्ष ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए अदालत का रुख किया। पक्ष की ओर से मस्जिद के पुराने होने, उससे जुड़े दस्तावेज और धार्मिक महत्व का हवाला दिया गया। मामले की सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ में हुई।

9 सितंबर को हाईकोर्ट ने क्या कहा?

9 सितंबर को एकलपीठ ने मस्जिद पक्ष की याचिकाएं खारिज कर दीं। इसके बाद इस फैसले को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी गई। मस्जिद पक्ष की ओर से यह तर्क रखा गया कि निर्माण पुराना है और सड़क का अलाइनमेंट बदलकर मस्जिद को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है। वहीं नगर निगम की ओर से सड़क चौड़ीकरण को शहर की विकास योजना और सिंहस्थ की तैयारियों से जुड़ी आवश्यकता बताया गया। एकलपीठ के आदेश में यह भी सामने आया कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई केवल एक धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है।

Ujjain Shahi Masjid Dispute: सवाल 3: 28 सितंबर को मस्जिद के बाहर इतना तनाव क्यों हुआ?

जवाब: 28 सितंबर की सुबह मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम शुरू हुआ। जिसके बाद से कार्रवाई का विरोध शुरू हो गया। प्रशासन और मस्जिद से जुड़े पक्ष के बीच पहले यह सहमति बनने की बात सामने आई थी कि मशीन से तोड़फोड़ करने के बजाय मस्जिद कमेटी खुद प्रभावित हिस्सा हटाएगी। इसके बाद मस्जिद से जुड़े कुछ लोग मौके पर पहुंचे और हथौड़े से प्रभावित निर्माण को हटाना शुरू किया। इसी दौरान कार्रवाई का विरोध करने वाला दूसरा गुट भी वहां पहुंच गया। पुलिस के मुताबिक बैरिकेडिंग के आगे बढ़ने और पथराव की स्थिति बनने के बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।इस दौरान क्राइम ब्रांच की महिला टीआई पुष्पा पांचाल के घायल होने की जानकारी सामने आई। मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और कुछ लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई। एहतियात के तौर पर इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

सवाल 4: हाईकोर्ट में आखिर क्या हुआ?

जवाब:  28 सितंबर को मामले की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति की शर्तें बताई गईं। अदालत ने नगर निगम की ओर से दिए गए आश्वासनों को रिकॉर्ड पर लिया और अपील का निराकरण किया। सामने आई शर्तों के मुताबिक- शाही मस्जिद का करीब 3 फीट हिस्सा हटाया जाएगा। प्रभावित दुकानों को मस्जिद कमेटी की ओर से हटाया जाएगा। दुकानदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की बात कही गई। मस्जिद की बड़ी मीनार को दूसरी ओर शिफ्ट करने की बात सामने आई। हटाए जाने वाले हिस्से के लिए क्षतिपूर्ति दिए जाने की बात कही गई। मस्जिद पक्ष के अनुसार प्रभावित हिस्से के बदले FAR और TDR का लाभ दिए जाने की बात भी सामने आई। हालांकि, समझौते की इन शर्तों में से कुछ बातें मस्जिद पक्ष के वकील की ओर से अदालत में बताई गईं। इसलिए इन्हें संबंधित पक्ष की ओर से सामने रखी गई शर्तों के रूप में समझना जरूरी है।

Ujjain Shahi Masjid Dispute
                                                                        Ujjain Shahi Masjid Dispute
Ujjain Shahi Masjid Dispute: FAR और TDR का मतलब क्या है?

FAR यानी Floor Area Ratio। आसान भाषा में यह बताता है कि किसी भूखंड के क्षेत्रफल के मुकाबले वहां कुल कितना निर्माण किया जा सकता है। TDR यानी Transferable Development Rights। इसके तहत प्रभावित जमीन या निर्माण अधिकार के बदले कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त निर्माण अधिकार दूसरी जगह इस्तेमाल करने की व्यवस्था होती है।

सवाल 5: मस्जिद पक्ष की मुख्य आपत्ति क्या है?

मस्जिद कमेटी और वक्फ से जुड़े पक्ष ने मस्जिद की पुरातनता और उससे जुड़े दस्तावेजों का हवाला दिया। मस्जिद पक्ष की ओर से 1925 के सिंधिया राजघराने से जुड़े दस्तावेज, 1975 में सड़क के लिए जमीन दिए जाने और 1985 के राजपत्र में मस्जिद के उल्लेख का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, ये मस्जिद पक्ष की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और दावे हैं। इन्हें अदालत द्वारा प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा। पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि सड़क का अलाइनमेंट बदला जा सकता है, जिससे मस्जिद का हिस्सा प्रभावित न हो। मस्जिद पक्ष ने धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक अधिकारों का भी हवाला दिया था।

Ujjain Shahi Masjid Dispute: सवाल 6: प्रशासन सड़क चौड़ीकरण को जरूरी क्यों बता रहा है?

प्रशासन का मुख्य तर्क सिंहस्थ-2028 और उज्जैन में होने वाले बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात प्रबंधन से जुड़ा है। प्रशासन के मुताबिक सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर भीड़ और जाम की स्थिति से बचने के लिए सड़क चौड़ीकरण जरूरी है।नगर निगम का कहना है कि कार्रवाई केवल शाही मस्जिद को लेकर नहीं है। सड़क की निर्धारित सीमा में आने वाले अन्य मकान, दुकान और धार्मिक निर्माण भी इस प्रक्रिया में प्रभावित हो रहे हैं।

सवाल 7: क्या सिर्फ शाही मस्जिद पर ही कार्रवाई हुई?

जवाब: नहीं, इसी सड़क पर दूसरे धार्मिक स्थल भी प्रभावित हुए हैं। नगर निगम की ओर से अदालत में बताया गया था कि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में पहले भी कई धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्से हटाए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक इसी मार्ग पर मंदिर और मस्जिद समेत कई धार्मिक निर्माण सड़क की जद में आए हैं। यही वजह है कि पूरे विवाद को केवल शाही मस्जिद तक सीमित करके देखना अधूरा होगा। सड़क चौड़ीकरण की पूरी प्रक्रिया में प्रभावित होने वाले अन्य निर्माणों को भी साथ देखना जरूरी है।

Ujjain Shahi Masjid Dispute
                           Ujjain Shahi Masjid Dispute
Ujjain Shahi Masjid Dispute: सवाल 8: खड़े हनुमान मंदिर का क्या हुआ?

जिस सड़क पर शाही मस्जिद का हिस्सा प्रभावित हो रहा है, उसी मार्ग पर खड़े हनुमान मंदिर भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आया। बड़ा सराफा क्षेत्र में स्थित इस मंदिर के ढांचे और चारदीवारी को हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। मंदिर को दूसरी जगह शिफ्ट करने की योजना बताई गई है। इस मामले का जिक्र इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलती है कि सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में धार्मिक स्थल भी प्रभावित हुए हैं।

सवाल 9: क्या दूसरी मस्जिद का हिस्सा भी हटाया गया?

जवाब: हां, हुसामी मस्जिद भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आई है। इसी मार्ग पर बोहरा समाज की हुसामी मस्जिद का हिस्सा भी प्रस्तावित सड़क की सीमा में आया। रिपोर्टों के मुताबिक मस्जिद का करीब 8.5 फीट हिस्सा और उससे जुड़ी कुछ दुकानें प्रभावित हुईं। समाज की ओर से आपसी सहमति से प्रभावित हिस्सा हटाए जाने की बात सामने आई। प्रशासन का तर्क है कि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में सभी प्रभावित निर्माणों को उनकी स्थिति और सड़क की निर्धारित सीमा के हिसाब से देखा जा रहा है।

Ujjain Shahi Masjid Dispute: सवाल 10: मुख्यमंत्री का पैतृक मकान भी इस योजना की जद में है?

रिपोर्टों के मुताबिक मुख्यमंत्री मोहन यादव का पैतृक मकान भी सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित होने वाले निर्माणों में शामिल है। रविवार को मुख्यमंत्री ने अपने पैतृक मकान के प्रभावित हिस्से को हटाने की शुरुआत खुद की थी। रिपोर्टों में मकान के करीब 2.30 मीटर हिस्से के प्रभावित होने की बात कही गई है। इसके अलावा मुख्यमंत्री की बहन और नगर निगम सभापति कलावती यादव का मकान भी सड़क चौड़ीकरण की जद में आने की जानकारी सामने आई है।

मस्जिद को लेकर ही इतना बड़ा क्यों हुआ?

पूरे मामले को समझने के लिए तीन बातें अलग-अलग देखनी होंगी।

1. सड़क चौड़ीकरण

प्रशासन इसे सिंहस्थ-2028 और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान यातायात व्यवस्था से जोड़ रहा है। सड़क की निर्धारित चौड़ाई के लिए रास्ते में आने वाले निर्माणों को हटाया जा रहा है।

2. धार्मिक स्थल

इस सड़क पर सामान्य मकान-दुकानों के साथ मंदिर और मस्जिद जैसे धार्मिक स्थल भी हैं। इसलिए कार्रवाई का मुद्दा संवेदनशील हो गया है।

3. कानूनी विवाद

शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को लेकर मस्जिद पक्ष अदालत पहुंचा। पहले एकलपीठ में याचिका खारिज हुई और फिर मामला डिवीजन बेंच तक गया। आखिरकार 28 सितंबर की सुनवाई में दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति की शर्तें अदालत के सामने रखी गईं और करीब 3 फीट हिस्सा हटाने की बात सामने आई।

Ujjain Shahi Masjid Dispute: अब आगे क्या होगा?

हाईकोर्ट में कार्रवाई पर रोक नहीं मिलने के बाद सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने, मीनार को दूसरी ओर शिफ्ट करने और प्रभावित दुकानों के संबंध में बनी शर्तों के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जानी है। हालांकि, पूरे मामले में कानून-व्यवस्था सबसे अहम पहलू बनी हुई है। 28 सितंबर को पथराव और पुलिस कार्रवाई के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई थी। आगे प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती होगी- सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और साथ ही इलाके में शांति बनाए रखना।

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