Akhilesh Yadav: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी के तीसरे उम्मीदवार के नाम पर सस्पेंस बना हुआ है। पार्टी ने दो उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं, जबकि तीसरे प्रत्याशी को लेकर अलग-अलग सामाजिक समीकरणों पर मंथन चल रहा है। चर्चा में दलित, मुस्लिम और ब्राह्मण चेहरे के साथ-साथ पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी के नाम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में तीसरे टिकट का फैसला सपा की राजनीतिक रणनीति और सामाजिक प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दो उम्मीदवारों के बाद तीसरे नाम की तलाश
समाजवादी पार्टी ने प्रो. रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया है। दोनों नामांकन भी दाखिल कर चुके हैं। अब तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा जारी है। सपा नेताओं के बयानों से संकेत मिले हैं कि पार्टी ऐसा चेहरा तलाश रही है, जो उसके PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण के अनुरूप हो।
Akhilesh Yadav: आलोक रंजन का नाम फिर चर्चा में
तीसरे उम्मीदवार के तौर पर पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का नाम भी चर्चा में है। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव में भी सपा ने उन्हें तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा था, हालांकि वे चुनाव जीत नहीं सके थे। उस समय सपा विधायकों की क्रॉस वोटिंग का मामला भी सामने आया था। अब एक बार फिर उनका नाम चर्चा में आने से सपा की रणनीति को लेकर अटकलें तेज हैं।
सलीम शेरवानी की दावेदारी
पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल है। माना जा रहा है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने राज्यसभा चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। अगर मुस्लिम चेहरे को प्राथमिकता दी जाती है तो शेरवानी प्रमुख विकल्पों में हो सकते हैं। इससे पार्टी के मुस्लिम प्रतिनिधित्व को लेकर भी राजनीतिक संदेश जा सकता है।
Akhilesh Yadav: दलित चेहरे पर भी नजर
तीसरे उम्मीदवार के चयन में दलित समीकरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सपा पिछले कुछ समय से PDA रणनीति के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को अपने राजनीतिक आधार से जोड़ने पर जोर देती रही है। ऐसे में किसी प्रमुख दलित चेहरे को राज्यसभा भेजने का फैसला इसी रणनीति के अनुरूप माना जा सकता है। ब्राह्मण चेहरे को लेकर भी चर्चा है, इसलिए अंतिम फैसला कई सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर होने की संभावना है।
तीसरी सीट के लिए वोटों का गणित
राज्यसभा चुनाव में एक उम्मीदवार को जीत के लिए निर्धारित संख्या में प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होती है। सपा के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या मानी जा रही है, जबकि तीसरी सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना चुनौती है। पार्टी के कुछ नेताओं ने तीसरी सीट जीतने का दावा किया है। ऐसे में उम्मीदवार के चयन के साथ उन विधायकों के समर्थन का गणित भी अहम होगा, जिनके वोट तीसरी सीट के परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
Akhilesh Yadav: 2027 से पहले बड़ा राजनीतिक संदेश
राज्यसभा उम्मीदवार का फैसला ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी धीरे-धीरे तेज हो रही है। इसलिए तीसरे उम्मीदवार का सामाजिक आधार पार्टी के लिए महत्वपूर्ण संदेश दे सकता है। दलित, मुस्लिम, पिछड़ा या ब्राह्मण—किस चेहरे पर अंतिम दांव लगाया जाता है, इससे सपा की प्राथमिकताओं और सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति का संकेत मिलेगा। फिलहाल सभी की नजर अखिलेश यादव के अंतिम फैसले पर टिकी है।









