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अयोध्या पहुंचे अखिलेश, लेकिन राम मंदिर नहीं, क्या है दिक्कत? बाबरी विवाद से रामलला के मंदिर तक सपा की पूरी सियासत समझिए

Akhilesh Ayodhya: अयोध्या पहुंचे अखिलेश, राम मंदिर नहीं, क्या है वजह?

Akhilesh Ayodhya: अयोध्या एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत के केंद्र में है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव 8 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचे। उनका कार्यक्रम पूर्व मंत्री और सपा नेता तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने का था। उनके तय कार्यक्रम में राम मंदिर दर्शन शामिल नहीं था। हालांकि, सपा की ओर से कहा गया है कि नवंबर में अखिलेश यादव राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन कर सकते हैं।

अयोध्या पहुंचे अखिलेश, राम मंदिर क्यों नहीं गए?

अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा धार्मिक आयोजन से जुड़ा था। वह पवन पांडेय के यहां आयोजित भागवत कथा के समापन कार्यक्रम में शामिल हुए। रिपोर्टों के मुताबिक उनके कार्यक्रम में राम मंदिर जाने का उल्लेख नहीं था। सपा के स्थानीय पदाधिकारियों ने कहा कि रामलला के दर्शन से कोई परहेज नहीं है और नवंबर में मंदिर जाने की योजना है। अखिलेश के राम मंदिर नहीं जाने को लेकर बीजेपी नेताओं ने सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर सपा ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने पर आपत्ति जताई है।

Akhilesh Ayodhya: बाबरी विवाद से जुड़ी सपा की पुरानी सियासत

अयोध्या की राजनीति में समाजवादी पार्टी का नाम लंबे समय से बाबरी मस्जिद विवाद के संदर्भ में लिया जाता रहा है। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद अयोध्या का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति के सबसे बड़े विवादों में शामिल हो गया। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में भी 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचे के विध्वंस और उसके बाद देशभर में हुए गंभीर कानून-व्यवस्था के प्रभाव का उल्लेख है। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर और अयोध्या लगातार बड़े चुनावी मुद्दे बने रहे। इसी वजह से सपा और उसके पुराने राजनीतिक रुख को लेकर बीजेपी की ओर से समय-समय पर सवाल उठाए जाते रहे हैं।

मुलायम सरकार और कारसेवकों पर गोलीकांड की चर्चा

अयोध्या विवाद में 1990 का दौर भी समाजवादी पार्टी की राजनीतिक छवि से जोड़ा जाता है। उस समय मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे और अयोध्या में कारसेवकों को रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई हुई थी। इसी घटना को बीजेपी लंबे समय से सपा के खिलाफ राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाती रही है। आज भी बीजेपी नेता अखिलेश यादव और सपा पर हमला करते समय मुलायम सिंह यादव के उस दौर की सरकार और अयोध्या की घटनाओं का उल्लेख करते हैं। 8 अक्टूबर को अखिलेश के अयोध्या दौरे के दौरान भी बीजेपी नेताओं ने इसी पुराने राजनीतिक संदर्भ को सामने रखा।

Akhilesh Ayodhya: राम मंदिर बना तो बदला अयोध्या का राजनीतिक संदर्भ

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाया। इसके बाद राम जन्मभूमि स्थल पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ और 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इसके साथ अयोध्या की राजनीति का संदर्भ भी बदल गया। जहां पहले राम मंदिर निर्माण को लेकर आंदोलन और विवाद चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा था, वहीं अब मंदिर का निर्माण और रामलला के दर्शन भी राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। इसी पृष्ठभूमि में किसी बड़े राजनीतिक नेता का अयोध्या आना और राम मंदिर जाना या नहीं जाना चर्चा में आ जाता है।

अखिलेश की अयोध्या राजनीति में पवन पांडेय भी अहम

अखिलेश यादव का मौजूदा अयोध्या दौरा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है। जिस कार्यक्रम में वह शामिल हुए, उसका आयोजन सपा नेता पवन पांडेय ने किया है। समाजवादी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अयोध्या सीट से पवन पांडेय को उम्मीदवार घोषित किया है। ऐसे में अखिलेश का उनके कार्यक्रम में पहुंचना पार्टी की चुनावी गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ है। यानी अयोध्या में एक तरफ धार्मिक आयोजन है, तो दूसरी तरफ 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी चल रही हैं।

Akhilesh Ayodhya: राम मंदिर पर अखिलेश का रुख क्या है?

अखिलेश यादव पहले भी राम मंदिर जाने के सवाल पर अपनी बात रख चुके हैं। जून 2026 में उन्होंने कहा था कि वह राम मंदिर दर्शन के लिए जाएंगे और बाद में इटावा में केदारेश्वर मंदिर का काम पूरा होने के बाद राम मंदिर जाने की बात भी कही थी। फिलहाल 8 अक्टूबर के उनके अयोध्या कार्यक्रम में राम मंदिर दर्शन शामिल नहीं रहा। सपा की ओर से नवंबर में रामलला और हनुमानगढ़ी के दर्शन की बात कही गई है। ऐसे में अखिलेश के अयोध्या दौरे के साथ बाबरी विवाद, मुलायम सिंह यादव के दौर की अयोध्या की राजनीति और मौजूदा राम मंदिर तीनों संदर्भ एक बार फिर राजनीतिक चर्चा में हैं।

 

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