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नशे के खिलाफ अमित शाह का 2029 मिशन कितना बड़ा? सरकार क्यों खत्म करना चाहती है ड्रग्स का नेटवर्क, क्या है पूरा रोडमैप

Amit Shah

Amit Shah: भारत में ड्रग्स के खिलाफ चल रही मुहिम को अब एक तय समयसीमा और व्यापक रणनीति से जोड़ दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक देश से ड्रग्स के कारोबार ‘को खत्म करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 2026 से 2029 तक का विजन डॉक्यूमेंट तैयार किया गया है। इसमें सिर्फ नशीले पदार्थों की जब्ती और तस्करों की गिरफ्तारी पर जोर नहीं है, बल्कि उत्पादन, तस्करी, फंडिंग, स्थानीय सप्लाई, डिजिटल नेटवर्क और नशे की मांग को कम करने की रणनीति भी शामिल है।

2029 तक ड्रग्स खत्म करने का लक्ष्य क्यों?

सरकार ड्रग्स की समस्या को सिर्फ कानून-व्यवस्था का विषय नहीं मान रही है। इसे युवाओं, समाज और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। यही वजह है कि अब कार्रवाई का फोकस केवल ड्रग्स की खेप पकड़ने तक सीमित रखने के बजाय उस पूरे नेटवर्क को तोड़ने पर है, जो नशीले पदार्थों के उत्पादन से लेकर उनकी सप्लाई और बिक्री तक काम करता है।

Amit Shah: क्या है 2026-29 का रोडमैप?

सरकार की नई रणनीति चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। इनमें इंटेलिजेंस और ऑपरेशन आधारित कार्रवाई, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण, नशे की मांग कम करना और पुनर्वास तथा एजेंसियों की क्षमता बढ़ाना और बेहतर समन्वय शामिल है। इस पूरी रणनीति के तहत 100 से ज्यादा लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, ताकि 2029 तक अभियान को परिणाम आधारित बनाया जा सके।

ड्रग्स के पूरे नेटवर्क पर कैसे होगा वार?

रणनीति में ड्रग्स के नेटवर्क को अलग-अलग स्तरों पर निशाना बनाने की तैयारी है। इसमें देश में ड्रग्स की एंट्री, राज्यों के बीच उसका ट्रांजिट और जिलों में स्थानीय सप्लाई शामिल है। जिलों को भी उनकी भूमिका के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर रणनीति तैयार करने की योजना है। इससे जिस इलाके में उत्पादन या तस्करी ज्यादा है, वहां उसी हिसाब से कार्रवाई की जा सकेगी।

Amit Shah: पैसे और डिजिटल नेटवर्क पर भी नजर

ड्रग्स के कारोबार को खत्म करने के लिए उसके आर्थिक और डिजिटल नेटवर्क तक पहुंचना भी जरूरी माना गया है। इसलिए तस्करों की कमाई, वित्तीय लेनदेन और उससे जुड़े नेटवर्क की जांच पर जोर दिया जा रहा है। डार्कनेट, क्रिप्टोकरेंसी और दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए होने वाली तस्करी से निपटने के लिए तकनीकी और फॉरेंसिक क्षमता मजबूत करने की भी योजना है।

युवाओं को नशे से दूर रखने की तैयारी

सरकार की रणनीति में सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि नशे की मांग कम करना और जागरूकता बढ़ाना भी शामिल है। इसके लिए एक लाख ‘नशामुक्त मित्र’ तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। अभियान को स्कूलों, कॉलेजों और दूसरे शिक्षण संस्थानों तक ले जाने की योजना है। इसका उद्देश्य युवाओं को नशे के खतरों के प्रति जागरूक करना और समाज को इस अभियान से जोड़ना है।

Amit Shah: क्या 2029 तक लक्ष्य हासिल हो पाएगा?

2029 का लक्ष्य हासिल करने के लिए केंद्र के साथ राज्यों, पुलिस, प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्यों और जिलों को भी अपने स्तर पर रोडमैप तैयार करने पर जोर दिया गया है। ऐसे में इस मिशन की सफलता सिर्फ कितनी ड्रग्स जब्त हुई या कितनी गिरफ्तारियां हुईं, इससे नहीं मापी जाएगी। असली चुनौती पूरे तस्करी नेटवर्क को तोड़ने, नशे की मांग घटाने, युवाओं को इससे दूर रखने और प्रभावित लोगों के पुनर्वास की होगी।

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