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उत्तराखंड में क्यों हो रहे हैं हेलीकॉप्टर हादसे? यूँ क्रैश हुआ बदरीनाथ धाम से लौट रहा हेलीकॉप्टर …

Badrinath helicopter accident: उत्तराखंड में क्यों हो रहे हैं हेलीकॉप्टर हादसे? यूँ क्रैश हुआ बदरीनाथ धाम से लौट रहा हेलीकॉप्टर ...
Badrinath helicopter accident: उत्तराखंड में क्यों हो रहे हैं हेलीकॉप्टर हादसे? यूँ क्रैश हुआ बदरीनाथ धाम से लौट रहा हेलीकॉप्टर ...
Badrinath helicopter accident: उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ के पास बद्रीनाथ से देहरादून लौट रहा एक हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया, जिसमें पायलट समेत 6 लोगों के मारे जाने जाने की आशंका जताई जा रही है।हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन कम्पनी का बताया जा रहा है। खास बात यह है कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों खासकर केदारघाटी और चमोली जिले में 13 से अधिक बड़ी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।इसके बावजूद सबक लेने की जरूरत क्यों महसूस नहीं की जा रही है? 

खराब मौसम में उड़ान भरने का जोखिम क्यों?

जानकारों के मुताबिक उत्तराखंड में बार-बार होने वाले हेलीकॉप्टर हादसों के पीछे खराब मौसम, चुनौतीपूर्ण पहाड़ी भूगोल और बुनियादी ढांचे की कमी जैसे प्रमुख कारण हैं। राज्य के पहाड़ी इलाकों जैसे कि केदारनाथ और जोशीमठ घाटी में मौसम बेहद तेजी से बदलता है। अचानक कोहरा छा जाना, भारी बारिश और कम विजिबिलिटी (दृश्यता) के कारण पायलट को रास्ता और संतुलन बनाए रखने में दिक्कत आती है।
फिर उत्तराखंड का पहाड़ी भू-भाग बहुत बीहड़ और संकरा है। ऊंची चट्टानें, गहरी खाइयाँ और लैंडिंग के लिए सीमित व जोखिम भरे हेलीपैड होने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। सवाल यह है कि इतना सबकुछ जानने और इस वक्त देशभर में मौसम खराब होने के बावजूद वहाँ हेलीकॉप्टर उड़ाना क्या जरूरी था? क्या खराब मौसम में वहाँ हवाई सेवाओं को टाला नहीं जा सकता है?

सुरक्षा मानकों की अनदेखी तो नहीं?

राज्य के आम लोगों को कहते सुना जा सकता है कि चारधाम यात्रा के दौरान हवाई सेवाओं की भारी मांग रहती है। ऐसे में  हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता कंपनियों का पूरा जोर कम समय में ज्यादा फेरे लगाकर व्यावसायिक हित साधने का होता है।व्यावसायिक दबाव के कारण वे सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर जाती हैं। यही कारण है कि राज्य में हवाई दुर्घटनाएं होती आ रही हैं। जानकारों के अनुसार लगातार उड़ान भरने से हेलीकॉप्टरों में तकनीकी या मेंटेनेंस संबंधी समस्याएं आ जाती हैं। इसके साथ ही केदारघाटी और अन्य चारधाम मार्गों पर कई जगह एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और आधुनिक रडार सिस्टम का पर्याप्त नेटवर्क नहीं है, जिससे हवा में सही स्थिति और मध्यम-वायु समर्थन (mid-air support) की कमी रहती है।

Badrinath helicopter accident: कुछ बड़ी हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं

पिछले 15 वर्षों में केवल केदारघाटी में ही करीब 13 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 41 से अधिक लोगों की मौत हुई है। 15 जून 2025 को केदारनाथ से गुप्तकाशी जा रहा आर्यन एविएशन का हेलीकॉप्टर गौरीकुंड के पास क्रैश हो गया था, जिसमें पायलट समेत 7 लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 8 मई 2025 को उत्तरकाशी (गंगनानी के पास) हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई थी। अक्टूबर 2022 को केदारनाथ के पास हेलीकॉप्टर क्रैश में 7 लोगों की मौत हुई थी।