BJP-Akali Dal Alliance: शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर BJP और अकाली दल के संभावित गठबंधन की चर्चा तेज हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों दल 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में दोबारा साथ आ सकते हैं। हालांकि, BJP की ओर से फिलहाल इन अटकलों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।
BJP-Akali Dal Alliance: 2027 में फिर साथ आ सकते हैं BJP-अकाली दल-
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि BJP का गठबंधन पंजाब के लोगों के साथ है। वहीं, BJP के पंजाब प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि पार्टी राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और BJP के कई वरिष्ठ नेता भी पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने के संकेत दे चुके हैं। हालांकि, कैप्टन अमरिंदर सिंह और सुनील जाखड़ समेत BJP के कुछ नेताओं का मानना है कि अकाली दल के साथ गठबंधन से पार्टी को चुनावी फायदा मिल सकता है। BJP अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी कहा है कि गठबंधन को लेकर अंतिम फैसला सही समय पर लिया जाएगा।
BJP-Akali Dal Alliance: 1952 में पहली बार साथ आए थे दोनों दल-
BJP और अकाली दल के राजनीतिक रिश्तों की जड़ें भारतीय जनसंघ के दौर तक जाती हैं। साल 1952 में दोनों दलों के बीच वैचारिक मतभेद थे। पंजाब में भाषा के मुद्दे पर अकाली दल पंजाबी और जनसंघ हिंदी के पक्ष में था। इसके बावजूद कांग्रेस को चुनौती देने के लिए दोनों दल पहली बार 1952 में साथ आए।
1967 में मिलकर बनाई सरकार-
1957 से 1966 के बीच अकाली दल की पंजाबी सूबे की मांग का जनसंघ ने विरोध किया। लेकिन 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के बाद 1967 में कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने के लिए दोनों दल फिर साथ आए और सरकार बनाई। हालांकि, यह गठबंधन ज्यादा समय तक नहीं चला। 1970 में हिंदी-पंजाबी भाषा नीति और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद के बाद जनसंघ ने प्रकाश सिंह बादल सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
आपातकाल ने फिर बढ़ाई नजदीकी-
1975 से 1977 के आपातकाल के दौरान दोनों दलों के बीच फिर नजदीकियां बढ़ीं। इसके बाद 1977 में जनता पार्टी, जिसमें जनसंघ भी शामिल था, और अकाली दल ने मिलकर पंजाब में सरकार बनाई।
1996 के मोगा डिक्लेरेशन के बाद मजबूत हुआ गठबंधन-
1990 के दशक में दोनों दलों की दूरियां कम होने लगीं। 1996 के मोगा डिक्लेरेशन के बाद 1997 के पंजाब विधानसभा चुनाव में BJP और अकाली दल ने औपचारिक गठबंधन किया। इसके बाद दोनों पार्टियों की साझेदारी करीब 23 साल तक चली। इस दौरान गठबंधन ने 1997, 2007 और 2012 के पंजाब विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बनाई।
क्या था मोगा डिक्लेरेशन-
1996 में अकाली दल ने मोगा में एक अहम घोषणा की थी। इसके तहत पार्टी ने खुद को केवल सिख समुदाय की पार्टी तक सीमित रखने के बजाय सभी धर्मों और समुदायों के पंजाबियों की पार्टी यानी ‘पंजाबियत’ के रूप में पेश किया।
2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर टूटा गठबंधन-
केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध के बीच 2020 में अकाली दल ने NDA से नाता तोड़ लिया। पार्टी की नेता हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद BJP और अकाली दल के लंबे राजनीतिक गठबंधन का अंत हो गया।
अलग होने के बाद कैसा रहा चुनावी प्रदर्शन-
पुराने सीट-बंटवारे के फॉर्मूले के तहत पंजाब विधानसभा चुनाव में अकाली दल 94 और BJP 23 सीटों पर चुनाव लड़ती थी। वहीं लोकसभा चुनाव में अकाली दल 10 और BJP 3 सीटों पर उम्मीदवार उतारती थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने पंजाब में अलग-अलग चुनाव लड़ा। BJP को राज्य में एक भी सीट नहीं मिली, जबकि अकाली दल केवल बठिंडा सीट जीत सका। अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच संभावित वापसी की चर्चा ने पंजाब की सियासत को फिर गर्म कर दिया है। हालांकि, गठबंधन होगा या दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ेंगी, इसका फैसला आने वाले समय में ही साफ होगा।
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