BRICS Summit 2026: दुनिया में बढ़ते युद्ध, आर्थिक तनाव और सप्लाई चेन की चुनौतियों के बीच BRICS समिट के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ कहा कि वैश्विक तनाव का सबसे ज्यादा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। भारत मंडपम में BRICS नेताओं के ग्रुप फोटो में मोदी के एक तरफ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नजर आए। यह तस्वीर महज फोटो सेशन नहीं थी, बल्कि मौजूदा वैश्विक राजनीति में भारत की संतुलित कूटनीति की तस्वीर भी मानी जा सकती है।
भारत की अध्यक्षता में हो रहे 18वें BRICS सम्मेलन का फोकस सिर्फ बड़ी भू-राजनीतिक बहसों तक सीमित नहीं रहा। महामारी, जलवायु संकट, आपदा प्रबंधन, सप्लाई चेन, स्टार्टअप, MSME और डिजिटल सहयोग जैसे मुद्दों को भी एजेंडे में प्रमुखता दी गई। ऐसे में सवाल है कि BRICS के इस सम्मेलन से भारत और आम लोगों के लिए आखिर क्या संदेश और क्या ठोस पहल सामने आई हैं?
सवाल-1: मोदी ने दुनिया में बढ़ते तनाव को लेकर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है। उन्होंने महामारी, जलवायु आपदाओं और सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों का उदाहरण देते हुए कहा कि आज दुनिया के देश पहले से कहीं ज्यादा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। किसी एक हिस्से में पैदा हुआ संकट दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन को भी प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि भारत ने BRICS के एजेंडे में संकट से निपटने की तैयारी और आपसी सहयोग पर जोर दिया।
BRICS Summit 2026: सवाल-2: जिनपिंग और पुतिन के बीच मोदी की तस्वीर का क्या मतलब?
BRICS के दूसरे दिन नेताओं के ग्रुप फोटो में मोदी के दोनों ओर जिनपिंग और पुतिन दिखाई दिए। कूटनीतिक नजरिए से यह तस्वीर इसलिए अहम है क्योंकि भारत एक साथ अमेरिका, रूस, चीन और दूसरे प्रमुख वैश्विक खिलाड़ियों के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की कोशिश करता है। मोदी-जिनपिंग की मुलाकात खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन रिश्तों में काफी तनाव रहा है। सात साल बाद जिनपिंग का भारत आना और दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बातचीत इस बात का संकेत है कि दोनों देश कम से कम संवाद और तनाव प्रबंधन के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं। वहीं रूस के साथ भारत के पुराने रणनीतिक संबंध हैं। इसलिए तस्वीर का संदेश यह नहीं कि भारत किसी एक खेमे में जा रहा है, बल्कि यह है कि भारत अलग-अलग शक्ति केंद्रों के साथ अपने हितों के आधार पर संवाद बनाए रखना चाहता है।
सवाल-3: BRICS के दूसरे दिन सबसे बड़ा फोकस किस पर रहा?
भारत की अध्यक्षता में BRICS के काम को चार प्रमुख आधारों पर आगे बढ़ाया गया- रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी। सरल भाषा में इसका मतलब है कि संकट के समय देश ज्यादा मजबूत रहें, नई तकनीक और नए विचारों को बढ़ावा मिले, सदस्य देश एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करें और विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन भी बना रहे। मोदी ने कहा कि BRICS को ऐसी पहल पर ध्यान देना चाहिए, जिसका वास्तविक फायदा सदस्य देशों और उनके लोगों को मिले।

BRICS Summit 2026: सवाल-4: आम लोगों के लिए BRICS से क्या बदलेगा?
BRICS को अक्सर बड़े देशों की अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस बार कुछ पहल सीधे रोजगार, कारोबार और रोजमर्रा की आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी हैं। MSME के लिए BRICS पोर्टल की पहल छोटे कारोबारियों को जानकारी, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने के उद्देश्य से की गई है। इसके अलावा BRICS देशों के स्टार्टअप्स को जोड़ने के लिए BRICS Incubator Network बनाने और बड़े स्तर पर काम आने वाले नए आइडिया को बढ़ावा देने के लिए Startup Innovation Fund का प्रस्ताव रखा गया है। अगर ये पहल जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू होती हैं तो छोटे कारोबारियों और स्टार्टअप्स के लिए विदेशी बाजारों तक पहुंच के नए रास्ते खुल सकते हैं।
सवाल-5: सप्लाई चेन को लेकर भारत इतना जोर क्यों दे रहा है?
कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया ने देखा कि किसी एक देश या क्षेत्र में उत्पादन रुकने का असर हजारों किलोमीटर दूर दूसरे देशों पर भी पड़ सकता है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए BRICS में Logistics Supply Chain Cooperation Framework पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सामान की आवाजाही और सप्लाई नेटवर्क को ज्यादा भरोसेमंद बनाना है। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मजबूत सप्लाई चेन से उद्योगों को कच्चा माल और जरूरी सामान समय पर मिल सकता है और वैश्विक संकट के दौरान अचानक होने वाली बाधाओं का असर कम किया जा सकता है।
BRICS Summit 2026: सवाल-6: स्वास्थ्य और आपदा के मोर्चे पर क्या पहल हुई?
मोदी ने कहा कि महामारी और आपदाओं ने दुनिया को यह सिखाया है कि संकट आने के बाद तैयारी करने के बजाय पहले से तैयार रहना ज्यादा जरूरी है। इसी सोच के तहत BRICS देशों के बीच संक्रामक बीमारियों के फैलाव को लेकर Integrated Early Warning System पर काम करने की बात सामने आई है। इसके साथ आपदा संबंधी डेटा को बेहतर तरीके से साझा करने के लिए Early Warning Data Integration Guidelines भी तैयार की गई हैं। इसका उद्देश्य यह है कि किसी संभावित महामारी या आपदा के शुरुआती संकेत मिलने पर सदस्य देश तेजी से जानकारी साझा कर सकें और तैयारी कर सकें।
सवाल-7: BRICS में आतंकवाद पर क्या संदेश गया?
नई दिल्ली डेक्लरेशन में BRICS देशों ने पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की है। सदस्य देशों ने आतंकवाद से निपटने, आतंकियों की फंडिंग रोकने और उन्हें सुरक्षित ठिकाने उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। यह भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली लंबे समय से BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई और आतंकवाद की वित्तीय सप्लाई रोकने का मुद्दा उठाता रहा है।
BRICS Summit 2026: सवाल-8: क्या BRICS पश्चिम के खिलाफ कोई नया गुट बन रहा है?
ऐसा कहना फिलहाल सही नहीं होगा। BRICS का आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव जरूर बढ़ा है, लेकिन भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि यह किसी देश के खिलाफ बनाया गया मंच नहीं है। डॉलर पर निर्भरता कम करने, स्थानीय मुद्राओं में कारोबार और डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने जैसी चर्चाएं जरूर चल रही हैं। लेकिन BRICS की अपनी कोई साझा करेंसी या एकीकृत पेमेंट सिस्टम अभी मौजूद नहीं है। भारत की कोशिश यह है कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की आवाज ज्यादा मजबूत हो और उन्हें फैसले लेने की प्रक्रिया में अधिक भूमिका मिले।

चीन और रूस के बीच भारत की भूमिका कितनी अहम? यही इस पूरे सम्मेलन का सबसे दिलचस्प कूटनीतिक पहलू है। भारत के रूस के साथ मजबूत संबंध हैं, जबकि चीन के साथ सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा दोनों मौजूद हैं। इसके बावजूद तीनों देश BRICS जैसे मंच पर एक साथ काम कर रहे हैं। भारत के लिए चुनौती यही है कि वह रूस और चीन के साथ संवाद बनाए रखते हुए अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को भी नुकसान न पहुंचाए। इसलिए मोदी की जिनपिंग और पुतिन के बीच वाली तस्वीर को भारत की “मल्टी-अलाइनमेंट” या बहु-साझेदारी वाली विदेश नीति के संदर्भ में देखना ज्यादा उचित होगा।
BRICS से भारत को असल फायदा क्या?
भारत की अध्यक्षता वाले इस सम्मेलन की सबसे बड़ी उपलब्धि सिर्फ बड़े नेताओं की मुलाकातें नहीं हैं। असली परीक्षा इन फैसलों के लागू होने की होगी। MSME और स्टार्टअप नेटवर्क से कारोबार के नए अवसर बनते हैं या नहीं, सप्लाई चेन फ्रेमवर्क कितना प्रभावी होता है, स्वास्थ्य और आपदा चेतावनी प्रणाली कितनी तेजी से काम करती है और आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई कितनी मजबूत होती है—इनसे BRICS की वास्तविक उपयोगिता तय होगी।
दिल्ली में BRICS के दूसरे दिन की तस्वीर में मोदी के एक तरफ जिनपिंग और दूसरी तरफ पुतिन थे। लेकिन इस तस्वीर का सबसे बड़ा संदेश किसी नए गठबंधन से ज्यादा संतुलन और संवाद का है। दुनिया में तनाव बढ़ रहा है, व्यापार और सप्लाई चेन पर दबाव है और कई क्षेत्रों में संघर्ष जारी हैं। ऐसे समय में भारत BRICS को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी का मंच बनाने के बजाय आर्थिक सहयोग, तकनीक, रोजगार, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
ये भी पढ़े… BRICS Summit के बीच शी जिनपिंग के खिलाफ प्रदर्शन क्यों? दिल्ली में करीब 50 तिब्बती कार्यकर्ता हिरासत में








