Budh Pradosh Vrat: महादेव और माता पार्वती की पूजा के लिए रखा जाने वाला प्रदोष व्रत इस बार 15 अप्रैल, बुधवार को है। बुधवार के दिन पड़ने के कारण इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए बहुत खास माना जाता है।
तिथि और नक्षत्र की जानकारी
इस दिन वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। पूर्व भाद्रपद नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 22 मिनट तक रहेगा, इसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र शुरू हो जाएगा।

बुध प्रदोष व्रत के लाभ
बुधवार का संबंध बुध ग्रह से होता है। इसलिए इस दिन व्रत रखने से बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता मिलने की मान्यता है। कहा जाता है कि इस व्रत से सोचने की क्षमता बढ़ती है, व्यवहार में सुधार आता है और बोलने का तरीका बेहतर होता है। साथ ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
Budh Pradosh Vrat: सूर्योदय, सूर्यास्त और प्रदोष काल
इस दिन सूर्योदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 47 मिनट पर।
त्रयोदशी तिथि रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।
प्रदोष काल शाम 6 बजकर 47 मिनट से रात 9 बजे तक रहेगा (लगभग 2 घंटे 13 मिनट)। इस समय शिव पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:27 से 5:11 तक
- अमृत काल: सुबह 7:37 से 9:10 तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:30 से 3:21 तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:46 से 7:08 तक
इस दिन अभिजित मुहूर्त नहीं है।

अशुभ समय
- राहुकाल: दोपहर 12:21 से 1:58 तक (इस समय शुभ कार्य न करें)
- यमगंड: सुबह 7:32 से 9:09 तक
- भद्रा: रात 10:31 से अगले दिन सुबह 5:55 तक
- पंचक: पूरे दिन प्रभावी रहेगा
Budh Pradosh Vrat: व्रत विधि (कैसे करें पूजा)
बुध प्रदोष व्रत रखने वाले भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।इसके साथ बेलपत्र, आक के फूल और सफेद चंदन चढ़ाएं।
व्रत करने के फायदे
इस व्रत को करने से मन को शांति मिलती है, बुद्धि तेज होती है और जीवन की परेशानियां धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं। साथ ही व्यक्ति के कामों में सफलता मिलने की संभावना भी बढ़ती है।
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