
गुरु पूर्णिमा पर वृंदावन में संत प्रेमानंद का भव्य स्वागत, शिष्यों ने गुलाब के फूल बिछाए
Premanand Maharaj: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वृंदावन में संत प्रेमानंद का उनके शिष्यों और भक्तों ने भव्य स्वागत किया। बुधवार सुबह गुरु पूजन

Premanand Maharaj: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वृंदावन में संत प्रेमानंद का उनके शिष्यों और भक्तों ने भव्य स्वागत किया। बुधवार सुबह गुरु पूजन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने पवित्र स्नान, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। अयोध्या और शिरडी में भी आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला।

भारी बारिश, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण चार धाम यात्रा मंगलवार और बुधवार के लिए रोक दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। मौसम सामान्य होने के बाद यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।

गरुड़ पुराण में तेरहवीं के भोजन और मृत्यु भोज से जुड़े नियमों का विस्तार से वर्णन किया गया है। जानिए ब्रह्मभोज का धार्मिक महत्व, इसे किसे करना चाहिए, किसे नहीं और इसके पीछे की आध्यात्मिक मान्यताएं।

खंडवा के टाकली मोरी गांव स्थित 1000 साल पुराने आसरा माता मंदिर में निसंतान दंपतियों की मन्नत पूरी होने की मान्यता है। यहां 5 मंगलवार तक पूजा करने और नदी में स्नान करने की परंपरा है, जिसके कारण दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

साप्ताहिक राशिफल में जानें 20 जुलाई से 26 जुलाई 2026 तक सभी राशियों के लिए आर्थिक स्थिति, स्वास्थ्य, करियर, परिवार और जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत। लग्न राशि के आधार पर जानें इस सप्ताह किन बातों का ध्यान रखना लाभकारी रहेगा और किन क्षेत्रों में सफलता मिल सकती है।

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भारी भीड़ में दम घुटने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। सरकार ने भगदड़ की बात से इनकार किया है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण बढ़ाया है, जबकि मामले की जांच जारी है।

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ हर वर्ष रानी गुंडीचा के मंदिर जाते हैं। जानिए रानी गुंडीचा कौन थीं, उनसे जुड़ी पौराणिक कथा, राजा इंद्रद्युम्न का वरदान और वह मान्यता, जिसके कारण यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का शुभारंभ पुरी में हो चुका है। इस लेख में रथ यात्रा की शुरुआत से जुड़ी धार्मिक कथाएं, गुंडिचा मंदिर का महत्व, तीनों रथों की विशेषताएं और इस पवित्र यात्रा में शामिल होने से मिलने वाले धार्मिक एवं आध्यात्मिक लाभ बताए गए हैं।

16 जुलाई 2026 के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, अभिजित मुहूर्त, राहुकाल, दिशाशूल और राशि परिवर्तन की पूरी जानकारी दी गई है। साथ ही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और सूर्य देव की पूजा के धार्मिक महत्व के बारे में भी बताया गया है।

Premanand Maharaj: गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर वृंदावन में संत प्रेमानंद का उनके शिष्यों और भक्तों ने भव्य स्वागत किया। बुधवार सुबह गुरु पूजन

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने पवित्र स्नान, पूजा-अर्चना और दान-पुण्य कर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। अयोध्या और शिरडी में भी आस्था का विशेष माहौल देखने को मिला।

भारी बारिश, भूस्खलन और खराब मौसम के कारण चार धाम यात्रा मंगलवार और बुधवार के लिए रोक दी गई है। प्रशासन ने यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया है। मौसम सामान्य होने के बाद यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी।

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खंडवा के टाकली मोरी गांव स्थित 1000 साल पुराने आसरा माता मंदिर में निसंतान दंपतियों की मन्नत पूरी होने की मान्यता है। यहां 5 मंगलवार तक पूजा करने और नदी में स्नान करने की परंपरा है, जिसके कारण दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

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पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान भारी भीड़ में दम घुटने से दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। सरकार ने भगदड़ की बात से इनकार किया है। प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण बढ़ाया है, जबकि मामले की जांच जारी है।

पुरी की जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ हर वर्ष रानी गुंडीचा के मंदिर जाते हैं। जानिए रानी गुंडीचा कौन थीं, उनसे जुड़ी पौराणिक कथा, राजा इंद्रद्युम्न का वरदान और वह मान्यता, जिसके कारण यह परंपरा आज भी निभाई जाती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का शुभारंभ पुरी में हो चुका है। इस लेख में रथ यात्रा की शुरुआत से जुड़ी धार्मिक कथाएं, गुंडिचा मंदिर का महत्व, तीनों रथों की विशेषताएं और इस पवित्र यात्रा में शामिल होने से मिलने वाले धार्मिक एवं आध्यात्मिक लाभ बताए गए हैं।

16 जुलाई 2026 के पंचांग में तिथि, नक्षत्र, योग, अभिजित मुहूर्त, राहुकाल, दिशाशूल और राशि परिवर्तन की पूरी जानकारी दी गई है। साथ ही भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा और सूर्य देव की पूजा के धार्मिक महत्व के बारे में भी बताया गया है।